लक्सर (हरिद्वार): महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों और उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले कृत्यों पर उत्तराखंड की न्यायपालिका ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। लक्सर की सिविल जज व न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने करीब नौ साल पुराने एक मामले में फैसला सुनाते हुए दो युवकों को दोषी करार दिया है। घर में घुसकर स्नान कर रही युवती की निजता भंग करने और उसके साथ अभद्रता करने के गंभीर आरोपों में माननीय न्यायालय ने दोषियों को जेल की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड से भी दंडित किया है।
न्यायालय का फैसला: दो साल का कारावास और जुर्माना
सिविल जज व न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुराग त्रिपाठी की अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अवलोकन करने के बाद मुंडाखेड़ा कला निवासी दो आरोपियों—गुरुचरणदास और शुभम—को दोषी पाया। अदालत ने दोनों के खिलाफ निम्नलिखित सजाएं मुकर्रर की हैं:
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धारा 452 (घर में अनाधिकार प्रवेश): इस धारा के तहत दोनों दोषियों को दो-दो वर्ष का साधारण कारावास और 500-500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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धारा 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना): न्यायालय ने इस धारा में दोषियों को एक-एक वर्ष का साधारण कारावास और 500-500 रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला की निजता का उल्लंघन करना एक सभ्य समाज में अक्षम्य अपराध है और दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो समाज के लिए नजीर बने।
क्या था पूरा मामला: साल 2015 की वह घटना
अभियोजन अधिकारी कपिल पंत द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, यह घटना 15 अप्रैल 2015 की है। लक्सर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का निवासी वादी अपने खेत पर गया हुआ था। घर पर उसकी दो बेटियां और उनकी दृष्टिबाधित दादी मौजूद थीं।
दोपहर करीब दो बजे, आरोपी गुरुचरणदास और शुभम पूछताछ के बहाने घर के अंदर घुस गए। उस समय घर में कोई भी पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। घर की एक युवती उस वक्त स्नान कर रही थी।
निजता का उल्लंघन और अश्लीलता
आरोप है कि दोनों युवकों ने न केवल घर की मर्यादा लांघी, बल्कि गलत नीयत से बाथरूम में झांककर युवती की निजता भंग की। इतना ही नहीं, जब युवती ने विरोध करने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उसके कपड़े उठा लिए और अश्लील गालियां देते हुए वहां से फरार हो गए। युवती के शोर मचाने पर जब तक ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुँचते, आरोपी गांव से भाग चुके थे।
पीड़ित परिवार ने तुरंत कोतवाली लक्सर में तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
कानूनी प्रक्रिया: विवेचना से लेकर सजा तक
इस मामले की कानूनी यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। पुलिस ने शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (छेड़छाड़) और 504 (शांति भंग) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि, विवेचना के दौरान साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इसमें धारा 452 (तैयारी के साथ घर में घुसना) को भी जोड़ा।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से दलीलें पेश कीं। अभियोजन अधिकारी ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के जरिए यह साबित किया कि आरोपियों का कृत्य महिला की मर्यादा के विरुद्ध था। अंततः न्यायालय ने धारा 354 को धारा 509 में परिवर्तित करते हुए दोनों को सजा सुनाई।
महिला सुरक्षा पर कोर्ट का कड़ा रुख
लक्सर कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर में महिला सुरक्षा और उनकी निजता को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि आईपीसी की धारा 509 के तहत सजा सुनाकर अदालत ने यह संदेश दिया है कि केवल शारीरिक हमला ही अपराध नहीं है, बल्कि किसी महिला की गरिमा को शब्दों, इशारों या उसकी निजता में ताकाझांकी से ठेस पहुँचाना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
पीड़ित परिवार के लिए यह नौ साल का इंतजार अंततः न्याय के रूप में समाप्त हुआ। मुंडाखेड़ा कला के इन दोषियों को मिली सजा उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो महिलाओं को कमजोर समझकर उनकी निजता का उल्लंघन करते हैं। लक्सर न्यायालय का यह निर्णय न केवल पीड़ित पक्ष को राहत प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर न्याय व्यवस्था में आम नागरिक के विश्वास को भी सुदृढ़ करता है।



