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अगस्त्यमुनि गेट मामला: देवरा यात्रा के दौरान उपजा गतिरोध, डीएम से मिला मंदिर समिति का शिष्टमंडल

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि क्षेत्र में बीते दिनों ‘मुनि महाराज’ की ऐतिहासिक देवरा यात्रा के दौरान हुए घटनाक्रम ने अब कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद निकली इस पावन यात्रा में उपजे विवाद के बाद पुलिस ने जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों पर 52 लोगों के विरुद्ध नामजद व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इस बीच, शुक्रवार को अगस्त्य ऋषि मंदिर समिति के पदाधिकारियों और क्षेत्रीय ग्रामीणों के बीच जिलाधिकारी से मिलने की होड़ मची रही, जिससे दिनभर प्रशासनिक गलियारों में गहमागहमी का माहौल रहा।

क्या है पूरा मामला?

विदित हो कि केदारघाटी के 364 गांवों के आराध्य देव, भगवान अगस्त्य मुनि की ‘देवरा यात्रा’ वर्तमान में क्षेत्र के भ्रमण पर है। बीते बृहस्पतिवार को जब डोली यात्रा अपने निर्धारित मार्ग से गुजर रही थी, तब कथित तौर पर ‘गोल गेट’ तोड़ने और मार्ग परिवर्तन को लेकर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डोली के गद्दीस्थल प्रस्थान के समय हुए हंगामे के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई। प्रशासन ने इसे सरकारी कार्य में बाधा और शांति भंग करने की श्रेणी में मानते हुए तत्काल सख्त रुख अपनाया।

52 लोगों पर एफआईआर और पुलिसिया कार्रवाई

जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद, रुद्रप्रयाग पुलिस ने देर शाम कार्रवाई करते हुए 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार, वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। शुक्रवार सुबह से ही पुलिस की टीमें क्षेत्र में सक्रिय दिखीं और विधिक कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। इस कार्रवाई के बाद से ही स्थानीय लोगों और मंदिर समिति में हलचल तेज हो गई है।

प्रशासनिक बैठकों का दौर: होटल बनाम कलेक्ट्रेट

शुक्रवार को इस मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अगस्त्य ऋषि मंदिर समिति और सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुट जिलाधिकारी से मिलने पहुंचा, लेकिन दोनों की मुलाकात अलग-अलग स्थानों पर हुई।

  • मंदिर समिति की वार्ता: अगस्त्य ऋषि मंदिर समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में 11 सदस्यीय शिष्टमंडल जिलाधिकारी से मिलने रुद्रप्रयाग मुख्यालय पहुंचा। हालांकि, यह मुलाकात कलेक्ट्रेट के बजाय मुख्यालय के गुलाबराय स्थित एक निजी होटल में हुई। यहाँ पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी के सम्मुख अपना पक्ष रखते हुए घटनाक्रम की वस्तुस्थिति स्पष्ट की। जिलाधिकारी ने समिति की बातों को सुना और स्पष्ट किया कि आस्था का सम्मान सर्वोपरि है, किंतु कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • ग्रामीणों की मायूसी: दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान के नेतृत्व में पंचकोटी गांव के करीब 30 ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। इन लोगों का आरोप है कि वे करीब एक घंटे तक जिलाधिकारी का इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। बताया गया कि जिलाधिकारी उस समय क्षेत्र निरीक्षण और भ्रमण पर निकल गए थे, जिसके कारण ग्रामीणों को बिना वार्ता किए ही वापस लौटना पड़ा।

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब जनता कलेक्ट्रेट में अपनी समस्या लेकर खड़ी थी, तब जिलाधिकारी का होटल में वार्ता करना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि पंचकोटी गांव के लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

आस्था का सैलाब: मंदिर से आगे बढ़ी डोली

तनावपूर्ण स्थितियों के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। बृहस्पतिवार शाम करीब छह बजे मुनि महाराज की डोली ने खेल मैदान स्थित गद्दीस्थल में भोग ग्रहण करने के बाद अगस्त्य मंदिर के लिए प्रस्थान किया।

शुक्रवार सुबह डोली ने मंदिर परिसर से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद अगले पड़ाव के लिए प्रस्थान किया। वर्तमान में डोली नाकोट और बसंत विहार क्षेत्र का भ्रमण कर रही है। डोली के साथ भारी संख्या में श्रद्धालु चल रहे हैं, जो जयकारों के साथ अपने आराध्य का स्वागत कर रहे हैं। भक्तों का मानना है कि 15 साल बाद आई यह यात्रा क्षेत्र की खुशहाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक रुख

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगस्त्यमुनि देवरा यात्रा की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। पुलिस बल को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यात्रा के आगामी पड़ावों में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। वहीं, 52 लोगों पर हुए मुकदमे के बाद स्थानीय राजनीति भी गरमाने लगी है। अब देखना यह होगा कि मंदिर समिति और प्रशासन के बीच यह गतिरोध कब तक समाप्त होता है।

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