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आंध्र प्रदेश: कोणसीमा में ONGC के कुएं में भीषण गैस रिसाव के बाद लगी आग, खाली कराए गए कई गांव; हाई अलर्ट पर प्रशासन

The Hill India News
Last updated: January 5, 2026 1:12 pm
The Hill India News
Published: January 5, 2026
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अमरावती/कोनसीमा: आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोणसीमा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ तातीपाका (Tatipaka) स्थित ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के एक तेल कुएं में अचानक हुए गैस रिसाव (Gas Leak) ने भीषण आग का रूप ले लिया। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि वे कई किलोमीटर दूर से आसमान में साफ देखी जा सकती थीं। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर नजदीकी गांवों को तुरंत खाली करने के आदेश दिए हैं।

Contents
कैसे शुरू हुआ हादसा? (The Incident Details)प्रशासन का एक्शन: रेस्क्यू और सुरक्षा उपायऊर्जा का केंद्र: बंगाल की खाड़ी से मल्लावरम तक का जालकितना हुआ नुकसान?पर्यावरण और स्वास्थ्य पर चिंता

कैसे शुरू हुआ हादसा? (The Incident Details)

जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब ओएनजीसी के एक अस्थाई रूप से बंद पड़े तेल कुएं में मरम्मत का कार्य चल रहा था। कुएं के रखरखाव के लिए वर्कओवर रिग (Workover Rig) का इस्तेमाल किया जा रहा था, तभी अचानक तकनीकी खराबी के कारण कुएं के भीतर दबाव (Pressure) बढ़ गया।

दबाव बढ़ने से भारी मात्रा में गैस का रिसाव शुरू हुआ और देखते ही देखते गैस ने आग पकड़ ली। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग की गर्जना इतनी तेज थी कि लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।

प्रशासन का एक्शन: रेस्क्यू और सुरक्षा उपाय

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और ONGC की आपदा प्रबंधन टीम सक्रिय हो गई।

  1. गांवों को खाली कराया गया: गैस की तेज गंध और आग के फैलने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नजदीकी गांवों के सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है।

  2. पावर कट: एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है, ताकि शॉर्ट सर्किट या गैस के संपर्क में आने से कोई अन्य बड़ा धमाका न हो।

  3. फायर फाइटिंग ऑपरेशन: ONGC की अपनी अत्याधुनिक फायर फाइटिंग यूनिट्स के साथ-साथ स्थानीय दमकल की कई गाड़ियां मौके पर आग बुझाने और तापमान को कम करने का प्रयास कर रही हैं।

स्थानीय जिला प्रशासन ने मीडिया को बताया, “हमारा प्राथमिक लक्ष्य जनहानि को रोकना और रिसाव के स्रोत को पूरी तरह बंद करना है। स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन विशेषज्ञों की टीम लगातार काम कर रही है।”

ऊर्जा का केंद्र: बंगाल की खाड़ी से मल्लावरम तक का जाल

यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) की लहरों के नीचे हाइड्रोकार्बन का विशाल भंडार है, जिसे निकालने के लिए ONGC के ऑफशोर रिग दिन-रात सक्रिय रहते हैं।

यहाँ से निकलने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को सब-सी पाइपलाइन (Sub-sea Pipeline) के नेटवर्क के माध्यम से किनारे तक लाया जाता है। समुद्र से निकले इस कच्चे माल को रिफाइन और प्रोसेस करने के लिए यानम (पुडुचेरी) और मल्लावरम के विशाल प्रोसेसिंग प्लांट्स में भेजा जाता है। तातीपाका स्थित यह केंद्र न केवल गैस प्रोसेसिंग करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की बिजली और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कितना हुआ नुकसान?

राहत की बात यह है कि शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली है। हालांकि, कुएं पर तैनात भारी मशीनरी और वर्कओवर रिग के आग में झुलसने से ONGC को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। गैस रिसाव को रोकने के लिए ‘ब्लोआउट प्रिवेंटर’ (BOP) के विफल होने के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जा सकता है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि गैस रिसाव के कारण हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे फिलहाल प्रभावित क्षेत्र की ओर न जाएं और मास्क का प्रयोग करें।

कोनसीमा की यह घटना एक बार फिर तेल और गैस उत्खनन (Exploration) में मौजूद जोखिमों की याद दिलाती है। फिलहाल, पूरी मशीनरी आग पर काबू पाने और रिसाव को प्लग करने में जुटी है। आने वाले कुछ घंटे इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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