भुवनेश्वर। सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और एक ‘स्वस्थ ओडिशा’ के संकल्प की दिशा में मोहन चरण माझी सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। ओडिशा सरकार ने पूरे राज्य में गुटखा, तंबाकू और निकोटीन युक्त सभी खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। 21 जनवरी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के बाद अब राज्य में तंबाकू उत्पादों का व्यापार करना गैर-कानूनी माना जाएगा।
यह कदम केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि युवाओं को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की गिरफ्त से बचाने के लिए सरकार द्वारा उठाई गई एक बड़ी स्वास्थ्य मुहिम है।
प्रतिबंध का दायरा: क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, प्रतिबंध का दायरा काफी विस्तृत रखा गया है ताकि नियमों में कोई लूपहोल (कमी) न रह जाए। अब ओडिशा में निम्नलिखित गतिविधियों पर पूरी तरह रोक होगी:
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उत्पादन एवं प्रोसेसिंग: किसी भी प्रकार के तंबाकू युक्त गुटखा या पान मसाले का निर्माण।
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भंडारण एवं परिवहन: गोदामों में स्टॉक रखना या एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना।
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बिक्री एवं वितरण: फुटकर दुकानों, थोक विक्रेताओं और ऑनलाइन माध्यमों से बिक्री।
यह प्रतिबंध उन सभी चबाने वाले उत्पादों पर लागू होगा जिनमें तंबाकू या निकोटीन मिला हुआ है। चाहे वह फ्लेवर वाला हो, सुगंधित हो, या किसी अन्य मसाले के साथ मिश्रण के रूप में हो, प्रशासन अब किसी भी रूप में इसकी मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट और FSSAI के मानकों का पालन
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कठोर निर्णय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 (सेक्शन 2.3.4) के तहत लिया गया है। यह आदेश माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के पुराने निर्देशों और FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।
अधिसूचना में कहा गया है कि यह नया आदेश 3 जनवरी 2013 को जारी पुराने प्रतिबंध के प्रावधानों को संशोधित और अधिक सशक्त बनाता है। पिछले नियमों में कुछ अस्पष्टताएं थीं, जिनका लाभ उठाकर तंबाकू माफिया नियमों को धता बता रहे थे। अब नए आदेश ने पूरे राज्य में एक समान और स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार कर दिया है।
कैंसर के खतरे पर सरकार की चिंता
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण कैंसर के बढ़ते मामले हैं। ओडिशा सरकार ने अधिसूचना में अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान संस्था (IARC), जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का हिस्सा है, की रिपोर्ट का हवाला दिया है।
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कार्सिनोजेनिक प्रभाव: शोध बताते हैं कि जर्दा, खैनी, गुटखा और सुगंधित तंबाकू सीधे तौर पर इंसानों में कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ (Carcinogenic) हैं।
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अंगों पर प्रभाव: तंबाकू का सेवन केवल मुंह के कैंसर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इसोफेगस (भोजन नली), पेट, पैंक्रियास, किडनी, और गले (Larynx & Pharynx) के कैंसर का मुख्य कारण है।
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अन्य बीमारियां: कैंसर के अलावा, ये उत्पाद दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारियों और हृदय संबंधी समस्याओं के लिए भी जिम्मेदार हैं।
युवा पीढ़ी को बचाने का संकल्प
ओडिशा सरकार का मानना है कि तंबाकू और निकोटीन न केवल स्वास्थ्य को खराब करते हैं, बल्कि समाज को आर्थिक रूप से भी खोखला करते हैं। मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवार इलाज के खर्च के कारण कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
“हमारा प्राथमिक लक्ष्य बच्चों और युवाओं को नशे की इस लत से बचाना है। यह प्रतिबंध एक स्वस्थ और सुरक्षित ओडिशा के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।” – स्वास्थ्य विभाग, ओडिशा
सख्ती से होगा क्रियान्वयन: प्रशासन की तैयारी
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से दुकानों और गोदामों पर छापेमारी करें। नियमों को तोड़ने वालों पर भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस सामाजिक बुराई को खत्म करने में प्रशासन का सहयोग करें। यदि कहीं अवैध रूप से गुटखा या तंबाकू की बिक्री हो रही है, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या स्वास्थ्य विभाग को दें।
ओडिशा सरकार का यह निर्णय स्वास्थ्य क्रांति की दिशा में एक साहसिक कदम है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि धरातल पर इसका क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है। यदि सरकार इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में राज्य में कैंसर और अन्य तंबाकू जनित रोगों के आंकड़ों में भारी गिरावट देखी जा सकती है।



