चंपावत। उत्तराखंड के शांत कहे जाने वाले पर्वतीय क्षेत्रों में अपराध की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। चंपावत जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सानिया गांव में शनिवार को एक बुजुर्ग की उनके ही पड़ोसी ने दरांती (धारदार हथियार) से हमला कर निर्मम हत्या कर दी। इस चंपावत हत्याकांड के बाद से सीमांत जिले में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार, मौके पर ही दम तोड़ा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार (7 फरवरी) को सानिया गांव उस समय दहल उठा जब 80 वर्षीय बुजुर्ग अंबादत्त खर्कवाल पुत्र स्वर्गीय भैरव दत्त खर्कवाल पर उनके पड़ोसी सुभाष खर्कवाल ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी सुभाष ने दरांती से बुजुर्ग के शरीर पर कई वार किए। हमला इतना भीषण था कि अंबादत्त खर्कवाल को संभलने का मौका तक नहीं मिला और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
आरोपी की मानसिक स्थिति और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी बीएस बिष्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सुभाष खर्कवाल को हिरासत में ले लिया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी सुभाष मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जिसका लंबे समय से उपचार भी चल रहा बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है ताकि हत्या के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
चंपावत पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और फॉरेंसिक टीम ने भी घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।
अकेलेपन का शिकार बने बुजुर्ग अंबादत्त
मृतक अंबादत्त खर्कवाल के परिवार की स्थिति भी काफी मार्मिक है। बताया जा रहा है कि वह गांव में अकेले ही रहते थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं, लेकिन आजीविका और रोजगार के सिलसिले में उनके दोनों बेटे पहाड़ से बाहर रहते हैं। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ के गांवों में अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा और ‘पलायन’ के दर्द को उजागर कर दिया है। यदि परिवार का कोई अन्य सदस्य साथ होता, तो शायद इस अनहोनी को टाला जा सकता था।
गांव में दहशत, ग्रामीणों ने की सुरक्षा की मांग
इस बुजुर्ग की हत्या के बाद सानिया गांव समेत आसपास के इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी की मानसिक स्थिति को देखते हुए वह पहले भी कई बार हिंसक व्यवहार कर चुका था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे देगा। गांव के प्रधान और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे हिंसक प्रवृत्ति के मानसिक रोगियों के लिए उचित निगरानी या उपचार की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य निर्दोष की जान न जाए।
चंपावत हत्याकांड: मुख्य बिंदु एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम | अंबादत्त खर्कवाल (80 वर्ष) |
| आरोपी का नाम | सुभाष खर्कवाल (पड़ोसी) |
| वारदात का स्थान | सानिया गांव, चंपावत |
| हथियार | दरांती (धारदार कृषि यंत्र) |
| पुलिस कार्रवाई | आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी |
कानून और सुरक्षा पर उठते सवाल
उत्तराखंड क्राइम न्यूज़ के लिहाज से यह घटना गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह हमला अचानक आई किसी मानसिक उत्तेजना का परिणाम था या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश छिपी थी। कोतवाली प्रभारी बीएस बिष्ट ने मीडिया को दिए बयान में कहा:
“हमने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिया गया है। फिलहाल हत्या का स्पष्ट कारण पता नहीं चल सका है, लेकिन आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य और अन्य संभावित एंगल पर जांच जारी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है।”
पहाड़ की शांत वादियों में इस तरह की हिंसक घटनाएं सामाजिक ताने-बने पर सवाल उठाती हैं। बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल पुलिस बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। चंपावत की इस घटना ने पूरे जिले को शोक संतप्त कर दिया है और अब सबकी नजरें पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।



