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उत्तराखंड में हाड़ कंपाने वाली ठंड: झीलों पर जमी ‘सफेद परत’, खेतों में गिरा पाला और मैदानी इलाकों में कोहरे का सितम

देहरादून/मसूरी। देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों कुदरत के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहाँ पहाड़ों की रानी मसूरी में दिन की गुनगुनी धूप पर्यटकों को लुभा रही है, वहीं दूसरी ओर रात का पारा गिरने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य के मैदानी इलाकों में घना कोहरा और पर्वतीय क्षेत्रों में गिरता ‘पाला’ (Frost) अब जानलेवा साबित होने लगा है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मसूरी: झील पर जमी बर्फ, बोटिंग से पहले तोड़नी पड़ रही परत

पहाड़ों की रानी मसूरी में इन दिनों कड़ाके की ठंड ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि दिन के समय आसमान साफ रहने से धूप खिली रहती है, लेकिन सूरज ढलते ही तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। बारिश न होने के कारण सूखी ठंड का प्रकोप बढ़ गया है।

मसूरी के प्रसिद्ध कंपनी गार्डन स्थित झील का नजारा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। रात के समय पारा शून्य के करीब पहुँचने से झील के पानी के ऊपर बर्फनुमा पाले की एक मोटी परत जमने लगी है। हालात यह हैं कि सुबह जब पर्यटक बोटिंग के लिए पहुँचते हैं, तो संचालकों को पहले लाठियों से बर्फ की इस परत को तोड़ना पड़ता है, उसके बाद ही नौकायन संभव हो पा रहा है।

सड़कों पर पाला बना ‘साइलेंट किलर’

मसूरी और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों पर जम रहा पाला अब हादसों का सबब बन रहा है। पाले के कारण सड़कों पर जबरदस्त फिसलन हो गई है, जिससे दोपहिया और चौपहिया वाहनों के अनियंत्रित होने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में पाले के कारण कई राहगीर फिसलकर चोटिल हो चुके हैं।

प्रशासन ने पर्यटकों के लिए एडवायजरी जारी की है कि वे सुबह और देर रात के समय वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें और गति सीमा का ध्यान रखें।

कृषि और सेहत पर दोहरी मार

लंबे समय से बारिश न होना (Dry Spell) उत्तराखंड की खेती और लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पाले की मार से नकदी फसलों और बागवानी को भारी नुकसान हो सकता है। नमी की कमी के चलते पौधों के झुलसने की आशंका बढ़ गई है, जिससे काश्तकार परेशान हैं।

दूसरी ओर, उप जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. खजान ने बताया कि तापमान में अचानक आने वाले इस उतार-चढ़ाव से वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम और सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम बाहर न निकलने और पर्याप्त गरम कपड़े पहनने की सलाह दी है।

मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’ और पूर्वानुमान

देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 24 से 48 घंटों के लिए प्रदेश में मौसम शुष्क रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, मैदानी जिलों के लिए चेतावनी भी जारी की गई है।

  • कोहरे की मार: हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, चंपावत, पौड़ी और देहरादून के मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा छाए रहने की प्रबल संभावना है।

  • पाला (Frost) की चेतावनी: पर्वतीय क्षेत्रों में रात के समय भारी पाला गिरने का अंदेशा है।

  • येलो अलर्ट: मौसम की इन कठिन परिस्थितियों को देखते हुए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका अर्थ है कि प्रशासन और जनता को सचेत रहने की आवश्यकता है।

प्रशासन की तैयारी: अलाव और कंबल वितरण

बढ़ती ठंड को देखते हुए मसूरी नगर पालिका प्रशासन हरकत में आ गया है। नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने बताया कि नगर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त:

  1. जिन सड़कों पर अधिक पाला गिर रहा है, वहाँ फिसलन कम करने के लिए चूना डाला जा रहा है।

  2. गरीबों और मजदूरों के लिए रैन बसेरों को दुरुस्त किया गया है।

  3. जल्द ही पात्र लोगों को निशुल्क कंबलों का वितरण किया जाएगा।

पर्यटकों के लिए सलाह

यदि आप आने वाले दिनों में मसूरी या किसी अन्य हिल स्टेशन की योजना बना रहे हैं, तो ध्यान रखें कि दिन और रात के तापमान में जमीन-आसमान का अंतर है। अपने साथ हैवी वूलन कपड़े, ग्लव्स और थर्मल वियर जरूर रखें। सड़कों पर वाहन चलाते समय पाले वाली जगहों पर अचानक ब्रेक लगाने से बचें।

उत्तराखंड में मौसम का यह मिजाज अभी कुछ दिनों तक जारी रहने वाला है। बारिश और बर्फबारी के इंतजार के बीच सूखी ठंड ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। जहाँ पर्यटक इस मौसम का लुत्फ उठा रहे हैं, वहीं स्थानीय निवासी और काश्तकार अब आसमान की ओर देख रहे हैं कि कब इंद्रदेव मेहरबान हों और इस पाले से निजात मिले।

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