
हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में कानून व्यवस्था और विशेषकर महिला सुरक्षा को लेकर एसएसपी मंजूनाथ टीसी (SSP Manjunath TC) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। लालकुआं कोतवाली में तैनात एक महिला उपनिरीक्षक (SI) द्वारा दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले की जांच में लापरवाही बरतने और आरोपी को अनुचित लाभ पहुँचाने के प्रयास पर गाज गिरी है। एसएसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला दारोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
मामले का विवरण देते हुए पुलिस सूत्रों ने बताया कि लालकुआं कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत अक्टूबर 2025 में एक युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किए जाने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया था। इस संवेदनशील मामले की विवेचना की जिम्मेदारी महिला उपनिरीक्षक अंजू नेगी को सौंपी गई थी।
उम्मीद की जा रही थी कि एक महिला अधिकारी होने के नाते वह पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में संवेदनशीलता और निष्पक्षता से कार्य करेंगी। हालांकि, जांच की प्रगति के साथ ही उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
आरोपी को फायदा पहुँचाने का गंभीर आरोप
विवेचना के दौरान उच्चाधिकारियों को गोपनीय सूचनाएं और शिकायतें प्राप्त हुईं कि महिला दारोगा अंजू नेगी मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय प्रतिवादी (आरोपी) के प्रति नरम रुख अपना रही हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि विवेचना अधिकारी ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने में जानबूझकर ढिलाई बरती।
आरोप है कि साक्ष्यों के संकलन और गवाहों के बयानों में ऐसी खामियां छोड़ी गईं, जिससे आरोपी को कानूनी लाभ मिल सके। पीड़िता ने भी विवेचना की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया था, जिसके बाद एसएसपी ने इस मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए थे।
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर गिरी गाज
एसएसपी मंजूनाथ टीसी द्वारा कराई गई प्राथमिक जांच में महिला दारोगा पर लगे आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि एसआई अंजू नेगी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए विवेचना को प्रभावित करने की कोशिश की। कर्तव्य के प्रति इस घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता को देखते हुए एसएसपी ने सख्त कदम उठाया।
एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, हल्द्वानी महिला दारोगा सस्पेंड (Haldwani Female SI Suspended) की यह कार्रवाई पुलिस बल के मनोबल को बनाए रखने और जनता में पुलिस की छवि को साफ-सुथरा रखने के उद्देश्य से की गई है।
एसएसपी मंजूनाथ टीसी का सख्त संदेश
इस कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनपद में महिला सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा:
“नैनीताल पुलिस महिला अपराधों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है। महिला सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में लापरवाही, पक्षपात या किसी भी प्रकार की अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी विवेचना में जानबूझकर ढिलाई बरतता है या अपराधी को लाभ पहुंचाने की कोशिश करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
इस निलंबन की खबर के बाद नैनीताल जिले के अन्य थानों और चौकियों में भी हड़कंप की स्थिति है। लालकुआं कोतवाली, जो कि जिले के महत्वपूर्ण थानों में से एक है, वहां तैनात अधिकारी अब अपनी लंबित विवेचनाओं को लेकर सतर्क हो गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए।
विवेचना की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर महिला अपराधों में विवेचना अधिकारी की छोटी सी लापरवाही भी पूरे केस को कमजोर कर देती है। इस मामले में समय रहते एसएसपी के हस्तक्षेप ने एक गलत मिसाल बनने से रोक लिया है। अब इस दुष्कर्म मामले की विवेचना किसी अन्य सक्षम अधिकारी को सौंपी जाएगी ताकि पीड़िता को समयबद्ध न्याय मिल सके।
हल्द्वानी में हुई यह कार्रवाई राज्य के अन्य पुलिस कर्मियों के लिए भी एक सबक है। महिला अपराध में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को यह संदेश मिल गया है कि उनकी हर गतिविधि पर उच्चाधिकारियों की पैनी नजर है। एसएसपी की इस सक्रियता की सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी सराहना की है, क्योंकि इससे सिस्टम में आम आदमी का विश्वास बहाल होता है।



