नई दिल्ली/इस्लामाबाद: आतंकवाद और कूटनीति के मोर्चे पर भारत ने पाकिस्तान को एक ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से उसे अपना अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए आतंकी ढांचों को तबाह करने के बाद, भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित किए जाने से पाकिस्तान में हाहाकार मचा है। अब पाकिस्तान के सिंधु जल कमिश्नर सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने भारत के इस कदम को ‘अवैध’ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून की दुहाई दी है, लेकिन भारत अपनी नीति पर अडिग है।
पाकिस्तान का विलाप: “स्थगन का कोई कानूनी आधार नहीं”
रविवार, 4 जनवरी को पाकिस्तान के सिंधु जल कमिश्नर सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने एक बयान जारी कर भारत के दावों को चुनौती दी। शाह ने कहा:
“सिंधु जल संधि को ‘स्थगित’ रखने के भारत के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह संधि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह से लागू है और इसे एकतरफा निलंबित करना नैतिक मानकों के खिलाफ है।”
पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को “युद्ध की कार्रवाई” (Act of War) तक करार दे दिया है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह बौखलाहट उसकी उस लाचारी से उपजी है, जिसमें उसकी कृषि और अर्थव्यवस्था भारत से आने वाले पानी पर टिकी है।
अप्रैल 2025: जब भारत ने बदली अपनी जल-नीति
भारत और पाकिस्तान के बीच जल संबंधों में निर्णायक मोड़ अप्रैल 2025 में आया। कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” भारत ने आतंकवाद को पाकिस्तान की राजकीय नीति का हिस्सा मानते हुए साफ़ कर दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकी गतिविधियां बंद नहीं होतीं, तब तक पाकिस्तान को ‘सद्भावना संधियों’ का लाभ नहीं मिलेगा।
दुलहस्ती प्रोजेक्ट और पाकिस्तान की चिंता
पाकिस्तान की ताजा बौखलाहट का एक बड़ा कारण कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो (Dulhasti Stage-II) जलविद्युत परियोजना है। भारत ने हाल ही में इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई है, जिसे पाकिस्तान अपनी जल सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख रहा है।
शाह ने भारत पर जल-प्रवाह के साथ ‘छेड़छाड़’ करने का आरोप लगाते हुए कहा:
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प्राकृतिक प्रवाह में बाधा: अब तक चिनाब, झेलम और सिंधु में पानी प्राकृतिक रूप से मिल रहा था।
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तीन संदिग्ध एपिसोड: पाकिस्तान का दावा है कि 24 अप्रैल 2025 के बाद भारत ने तीन बार (दो बार मई में और एक बार दिसंबर में) पानी का प्रवाह अचानक बढ़ाया और फिर कुछ दिनों के लिए कम कर दिया।
क्या है सिंधु जल संधि (IWT) और भारत का पक्ष?
1960 में हुई इस संधि के तहत, तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का नियंत्रण भारत को और तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया था।
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भारत का तर्क: विएना कन्वेंशन (Viennese Convention) के तहत, यदि कोई देश शत्रुतापूर्ण व्यवहार करता है, तो द्विपक्षीय संधियों को निलंबित या समाप्त किया जा सकता है।
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रणनीतिक चोट: भारत अब अपनी नदियों के पानी का पूर्ण उपयोग करने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है, जिससे पाकिस्तान के हिस्से जाने वाला ‘अतिरिक्त’ पानी रुक जाएगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’: आतंकवाद पर फाइनल प्रहार
भारत ने केवल जल मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि सैन्य मोर्चे पर भी पाकिस्तान की कमर तोड़ी है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से भारतीय सेना ने सीमा पार सक्रिय आतंकी लॉन्च पैड्स और प्रशिक्षण केंद्रों को नेस्तनाबूद कर दिया है। यह ऑपरेशन भारत की ‘प्रो-एक्टिव’ रक्षा नीति का हिस्सा है, जिसने पाकिस्तान को रक्षात्मक मोड में डाल दिया है।
विशेषज्ञ की राय: क्या यह ‘वॉटर वॉर’ की शुरुआत है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ को ‘स्मार्ट पावर’ में बदल लिया है। पाकिस्तान को अब यह समझना होगा कि आतंकवाद और कूटनीतिक सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। यदि पाकिस्तान अपनी आतंकी फैक्ट्री बंद नहीं करता, तो उसे आने वाले समय में भीषण जल संकट और अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ेगा।
मुख्य बिंदु: भारत-पाक जल विवाद 2026
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मुख्य घटना: सिंधु जल संधि का स्थगन।
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भारत का स्टैंड: आतंकवाद बंद करो, तभी पानी मिलेगा।
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पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और विश्व बैंक का रुख करने की धमकी।
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नया प्रोजेक्ट: चिनाब नदी पर दुलहस्ती चरण-दो।



