
पिथौरागढ़/गंगोलीहाट: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट तहसील से सामने आया है, जहां एक अनियंत्रित स्विफ्ट कार करीब एक किलोमीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण पिथौरागढ़ कार दुर्घटना में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मृतक आपस में परिचित थे और अपने घर की ओर जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस हादसे के बाद पूरे बोयल गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
कैसे हुआ हादसा: बेकाबू होकर खाई में समाई कार
जानकारी के अनुसार, दुर्घटना गंगोलीहाट तहसील मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित न्याय पंचायत पोखरी भेंरग के ग्राम बोयल में हुई। स्विफ्ट कार (संख्या UK-05 TA-5117) में सवार होकर शिवनाथ (65) और चालक भोपाल सिंह (35) स्थानीय चौपाता कस्बे से अपने गांव बोयल की ओर लौट रहे थे।
जैसे ही उनकी कार गांव के समीप पहुँची, अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क से सीधे एक किलोमीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरा। कार गिरने की आवाज और चीख-पुकार सुनकर स्थानीय ग्रामीण मौके पर दौड़े और तत्काल पुलिस को सूचना दी।
रेस्क्यू ऑपरेशन: पुलिस और ग्रामीणों का साहस
सूचना मिलते ही गंगोलीहाट प्रभारी निरीक्षक कैलाश जोशी और एसआई नरेंद्र पाठक के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। घटनास्थल इतना विकट था कि कार के परखच्चे उड़ चुके थे।
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तत्काल रेस्क्यू: ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर बेहद कठिन परिस्थितियों में गहरी खाई से घायलों को निकालने का काम शुरू किया।
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अस्पताल में दम तोड़ा: शिवनाथ (65) को गंभीर अवस्था में 108 एम्बुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गंगोलीहाट भेजा गया। हालांकि, अस्पताल पहुँचते-पहुँचते उन्होंने दम तोड़ दिया।
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मौके पर मौत: कार चला रहे भोपाल सिंह (35) की चोटें इतनी गंभीर थीं कि उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरा है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने दो हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है।
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भोपाल सिंह (35): मृतक चालक भोपाल सिंह का एक छोटा पुत्र है। परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी, उनकी असमय मृत्यु से घर का चिराग बुझ गया है।
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शिवनाथ (65): बुजुर्ग शिवनाथ के परिवार में दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। हालांकि सभी विवाहित हैं, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर पिता का साया उठने से परिवार टूट गया है।
पहाड़ों पर क्यों बढ़ रहे हैं सड़क हादसे?
गंगोलीहाट में हुए इस पिथौरागढ़ कार दुर्घटना ने एक बार फिर पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों और पुलिस के अनुसार, उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार होते हैं:
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मानवीय भूल: तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना और लापरवाही बरतना हादसों का सबसे बड़ा कारण है।
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नशा और थकान: शराब पीकर वाहन चलाना या ड्राइवर को थकान और नींद आने से एकाग्रता भंग हो जाती है।
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भौगोलिक परिस्थितियां: पहाड़ों की खराब सड़कें, तीखे मोड़ और खराब मौसम (कोहरा या पाला) चालक के लिए चुनौती पैदा करते हैं।
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तकनीकी खामियां: वाहन का समय पर मेंटेनेंस न होना और यातायात नियमों का उल्लंघन करना भी घातक साबित होता है।
प्रशासन की अपील और सतर्कता
गंगोलीहाट कोतवाल कैलाश चंद्र जोशी ने घटना की पुष्टि करते हुए स्थानीय लोगों और चालकों से अपील की है कि वे पहाड़ी रास्तों पर विशेष सावधानी बरतें। उन्होंने कहा कि मोड़ पर रफ्तार कम रखें और यातायात के नियमों का सख्ती से पालन करें।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बोयल जैसे ग्रामीण इलाकों में सड़कों के किनारे पैराफिट (सुरक्षा दीवार) का न होना भी हादसों को न्योता देता है। यदि सड़क किनारे सुरक्षा इंतजाम पुख्ता होते, तो शायद यह कार इतनी गहरी खाई में गिरने से बच सकती थी।
पिथौरागढ़ कार दुर्घटना की यह खबर केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की त्रासदी है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। उत्तराखंड में सुरक्षित सफर के लिए प्रशासन को इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और चालकों को अपनी जिम्मेदारी समझने की सख्त जरूरत है। फिलहाल, पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।



