
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ‘रेल अवसंरचना’ के क्षेत्र में एक नए स्वर्णिम अध्याय की ओर अग्रसर है। गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में मुरादाबाद मंडल की मंडल रेल प्रबंधक (DRM) विनीता श्रीवास्तव और मुख्यमंत्री के बीच हुई शिष्टाचार भेंट ने राज्य की रेल परियोजनाओं को नई दिशा और गति प्रदान की है। इस उच्च स्तरीय बैठक में न केवल वर्तमान परियोजनाओं की समीक्षा की गई, बल्कि आगामी ‘अर्द्धकुंभ’ और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामरिक महत्व को देखते हुए भविष्य की जरूरतों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन: पहाड़ की लाइफलाइन पूर्णता की ओर
उत्तराखंड की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को लेकर सुखद समाचार सामने आए हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि 125.20 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना का सुरंग (Tunnel) निर्माण कार्य लगभग 94 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है।
इस परियोजना की विशेषताएं:
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स्टेशन व पुल: मार्ग में 12 आधुनिक स्टेशन, 35 पुल और 17 सुरंगें बनाई जा रही हैं।
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कनेक्टिविटी: यह लाइन केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की रसद आपूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
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इंजीनियरिंग का कमाल: कठिन हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण का 94% कार्य पूर्ण होना भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
रुड़की-देवबंद रेल लाइन का कमीशन: मैदानी कनेक्टिविटी हुई मजबूत
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि रुड़की से देवबंद को जोड़ने वाली 27.45 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का कमीशनिंग कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस परियोजना के शुरू होने से झबरेड़ा और बनहेड़ा खास जैसे क्षेत्रों में नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण हुआ है, जिससे स्थानीय व्यापार और आवागमन को नई ऊर्जा मिलेगी।
‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ से बदलेंगे हर्रावाला, रुड़की और कोटद्वार
केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत उत्तराखंड के स्टेशनों को ‘विश्वस्तरीय’ बनाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
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सुविधाएं: इन स्टेशनों पर नए भव्य स्टेशन भवन, वातानुकूलित प्रतीक्षालय, आधुनिक फूड कोर्ट और दिव्यांगजनों के अनुकूल बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है।
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हब विकास: हर्रावाला स्टेशन को देहरादून के विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां 24-कोच वाली ट्रेनों को हैंडल करने की क्षमता विकसित की जा रही है।
सुरक्षा और गति पर विशेष जोर: 160 KM/H का लक्ष्य
राज्य में रेल परिवहन को सुरक्षित और तेज बनाने के लिए रेलवे प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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रफ़्तार में वृद्धि: लक्सर-हरिद्वार रेल खंड की गति सीमा को बढ़ाकर 110 किमी/घंटा कर दिया गया है। भविष्य में इसे 130 और अंततः 160 किमी/घंटा तक ले जाने का रोडमैप तैयार है।
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फाटक मुक्त रेलवे: लक्सर, रुड़की और ऐथल जैसे व्यस्त क्षेत्रों में ROB (रोड ओवर ब्रिज), RUB और LHS का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इससे न केवल रेल सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि स्थानीय जनता को जाम से भी मुक्ति मिली है।
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वन्यजीव सुरक्षा: हरिद्वार-देहरादून रेल खंड पर ‘वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ के सहयोग से वन्यजीव न्यूनीकरण योजना तैयार की जा रही है, ताकि राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
टनकपुर स्टेशन और अर्द्धकुंभ: CM धामी के कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक के दौरान विशेष रूप से कुमाऊं मंडल के प्रवेश द्वार टनकपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टनकपुर क्षेत्र नेपाल सीमा और पूर्णागिरि धाम के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः यहाँ यात्री सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता पर होना चाहिए।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने आगामी अर्द्धकुंभ की तैयारियों को लेकर रेलवे को अलर्ट मोड पर रहने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रेल सेवाओं और स्टेशन प्रबंधन को समयबद्ध तरीके से उन्नत किया जाए।
समन्वय से सुलझेंगे लंबित प्रकरण
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए कुछ लंबित परियोजनाओं पर तत्काल समाधान के निर्देश दिए:
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इकबालपुर ROB: पीडब्ल्यूडी के पास लंबित अप्रोच भूमि के मामले को जल्द सुलझाने को कहा।
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धनौरा ROB: रक्षा भूमि से संबंधित प्रकरणों पर केंद्र से बेहतर समन्वय के निर्देश दिए।
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लक्सर LHS: उच्च जलस्तर की समस्या को देखते हुए दोपहिया वाहनों के अनुकूल संशोधित FOB (फुट ओवर ब्रिज) बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
विकसित उत्तराखंड की नई पटरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में रेल नेटवर्क का विस्तार केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक स्वावलंबन और सामरिक सुरक्षा का भी प्रतीक है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग जैसी चुनौतीपूर्ण परियोजना का 94% पूर्ण होना इस बात का प्रमाण है कि आने वाले कुछ वर्षों में पहाड़ की कंदराओं में रेल की सीटी गूंजने वाली है।



