
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रखने और भविष्य के डॉक्टरों को नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से प्रशासन ने नौ छात्रों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार की अभद्रता या मानसिक उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सख्त कार्रवाई: निष्कासन और आर्थिक दंड
दून मेडिकल कॉलेज रैगिंग प्रकरण में एंटी रैगिंग सेल की रिपोर्ट के आधार पर कुल नौ छात्रों को अकादमिक गतिविधियों से 3 महीने के लिए निष्कासित (Suspend) कर दिया गया है। कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:
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दो छात्रों पर सबसे गाज: रैगिंग के मुख्य आरोपी दो छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का भारी आर्थिक दंड लगाया गया है। साथ ही, उन्हें छात्रावास (Hostel) से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया गया है।
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7 अन्य छात्रों पर एक्शन: अन्य सात छात्रों को भी 3 महीने के लिए शैक्षणिक कार्यों से दूर कर दिया गया है। हालांकि इन पर मारपीट के आरोप नहीं थे, लेकिन ये ईव टीजिंग और अन्य छात्रों को मानसिक रूप से परेशान करने की गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: छावनी में तब्दील हॉस्टल परिसर
घटना के बाद परिसर में दहशत का माहौल न बने, इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से चाक-चौबंद किया है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने इस संबंध में सख्त हिदायतें जारी की हैं:
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एंटी रैगिंग सेल की गश्त: सेल को आदेश दिए गए हैं कि वह सुबह और शाम पूरे कैंपस में नियमित राउंड लेगी।
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गार्ड्स की तैनाती: एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के हॉस्टल के बाहर विशेष सुरक्षाकर्मियों की नियमित तैनाती की गई है।
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वार्डन को निर्देश: हॉस्टल के मुख्य वार्डन और अन्य वार्डनों को ‘रिएक्टिव मोड’ में रहने को कहा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत रोका जा सके।
ईव टीजिंग भी अब रैगिंग के दायरे में
कॉलेज के मीडिया इंचार्ज और नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. सुशील ओझा ने इस मामले पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने बताया कि जिन सात छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, वे सीधे तौर पर हिंसा में शामिल नहीं थे, लेकिन वे ईव टीजिंग और कनिष्ठ छात्रों को परेशान करने जैसी गतिविधियों में संलिप्त थे।
“प्रशासन ने यह कार्रवाई करके यह कड़ा संदेश दिया है कि रैगिंग का मतलब सिर्फ शारीरिक मारपीट नहीं है। यदि कोई छात्र किसी अन्य छात्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है या अभद्र टिप्पणी करता है, तो उसे भी गंभीर अपराध माना जाएगा।” — डॉ. सुशील ओझा
क्या है पूरा विवाद: कैसे शुरू हुई घटना?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब 2025 बैच के एक छात्र के साथ उसी के सहपाठी ने मारपीट की। जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मारपीट करने वाला छात्र खुद 2023 और 2024 बैच के दो वरिष्ठ (Senior) छात्रों के दबाव में काम कर रहा था। यानी सीनियर्स ने जूनियर के जरिए ही दूसरे जूनियर का उत्पीड़न करवाया।
जैसे ही यह मामला एंटी रैगिंग कमेटी तक पहुँचा, जांच की आंच सीनियर्स तक पहुँच गई। कॉलेज प्रशासन ने तुरंत अभिभावकों को तलब किया और प्राथमिक जांच के बाद चीफ वार्डन ने दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की संस्तुति की।
भविष्य के लिए कड़ा सबक
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने साफ कहा है कि भविष्य में ऐसी किसी भी चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि मेडिकल जैसे संवेदनशील पेशे में अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। यदि छात्र अभी से कानून और नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो वे भविष्य में जिम्मेदार डॉक्टर नहीं बन पाएंगे।
इस घटना के बाद अब पूरे कॉलेज में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ा दी गई है और जूनियर छात्रों के लिए ‘काउंसलिंग सेशन’ आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है ताकि वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
देहरादून के इस प्रतिष्ठित संस्थान में हुई यह कार्रवाई देश भर के मेडिकल कॉलेजों के लिए एक उदाहरण है। दून मेडिकल कॉलेज रैगिंग प्रकरण में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया है कि संस्थान में ‘बुलीइंग’ के लिए कोई स्थान नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस सख्त रवैये के बाद कैंपस के माहौल में कितना सकारात्मक सुधार आता है।



