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The Hill India > Blog > देश > मदर ऑफ ऑल डील्स: 18 साल का इंतजार खत्म! भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर लगी मुहर
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मदर ऑफ ऑल डील्स: 18 साल का इंतजार खत्म! भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर लगी मुहर

The Hill India News
Last updated: January 27, 2026 3:09 am
The Hill India News
Published: January 27, 2026
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नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति और अर्थशास्त्र के गलियारों से इस दशक की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले 18 वर्षों (2007) से जारी लंबी जद्दोजहद और दर्जनों दौर की वार्ता के बाद आखिरकार भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बन गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस ऐतिहासिक सफलता की पुष्टि करते हुए इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया है। इस समझौते की औपचारिक घोषणा मंगलवार को होने वाली है, जो वैश्विक व्यापार के समीकरणों को पूरी तरह बदल देगी।

Contents
आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में बड़ा कदमयूरोप के लिए क्यों अहम है यह डील?इन उद्योगों की खुलेगी किस्मतसस्ती होंगी लग्जरी कारें: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलावतकनीकी आदान-प्रदान और लघु उद्योग

आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में बड़ा कदम

यह समझौता केवल दो पक्षों के बीच व्यापारिक सुगमता का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत के लिए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर एक लंबी छलांग है। रिसर्च रिपोर्टों के अनुसार, इस एफटीए के चलते वित्त वर्ष 2031 तक यूरोपीय संघ के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) 51 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

वर्तमान में भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी लगभग 17.3 प्रतिशत है, जिसके वित्त वर्ष 2025 के बाद बढ़कर 23 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। यह वृद्धि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित होगी।

यूरोप के लिए क्यों अहम है यह डील?

यूरोपीय संघ के लिए भारत एक ऐसा बाजार है जिसे अब वह नजरअंदाज नहीं कर सकता। वित्त वर्ष 2019 में जहां ईयू का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस था, वहीं 2025 तक यह स्थिति उलट गई और ईयू 15 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में आ गया।

इस समझौते के माध्यम से यूरोप न केवल भारत के विशाल बाजार तक पहुंच चाहता है, बल्कि चीन पर अपनी निर्भरता कम करना और अपनी ‘ग्लोबल सप्लाई चेन’ में विविधता लाना भी उसका मुख्य उद्देश्य है। भारत अब यूरोप के लिए एक विश्वसनीय और स्थिर व्यापारिक साझेदार के रूप में उभरा है।

इन उद्योगों की खुलेगी किस्मत

भारत के कई श्रम-प्रधान (Labor-intensive) क्षेत्रों के लिए यह समझौता नए अवसरों के द्वार खोलेगा। एमके ग्लोबल और जीटीआरआई के विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित उद्योगों को सबसे अधिक लाभ होगा:

  • कपड़ा और फुटवियर: ईयू के बाजारों में शून्य या कम शुल्क के कारण भारतीय टेक्सटाइल की मांग बढ़ेगी।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन: भारत अब यूरोप के लिए स्मार्टफोन निर्यात का बड़ा केंद्र बनेगा।

  • फार्मा और ऑटो पार्ट्स: भारतीय दवाइयों और स्पेयर पार्ट्स को यूरोपीय मानकों के साथ आसान पहुंच मिलेगी।

  • केमिकल और मशीनरी: भारत से निर्यात होने वाले प्रोसेस्ड फ्यूल और हीरों की मांग में जबरदस्त उछाल आएगा।

सस्ती होंगी लग्जरी कारें: ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सबसे रोमांचक खबर लग्जरी कारों से जुड़ी है। एफटीए के तहत भारत यूरोपीय कारों पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क (Import Duty) को तर्कसंगत बनाने पर सहमत हुआ है।

  1. शुल्क में कटौती: वर्तमान में पूरी तरह निर्मित इकाइयों (CBU) पर 70% से 110% तक शुल्क लगता है, जिसे घटाकर शुरुआती चरण में 40 प्रतिशत किया जाएगा।

  2. भविष्य की योजना: आने वाले वर्षों में इसे धीरे-धीरे 10 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है।

  3. आयात की सीमा: समझौते के तहत भारत सालाना 2 लाख यूरोपीय ईंधन वाली गाड़ियां (ICE) आयात करने की अनुमति दे सकता है।

  4. लाभार्थी: मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और वोक्सवैगन जैसी कंपनियों के प्रीमियम मॉडल अब भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होंगे।

तकनीकी आदान-प्रदान और लघु उद्योग

यूरोपीय संघ से भारत को मिलने वाला निर्यात भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ईयू भारत को हाई-एंड मशीनरी, विमान के पुर्जे, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और मेटल स्क्रैप की आपूर्ति करेगा। ये उत्पाद भारतीय एमएसएमई (MSME) सेक्टर की उत्पादकता बढ़ाएंगे और वैश्विक बाजार में हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेंगे।

विशेषज्ञ की राय: “यह समझौता भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन के केंद्र में स्थापित करेगा। जहां ईयू को एक बड़ा उपभोक्ता बाजार मिलेगा, वहीं भारत को उच्च तकनीक और भारी निवेश प्राप्त होगा।” — अजय श्रीवास्तव, संस्थापक, जीटीआरआई

18 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद, भारत-ईयू एफटीए वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितता के दौर में स्थिरता का एक नया अध्याय लिखेगा। यह न केवल द्विपक्षीय व्यापार को 136 अरब डॉलर के वर्तमान स्तर से कहीं आगे ले जाएगा, बल्कि लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। मंगलवार को होने वाली औपचारिक घोषणा पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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