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उत्तराखंड: कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति के ‘विवादित बयान’ पर बढ़ा सियासी पारा, केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने झाड़ा पल्ला

अल्मोड़ा/देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो बयान को लेकर भूचाल आया हुआ है। सूबे की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के एक कथित आपत्तिजनक बयान ने न केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है, बल्कि विपक्षी कांग्रेस और सामाजिक संगठनों को सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। इस विवाद के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इस बयान को ‘देवभूमि’ की संस्कृति के खिलाफ बताया है।

क्या है पूरा विवाद? (विवादित बयान का सच)

मामला बीते 23 दिसंबर का है, जब अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के दौलाधात में एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान गिरधारी लाल साहू ने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला बयान दिया। वायरल वीडियो के अनुसार, साहू ने कहा था कि “शादी के लिए बिहार से 20 से 25 हजार रुपए में लड़कियां मिल जाती हैं…” जैसे ही यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उत्तराखंड से लेकर बिहार तक आक्रोश की लहर दौड़ गई। महिला संगठनों ने इसे ‘मानव तस्करी’ और ‘नारी शक्ति के अपमान’ से जोड़ते हुए गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी है।

अजय टम्टा का कड़ा प्रहार: “साहू का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं”

अल्मोड़ा पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि भाजपा इस तरह की ओछी मानसिकता का समर्थन नहीं करती। टम्टा ने कहा, “मैंने वीडियो देखा है और गिरधारी लाल साहू द्वारा कही गई बातें अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं। देवभूमि उत्तराखंड के संस्कार महिलाओं को पूजने के हैं, अपमान करने के नहीं।”

उन्होंने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि, “गिरधारी लाल साहू न तो भाजपा के सदस्य हैं और न ही मूल रूप से इस प्रदेश के निवासी हैं। किसी बाहरी व्यक्ति की सोच को उत्तराखंड की छवि से जोड़ना गलत है। जो व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बोलता है और ऐसे बयान केवल समाज को बदनाम करने का काम करते हैं।”

बिहार में कानूनी कार्रवाई की बढ़ी तपिश

गिरधारी लाल साहू की मुश्किलें केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं हैं। बिहार की बेटियों पर की गई इस टिप्पणी का असर अब कानूनी रूप ले चुका है। बिहार के मुजफ्फरपुर कोर्ट में साहू के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। एडीजे प्रथम की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरधारी लाल साहू को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। बिहार के विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह बयान पूरे राज्य के सम्मान पर चोट है।

विपक्ष हमलावर: कांग्रेस ने घेरा सरकार को

उत्तराखंड कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ कैबिनेट मंत्री के पति महिलाओं की ‘बोली’ लगाने जैसी बातें कर रहे हैं। अल्मोड़ा, हल्द्वानी और देहरादून में जगह-जगह पुतला दहन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं की मांग है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस मामले में कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

देवभूमि की छवि पर संकट?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान पर्यटन और संस्कृति के केंद्र उत्तराखंड की वैश्विक छवि को प्रभावित करते हैं। उत्तराखंड अपनी शालीनता और अतिथि सत्कार के लिए जाना जाता है। अजय टम्टा ने भी जनता से अपील की है कि वे एक व्यक्ति विशेष के निजी विचारों को राज्य की सामूहिक सोच न समझें।

फिलहाल, गिरधारी लाल साहू के इस बयान ने उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण तेज कर दिया है। जहाँ भाजपा इसे व्यक्तिगत बयान बताकर पल्ला झाड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे सीधे मंत्री रेखा आर्या और सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ रहा है। अब सबकी निगाहें मुजफ्फरपुर कोर्ट की कार्यवाही और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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