
देहरादून। उत्तराखंड और देशभर के खेल प्रेमियों के लिए यह गर्व और खुशी का क्षण है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ मूल के उभरते हुए टेनिस खिलाड़ी रोनित कार्की को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय दूतावास द्वारा सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2025 में विंबलडन बॉयज़ सिंगल्स जूनियर प्रतियोगिता के फाइनल तक शानदार सफर तय करने और अंतरराष्ट्रीय जूनियर टेनिस में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया गया।
भारतीय दूतावास की इस पहल को न सिर्फ भारतीय-अमेरिकी समुदाय, बल्कि उत्तराखंड के लिए भी बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास ने किया सम्मान
न्यूयॉर्क में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भारत के महावाणिज्य दूत बिनय श्रीकांत प्रधान ने रोनित कार्की की ओर से उनके पिता त्रिलोक कार्की को यह सम्मान प्रदान किया। रोनित का परिवार वर्तमान में अमेरिका के न्यू जर्सी में निवास करता है, हालांकि उनकी जड़ें आज भी उत्तराखंड की मिट्टी से गहराई से जुड़ी हैं।
गौरतलब है कि रोनित अमेरिका की ओर से अंतरराष्ट्रीय टेनिस प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, लेकिन उनकी पहचान एक ऐसे खिलाड़ी की है, जिसने भारतीय मूल और संस्कारों को वैश्विक मंच पर गौरव दिलाया है।
दूतावास के प्रशस्ति पत्र में क्या लिखा?
भारतीय दूतावास की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र में रोनित कार्की की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा गया—
“रोनित कार्की को टेनिस में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाता है। खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, दृढ़ता, कौशल और उत्कृष्टता की निरंतर खोज ने उन्हें दुनिया भर के महत्वाकांक्षी एथलीटों के लिए प्रेरणा बनाया है। उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को अत्यंत गौरवान्वित किया है।”
यह प्रशस्ति पत्र स्वयं महावाणिज्य दूत के हस्ताक्षर से जारी किया गया, जिसे खेल जगत में एक बड़ी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
परिवार में खुशी का माहौल
रोनित कार्की के ताऊ भरत कार्की, जो मुंबई में रहते हैं, ने मीडिया से बातचीत में अपने भतीजे की उपलब्धियों पर गर्व जताया। उन्होंने बताया कि इन दिनों रोनित की दादी भी अमेरिका में हैं। खास बात यह है कि रोनित ने अपनी दादी को विशेष रूप से USTA अंडर-18 नेशनल टूर्नामेंट का मैच देखने के लिए अमेरिका बुलाया था।
फाइनल मुकाबला जीतने के बाद रोनित ने अपनी दादी के साथ एक भावुक और यादगार तस्वीर भी खिंचवाई, जो परिवार के लिए जीवनभर की स्मृति बन गई।
विश्व जूनियर टेनिस में मजबूत पहचान
रोनित कार्की ने बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय जूनियर टेनिस में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। जनवरी 2025 में उन्होंने अपने जोड़ीदार जैक सैटरफील्ड के साथ ITF जूनियर J300 बैरेंक्विला डबल्स का खिताब जीता। इसके अलावा जून 2025 में वे रोलां गैरो जूनियर चैंपियनशिप के दूसरे दौर तक पहुंचे। इससे पहले—
- 2023 USTA विंटर नेशनल्स (बॉयज़ 18)
- 2024 ईस्टर बाउल बॉयज़ 18 डबल्स
में गोल्ड बॉल जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
विंबलडन जूनियर में ऐतिहासिक रन
साल 2025 में विंबलडन बॉयज़ सिंगल्स के फाइनल में पहुंचना रोनित कार्की के करियर का अब तक का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। फाइनल में भले ही उन्हें उपविजेता रहना पड़ा, लेकिन इस प्रदर्शन ने उन्हें वैश्विक जूनियर टेनिस मानचित्र पर स्थापित कर दिया।
28 अप्रैल 2025 को उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ ITF जूनियर रैंकिंग 49 हासिल की, जबकि उनकी सर्वश्रेष्ठ जूनियर रैंकिंग विश्व नंबर 18 रही है।
शिक्षा और खेल का संतुलन
रोनित कार्की अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं, जहां वे शिक्षा और खेल दोनों को समान महत्व दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संतुलन उन्हें भविष्य में प्रोफेशनल टेनिस के शीर्ष स्तर तक पहुंचने में मदद कर सकता है।
कौन हैं रोनित कार्की
17 वर्षीय रोनित कार्की मूल रूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के पंगखू क्षेत्र के जाबुका गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता त्रिलोक सिंह कार्की और माता कंचन कार्की दोनों पेशे से इंजीनियर हैं। बेहतर करियर अवसरों के लिए परिवार अमेरिका गया, जहां रोनित का जन्म हुआ और वहीं से उनके टेनिस करियर ने उड़ान भरी।
रोनित की बड़ी बहन नाओमी कार्की भी अमेरिका के लिए जूनियर लॉन टेनिस खेलती हैं, जिससे यह साफ है कि खेल इस परिवार की पहचान बन चुका है।
उत्तराखंड के लिए प्रेरणा
रोनित कार्की की सफलता आज उत्तराखंड के हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है। सीमांत पहाड़ी जिले से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से वैश्विक पहचान हासिल की जा सकती है।
न्यूयॉर्क में भारतीय दूतावास द्वारा रोनित कार्की को दिया गया सम्मान केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड और भारतीय मूल के युवाओं की वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में रोनित से न सिर्फ अमेरिका, बल्कि दुनिया भर के टेनिस प्रशंसकों को बड़ी उम्मीदें हैं।


