
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर उबाल आने वाला है। प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, ध्वस्त कानून व्यवस्था और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज राज्य में हर व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।
जनता के हक की आवाज बुलंद करने के लिए कांग्रेस आगामी 16 फरवरी को देहरादून में राजभवन का विशाल घेराव करने जा रही है। इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस मुख्यालय में बैठकों का दौर जारी है और रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
‘विघटनकारी राजनीति कर रही सरकार’ – गणेश गोदियाल
देहरादून में पत्रकारों से वार्ता करते हुए गणेश गोदियाल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए समाज में विघटन और ध्रुवीकरण की स्थिति पैदा कर रही है। गोदियाल ने कहा, “भाजपा ने चुनाव के समय जनता से जो वादे किए थे, वे समय के साथ धराशायी हो गए हैं। आज राज्य का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है और महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं, लेकिन सरकार केवल जुमलेबाजी में व्यस्त है।”
कानून व्यवस्था और बेरोजगारी पर प्रहार
कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य की बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। बेरोजगारी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का शिक्षित युवा हताश है और सरकार के पास रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना नहीं है।
मनरेगा का नाम बदलने और बिजली संकट पर आक्रोश
कांग्रेस के इस आंदोलन के केंद्र में मनरेगा (MGNREGA) का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल है। गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार मनरेगा का नाम बदलने की साजिश कर रही है और श्रमिकों के हक को मारने की कोशिश की जा रही है।
इसके साथ ही, राज्य में बिजली की बढ़ती कीमतों ने भी कांग्रेस को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। गोदियाल ने कहा, “एक तरफ तो सरकार विद्युत नियामक आयोग में घटौती का नाटक कर रही है और दूसरी तरफ पिछले दरवाजे से बिजली के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर आम जनता की कमर तोड़ रही है। उत्तराखंड जैसे ऊर्जा प्रदेश में जनता को सस्ती बिजली मिलनी चाहिए थी, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है।”
16 फरवरी: राजभवन घेराव की महा-रणनीति
कांग्रेस पार्टी इस प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। संगठन महामंत्री राजेंद्र भंडारी और गणेश गोदियाल खुद तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।
प्रदर्शन के मुख्य बिंदु:
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मनरेगा का अस्तित्व: योजना का नाम बदलने और बजट में कटौती के खिलाफ विरोध।
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महिला सुरक्षा: प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों और अंकिता भंडारी जैसे मामलों में न्याय की मांग।
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ध्वस्त कानून व्यवस्था: बढ़ते अपराध और पुलिस प्रशासन की विफलता।
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महंगाई और बिजली दरें: घरेलू और व्यावसायिक बिजली की कीमतों में की गई वृद्धि को वापस लेने की मांग।
कौन-कौन होगा शामिल?
पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, इस विशाल घेराव में कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता, वर्तमान और पूर्व विधायक, एआईसीसी (AICC) और पीसीसी (PCC) सदस्य शामिल होंगे। इसके अलावा, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI) और पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे।
भाजपा के ‘वादों’ पर कांग्रेस का कटाक्ष
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने सत्ता में आने के लिए जो लोकलुभावन वादे किए थे, उन्हें अब भुला दिया गया है। गणेश गोदियाल ने कहा कि जनता अब इन जुमलों को समझ चुकी है और 16 तारीख का प्रदर्शन सरकार की उल्टी गिनती की शुरुआत होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा देने वाली सरकार के कार्यकाल में घोटाले और अपराध चरम पर हैं।
क्या यह प्रदर्शन बदलेगा राज्य की राजनीतिक दिशा?
उत्तराखंड की राजनीति में 16 फरवरी का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। एक ओर जहां कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार के लिए यह अपनी उपलब्धियों को सही साबित करने की चुनौती होगी।



