
मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र की राजनीति में लगभग नौ साल के लंबे अंतराल के बाद हुए 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने राज्य की सियासी तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। इन चुनावों में जहाँ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने अपनी बादशाहत कायम रखी है, वहीं सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम (AIMIM) का रहा है। 94 सीटों पर बढ़त और जीत के साथ ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
संभाजीनगर में ओवैसी का जादू: दूसरे स्थान पर कब्जा
एआईएमआईएम के लिए सबसे सुखद संदेश छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व औरंगाबाद) से आया है। यहाँ पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 33 सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसके साथ ही वह इस नगर निगम में दूसरे स्थान पर पहुँच गई है। गौरतलब है कि औरंगाबाद हमेशा से ओवैसी की पार्टी का मजबूत गढ़ रहा है और यहाँ से पार्टी का सांसद भी रह चुका है। इस जीत ने साबित कर दिया है कि नाम बदलने और लंबी प्रतीक्षा के बावजूद यहाँ का मुस्लिम और दलित मतदाता अब भी ओवैसी की राजनीति पर भरोसा कर रहा है।
नए क्षेत्रों में विस्तार: चंद्रपुर और अहिल्यानगर में खुला खाता
इस बार के चुनाव रुझान बताते हैं कि AIMIM केवल पुराने गढ़ों तक सीमित नहीं रही। पार्टी ने विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र के नए इलाकों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
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चंद्रपुर: यहाँ पार्टी ने पहली बार अपना प्रतिनिधि चुनकर इतिहास रचा है।
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अहिल्यानगर (अहमदनगर): यहाँ भी पार्टी ने 3 सीटों पर जीत हासिल कर अपनी ताकत का अहसास कराया है।
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बीएमसी (BMC): मुंबई नगर निगम में भी पार्टी ने 2 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
क्षेत्रवार प्रदर्शन की सांख्यिकी
राज्य निर्वाचन आयोग के शाम 7:30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, AIMIM का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
| नगर निगम | सीटों की संख्या |
| संभाजीनगर | 33 |
| अमरावती | 15 |
| नांदेड़ | 14 |
| धुले | 10 |
| अहिल्यानगर | 03 |
| जालना | 02 |
| मुंबई (BMC) | 02 |
| कुल (रुझान सहित) | 94 |
महायुति की प्रचंड लहर: विपक्ष पस्त
भले ही AIMIM ने सुर्खियाँ बटोरी हों, लेकिन सीटों के मामले में भाजपा-शिवसेना (शिंदे)-एनसीपी (अजीत पवार) गठबंधन यानी महायुति ने क्लीन स्वीप किया है। शुरुआती रुझानों में महायुति 1200 से अधिक सीटों पर आगे दिखी। मुंबई, ठाणे, पुणे और नागपुर जैसे बड़े केंद्रों पर भाजपा का शहरी वोट बैंक जस का तस बना हुआ है।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के गठबंधन को करारा झटका लगा है। दोनों भाई मिलकर भी 120 सीटों का आंकड़ा पार करने के लिए संघर्ष करते दिखे। यह संकेत है कि मतदाताओं ने एकनाथ शिंदे की ‘विकासवादी’ राजनीति और केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं पर मुहर लगाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय: कांग्रेस-शरद पवार के लिए खतरे की घंटी
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि AIMIM का 94 सीटों तक पहुँचना सीधे तौर पर कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के लिए बड़ी चुनौती है। AIMIM ने उन मुस्लिम-बहुल और दलित-बहुल इलाकों में सेंध लगाई है जो परंपरागत रूप से ‘महाविकास अघाड़ी’ के वोट बैंक माने जाते थे। विश्लेषकों के अनुसार, “ओवैसी की पार्टी अब केवल ‘वोट कटुआ’ नहीं रही, बल्कि वह शहरी निकायों में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में आ गई है। यह आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।”
3.48 करोड़ मतदाताओं का फैसला
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन चुनावों में 15,931 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 3.48 करोड़ मतदाताओं ने किया। नौ साल बाद चुनाव होने के कारण जनता में भारी उत्साह देखा गया और स्थानीय मुद्दों जैसे सड़क, पानी, और बुनियादी ढांचे पर मतदान हुआ।
महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026 ने तीन स्पष्ट संदेश दिए हैं: पहला, शहरी महाराष्ट्र में महायुति का विकल्प फिलहाल नजर नहीं आता। दूसरा, उद्धव ठाकरे की पकड़ अपने ही गढ़ों में ढीली पड़ रही है। और तीसरा, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM अब राज्य की राजनीति में एक अनिवार्य ‘तीसरी शक्ति’ के रूप में उभर चुकी है। आने वाले महीनों में यह त्रिकोणीय मुकाबला राज्य की सत्ता राजनीति को एक नई और अधिक प्रतिस्पर्धी दिशा दे सकता है।



