
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से रैगिंग का एक बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है। वर्ष 2025 बैच के एक जूनियर छात्र के साथ हुई कथित बदसलूकी और रैगिंग की घटना ने न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि शासन को भी हिलाकर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने तत्काल संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति: “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस घटना को ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन को मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि शिक्षण संस्थानों में अनुशासनहीनता और रैगिंग जैसी घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कॉलेज प्रशासन को निर्देशित किया है कि जरूरत पड़ने पर अन्य छात्रों और संबंधित व्यक्तियों से भी गहन पूछताछ की जाए, ताकि घटना के पीछे के सभी तथ्यों को उजागर किया जा सके। डॉ. रावत ने कहा, “ऐसी घटनाएं संस्थान के अनुशासन और शैक्षणिक परिवेश पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। दोषियों के खिलाफ ऐसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए एक उदाहरण बने।”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कॉलेज प्रशासन को माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के रैगिंग विरोधी दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैंपस के भीतर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चीफ वार्डन का बड़ा एक्शन: दो छात्र निष्कासित
मंत्री के कड़े रुख के बीच, कॉलेज प्रबंधन ने भी त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के पुरुष छात्रावास के चीफ वार्डन ने प्राथमिक साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर 2023 और 2024 बैच के दो सीनियर छात्रों को छात्रावास से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है।
आरोप है कि इन दोनों छात्रों ने जूनियर छात्र के साथ अमर्यादित व्यवहार और रैगिंग की थी। फिलहाल, जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें हॉस्टल से बाहर रहने के आदेश दिए गए हैं।
एंटी रैगिंग कमेटी ने शुरू की जांच
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, विभागीय मंत्री के निर्देशों के तहत एंटी रैगिंग कमेटी (Anti-Ragging Committee) का गठन कर दिया गया है।
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बयान दर्ज: कमेटी ने पीड़ित छात्र की शिकायत को आधार बनाते हुए आरोपी छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं।
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साक्ष्य संकलन: हॉस्टल के अन्य छात्रों से भी बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है ताकि दबाव मुक्त माहौल में सच सामने आ सके।
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रिपोर्ट: कॉलेज प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट बहुत जल्द तैयार कर ली जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
शिक्षण संस्थानों में बढ़ती चिंता
दून मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में हुई इस घटना ने प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि केवल निष्कासन काफी नहीं है, बल्कि छात्रों के बीच निरंतर काउंसलिंग और ‘मेंटर-मेंटी’ प्रोग्राम को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि ऐसी हिंसक और अपमानजनक प्रवृत्तियों को रोका जा सके।
पारदर्शिता और न्याय की उम्मीद
फिलहाल, स्वास्थ्य मंत्री की सक्रियता और वार्डन द्वारा की गई कार्रवाई से पीड़ित छात्र और उसके परिजनों ने न्याय की उम्मीद जताई है। अब सभी की नजरें एंटी रैगिंग कमेटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या आरोपी छात्रों पर कानूनी कार्रवाई (FIR) भी की जाएगी।



