
देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने देहरादून के हर्रावला में नवनिर्मित ‘शकुंतला रानी सरदारी लाल ओबेरॉय राजकीय मैटरनिटी एवं कैंसर चिकित्सालय’ का विस्तृत निरीक्षण किया। मुख्य सचिव के इस दौरे ने साफ कर दिया है कि सरकार इस अस्पताल को केवल एक क्षेत्रीय चिकित्सालय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के एक ‘सुपर स्पेशलिटी कैंसर सेंटर’ के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है।
एक छत के नीचे मिलेंगी सभी आधुनिक सुविधाएं
निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने नवनिर्मित भवन की वास्तुकला, वार्डों की क्षमता और भविष्य की कार्ययोजना के विषय में अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि कैंसर जैसे जटिल रोग के उपचार के लिए मरीजों को भटकना न पड़े, इसके लिए सभी प्रकार के डायग्नोस्टिक परीक्षण और उच्च स्तरीय मेडिकल सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्य सचिव ने भवन की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि हर्रावला का यह अस्पताल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी कैंसर उपचार का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
स्टाफ के लिए बनेगा आवासीय परिसर: भूमि तलाशने के निर्देश
किसी भी बड़े अस्पताल की सफलता उसके डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की 24×7 उपलब्धता पर निर्भर करती है। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए इसके समीप ही डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ के लिए आवासीय भवनों का होना अनिवार्य है।
मुख्य सचिव के प्रमुख निर्देश:
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अस्पताल के आसपास उपयुक्त भूमि की तत्काल तलाश की जाए ताकि आवासीय परिसर का निर्माण शुरू हो सके।
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स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करे कि अस्पताल को आधुनिकतम मशीनों और उपकरणों से जल्द से जल्द लैस किया जाए।
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महानिदेशक स्वास्थ्य को निर्देश दिए गए कि वे मशीनों की खरीद और स्थापना के लिए अपनी विस्तृत योजना (Action Plan) साझा करें।
मैटरनिटी और कैंसर उपचार का अनूठा संगम
यह अस्पताल अपनी तरह का एक अनूठा केंद्र होगा जहाँ मैटरनिटी (प्रसूति) और कैंसर चिकित्सा दोनों ही क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं मिलेंगी। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि यहाँ गंभीर रोगों के लिए अक्सर मरीजों को दिल्ली या चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ‘शकुंतला रानी सरदारी लाल ओबेरॉय’ अस्पताल के शुरू होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि इलाज के खर्च में भी कमी आएगी।
राष्ट्रीय स्तर की कार्यप्रणाली पर जोर
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल भवन खड़ा करना नहीं, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर के मानकों पर संचालित करना है। इसके लिए टाटा मेमोरियल जैसे संस्थानों के मॉडल को अपनाए जाने और विशेषज्ञों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर है और इसमें बजट की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा ने मुख्य सचिव को विभाग की तैयारियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है और विशेषज्ञों की भर्ती के लिए भी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
स्थानीय लोगों में उत्साह और आर्थिक विकास की उम्मीद
हर्रावला और आसपास के क्षेत्रों में इस अस्पताल के निर्माण से स्थानीय लोग भी उत्साहित हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ इस बड़े प्रोजेक्ट से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। अस्पताल के चारों ओर बुनियादी सुविधाओं (Infrastructural support) के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।
उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘गेम चेंजर’
हर्रावला का यह नवनिर्मित चिकित्सालय उत्तराखंड की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की सक्रियता और स्टाफ हाउसिंग जैसे व्यावहारिक समाधानों पर उनका जोर यह दर्शाता है कि राज्य सरकार इस बार केवल फाइलों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूत स्वास्थ्य सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
आने वाले महीनों में मशीनों की स्थापना और विशेषज्ञों की तैनाती के साथ ही यह अस्पताल विधिवत रूप से जनता को समर्पित कर दिया जाएगा, जिससे देवभूमि के हजारों कैंसर रोगियों को जीवन की नई उम्मीद मिलेगी।



