नई दिल्ली | विशेष संवाददाता भारत सरकार के आगामी बजट 2026-27 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। वित्त मंत्रालय के गलियारों से छनकर आ रही खबरों और केंद्रीय मंत्रियों की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि इस बार के बजट का केंद्र बिंदु ‘गांव, गरीब और किसान’ रहने वाले हैं। शनिवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट संकेत दिए कि मोदी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए अब तक का सबसे बड़ा फंड आवंटित करने जा रही है।
कृषि क्षेत्र के लिए ‘मिशन 2026’: राज्यों को सख्त अल्टीमेटम
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ शनिवार को मैराथन बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बजट 2026-27 के प्रभावी क्रियान्वयन की नींव रखना था। समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासनिक लापरवाही और कागजी कार्रवाई की वजह से किसानों का हक नहीं रुकना चाहिए।
उन्होंने राज्यों को कड़े निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत आवंटित फंड का उपयोग मार्च माह से पहले सुनिश्चित किया जाए। चौहान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर राज्य समय पर बजट खर्च नहीं करते हैं, तो इसमें नुकसान सिर्फ और सिर्फ किसानों का है। अगली किश्त तभी जारी होगी जब पिछली राशि का सही नियोजन होगा।”
प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही बैठक:
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पीएम-किसान सत्यापन: पात्र किसानों के ई-केवाईसी और डेटा सत्यापन में तेजी लाना।
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फसल बीमा योजना: दावों के निपटान में देरी को शून्य करना और कवरेज क्षेत्र बढ़ाना।
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उर्वरक प्रबंधन: आगामी रबी और खरीफ सीजन के लिए बीजों और खाद की अग्रिम उपलब्धता।
‘मनरेगा’ का अंत और ‘विकसित भारत-जी राम जी’ का उदय
इस साल के बजट का सबसे पावरफुल पहलू ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून में किया गया क्रांतिकारी बदलाव है। सरकार ने दशकों पुरानी मनरेगा (MGNREGA) योजना की कमियों को दूर करने का दावा करते हुए नया कानून “विकसित भारत – जी राम जी” लागू किया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को इस योजना के लिए बजट में 72% की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है। शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड के गौचर में आयोजित किसान सम्मेलन में इस योजना के वित्तीय ढांचे का खुलासा करते हुए बताया कि पिछले बजट में जहाँ ₹88,000 करोड़ का प्रावधान था, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर ₹1,51,282 करोड़ किया जा रहा है।
क्यों खास है ‘जी राम जी’ योजना?
सरकार का तर्क है कि यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि व्यवस्था का कायाकल्प है:
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रोजगार की गारंटी: अब साल में 100 दिन के बजाय 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार मिलेगा।
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बेरोजगारी भत्ता: यदि काम देने में देरी हुई, तो लाभार्थी को अनिवार्य रूप से भत्ता दिया जाएगा।
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ब्याज का प्रावधान: मजदूरी भुगतान में देरी होने पर अब सरकार श्रमिक को ब्याज समेत भुगतान करेगी।
बजट 2026-27: ग्रामीण विकास को क्यों मिल रही है इतनी अहमियत?
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026-27 कृषि और ग्रामीण विकास पर केंद्रित होने के पीछे आर्थिक और राजनैतिक, दोनों कारण हैं। वैश्विक मंदी के आहट के बीच घरेलू ग्रामीण मांग (Rural Demand) को बढ़ाना सरकार की मजबूरी भी है और जरूरत भी।
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पूंजी प्रवाह (Capital Inflow): ग्रामीण क्षेत्रों में ₹63,282 करोड़ का अतिरिक्त निवेश सीधे तौर पर गांवों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बढ़ाएगा।
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बुनियादी ढांचा: कृषि योजनाओं के जरिए कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग नेटवर्क को मजबूत करने का लक्ष्य है।
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तकनीक का समावेश: कृषोन्नति योजना के माध्यम से खेती में एआई (AI) और ड्रोन्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
सियासी घमासान: ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ बनाम ‘विकसित भारत’
जहाँ एक ओर सरकार इसे गेम-चेंजर बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने आरोप लगाया है कि मनरेगा का नाम बदलना गरीब विरोधी कदम है। कांग्रेस ने आगामी 5 जनवरी से देशव्यापी “मनरेगा बचाओ अभियान” शुरू करने का ऐलान किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि नए कानून की आड़ में मनरेगा के मूल ढांचे को कमजोर किया जा रहा है।
हालांकि, शिवराज सिंह चौहान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “जी राम जी” योजना मनरेगा से कहीं अधिक पारदर्शी और श्रमिक हितैषी है।
किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में बड़ा कदम
बजट 2026-27 केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए एक विज़न डॉक्यूमेंट साबित होने वाला है। ₹1.51 लाख करोड़ का फंड और कृषि क्षेत्र में राज्यों के साथ बेहतर समन्वय यह संकेत दे रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार ‘रूरल इंडिया’ के लिए अपनी तिजोरी खोलने के मूड में हैं।
किसानों के लिए खाद, बीज, बीमा और रोजगार के मोर्चे पर यह साल निर्णायक साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें फरवरी में पेश होने वाले बजट भाषण पर टिकी हैं।



