
नैनीताल/काशीपुर: उत्तराखंड के बहुचर्चित सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में शुक्रवार, 16 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने मामले में नामजद 26 आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार और मामले के शिकायतकर्ता (मृतक के भाई) को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की सुनवाई: सरकार और याचिकाकर्ताओं का पक्ष
शुक्रवार को न्यायमूर्ति की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं (नामजद आरोपियों) के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में जानबूझकर और गलत तरीके से फंसाया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि यह मूल रूप से दो पक्षों के बीच जमीन से जुड़ा एक दीवानी विवाद है और किसान की आत्महत्या में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं है। उन्होंने कोर्ट से मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई।
दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए डीजीपी (DGP) खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सरकार ने बताया कि मामले की जांच एसआईटी (SIT) को सौंप दी गई है, हालांकि अभी जांच विधिवत रूप से शुरू नहीं हुई है।
न्यायालय का निर्देश: जांच में सहयोग करें आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर तो रोक लगा दी है, लेकिन उनके सामने एक शर्त भी रखी है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सभी याचिकाकर्ताओं को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करना होगा। यदि कोई भी आरोपी जांच में बाधा डालता है या सहयोग नहीं करता है, तो राहत वापस ली जा सकती है। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला? (फेसबुक लाइव और सनसनीखेज आरोप)
यह मामला शनिवार की उस रात से शुरू हुआ जब काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने नैनीताल के काठगोदाम स्थित एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक पर लाइव आकर एक वीडियो साझा किया था, जिसने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
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धोखाधड़ी का आरोप: सुखवंत सिंह ने वीडियो में रोते हुए बताया था कि उनके साथ जमीन के सौदे में करीब 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
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पुलिस पर गंभीर सवाल: किसान का आरोप था कि जब वह न्याय की गुहार लेकर पुलिस के पास गए, तो अधिकारियों ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें ही डराया और धमकाया।
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नामजद मुकदमा: सुखवंत की मौत के बाद उनके भाई परमिंदर की तहरीर पर काशीपुर के आईटीआई (ITI) थाने में 26 लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC 306) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
नामजद आरोपियों की लंबी सूची
पुलिस ने इस मामले में अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविन्दर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेन्द्र सिंह, विमल और उसकी पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवन्त सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा और जहीर को आरोपी बनाया है। इनमें से कई लोगों ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सियासी और प्रशासनिक हलचल
उत्तराखंड के किसान की इस तरह आत्महत्या और पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगे आरोपों के बाद शासन-प्रशासन पर भारी दबाव है। मुख्यमंत्री कार्यालय भी इस केस पर नजर बनाए हुए है। एसआईटी का गठन इस बात का संकेत है कि सरकार इस मामले की तह तक जाना चाहती है, विशेषकर उन आरोपों की जांच करना जरूरी है जिनमें पुलिसकर्मियों की मिलीभगत की बात कही गई है।
केस के मुख्य बिंदु: एक नजर में
| विवरण | तथ्य |
| मृतक का नाम | सुखवंत सिंह (किसान, काशीपुर) |
| घटना स्थल | होटल, काठगोदाम (नैनीताल) |
| आरोपों का आधार | फेसबुक लाइव वीडियो और सुसाइड नोट |
| हाईकोर्ट का आदेश | गिरफ्तारी पर रोक, तीन सप्ताह में जवाब तलब |
| अगली सुनवाई | 15 अप्रैल 2026 |
| जांच एजेंसी | एसआईटी (SIT) |
हाईकोर्ट का फैसला आरोपियों के लिए फौरी राहत जरूर है, लेकिन कानूनी तलवार अभी भी लटकी हुई है। किसान सुखवंत सिंह का वह वीडियो जिसमें उन्होंने पुलिस और भू-माफियाओं के गठजोड़ का दावा किया था, इस केस की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अब सबकी नजरें एसआईटी की जांच और तीन सप्ताह बाद कोर्ट में दाखिल होने वाली सरकार की आपत्ति पर टिकी हैं।



