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Uttarakhand: सैनिक स्कूल घोड़ाखाल ने रचा स्वर्णिम इतिहास: अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और उत्कृष्टता की मिसाल—मुख्यमंत्री धामी

The Hill India News
Last updated: December 12, 2025 1:04 pm
The Hill India News
Published: December 12, 2025
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देहरादून/घोड़ाखाल, 12 दिसंबर 2025: उत्तराखंड का गौरव कहलाने वाला सैनिक स्कूल घोड़ाखाल अपने 60 वर्षों के इतिहास में एक बार फिर चमक उठा। नैनीताल जिले के भवाली स्थित विद्यालय में आयोजित हीरक जयंती समारोह का विधिवत उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्कूल की उपलब्धियों को “राष्ट्रभक्ति और अनुशासन की अमूल्य धरोहर” बताया।

Contents
एनडीए में सर्वाधिक चयन—लगातार 10वीं बार रक्षा मंत्री ट्रॉफी की उपलब्धि“सैनिक स्कूल सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन जीना सिखाता है” — सीएम धामीमुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किएमोदी सरकार के सैनिक स्कूलों और सेना के आधुनिकीकरण पर जोरवन रैंक–वन पेंशन: दशकों पुरानी मांग पूरी हुईउत्तराखंड सरकार भी सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध“संकल्प विकल्प रहित होना चाहिए”—सीएम का विशेष संदेशसमारोह में सम्मान और उत्साह का माहौलनिष्कर्ष

सीएम धामी ने कहा कि सैनिक स्कूल घोड़ाखाल ने दशकों से राष्ट्र को ऐसे युवा दिए हैं जो न सिर्फ भारतीय सेना का गौरव बने, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने इस संस्थान को “चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास की श्रेष्ठ पाठशाला” बताया।


एनडीए में सर्वाधिक चयन—लगातार 10वीं बार रक्षा मंत्री ट्रॉफी की उपलब्धि

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सैनिक स्कूल घोड़ाखाल का इतिहास स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।
स्कूल—

  • एनडीए में देशभर में सर्वाधिक चयन कराने वाला संस्थान है
  • लगातार 10वीं बार रक्षा मंत्री ट्रॉफी जीतकर कीर्तिमान स्थापित कर चुका है

सीएम धामी ने इसे कैडेट्स, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन की मेहनत, अनुशासन और संकल्प का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा—

“घोड़ाखाल की मिट्टी में जो जज्बा है, वही यहां के छात्रों को बाकी जगहों से अलग खड़ा करता है। यही जज्बा उन्हें आगे चलकर सेनाओं में श्रेष्ठ अधिकारी बनाता है।”


“सैनिक स्कूल सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन जीना सिखाता है” — सीएम धामी

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भावुक होते हुए बोले कि सैनिक स्कूलों में शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन मूल्यों, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रधर्म की सीख देती है।

उन्होंने कहा—

“इस विद्यालय की ड्रेस केवल कपड़ा नहीं, बल्कि एक अनुशासन, एक सम्मान और एक वचन है।”

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि घोड़ाखाल में रहकर उनमें कब नेतृत्व, शौर्य और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो जाएगी, उन्हें इसका अहसास जीवन की अगली यात्रा में होगा।


मुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह भावुक बात कही कि वे स्वयं एक सैनिक के पुत्र हैं।
उन्होंने कहा कि सैनिक परिवार में पले-बढ़े बच्चे राष्ट्रसेवा, अनुशासन और संघर्ष की गहरी समझ रखते हैं।

सीएम बोले—

“सैनिक परिवार में चुनौतियों और त्याग को नजदीक से देखा है। यही अनुभव मुझे सैनिक परिवारों के प्रति संवेदनशील बनाता है।”


मोदी सरकार के सैनिक स्कूलों और सेना के आधुनिकीकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में—

  • सैनिक स्कूलों का व्यापक विस्तार
  • नए सैनिक स्कूलों की स्थापना
  • सेना के आधुनिकीकरण
  • रक्षा बजट में ऐतिहासिक वृद्धि

जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा है और दुनिया के कई देशों को अत्याधुनिक हथियार निर्यात कर रहा है।

अभी कुछ दशक पहले भारत बड़ी संख्या में रक्षा उत्पाद आयात करता था, पर आज भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल है।


वन रैंक–वन पेंशन: दशकों पुरानी मांग पूरी हुई

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वन रैंक–वन पेंशन (OROP) लागू कर पूर्व सैनिकों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक मजबूती प्रदान की।
उन्होंने इसे “सेना और सैनिक सम्मान के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक” बताया।


उत्तराखंड सरकार भी सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड न केवल देवभूमि है बल्कि वीरभूमि भी है।
इस राज्य की मिट्टी ने हजारों वीर सैनिक राष्ट्र को दिए हैं जिन्होंने सीमा पर सर्वोच्च बलिदान दिया।

राज्य सरकार ने—

  • शहीदों के अनुग्रह अनुदान में 5 गुना वृद्धि
  • शहीद के एक आश्रित को सरकारी नौकरी
  • पूर्व सैनिकों के लिए अनेक रियायतें और सहायता योजनाएँ
  • वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के लिए एकमुश्त और वार्षिकी राशि में वृद्धि

जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में भव्य सैन्य धाम का निर्माण तेज़ी से प्रगति पर है और इसका लोकार्पण जल्द होगा।


“संकल्प विकल्प रहित होना चाहिए”—सीएम का विशेष संदेश

कैडेट्स और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा—

“आप जो भी संकल्प लें, उस पर मन लगाकर कार्य करें। संकल्प में किंतु-परंतु का विकल्प न रखें। विकल्प रहित संकल्प ही सिद्धि तक ले जाता है।”

उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य ग्रुप कैप्टन विजय सिंह और पूरी टीम को शिक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए बधाई दी।


समारोह में सम्मान और उत्साह का माहौल

कार्यक्रम में—

  • बेस्ट जूनियर हाउस
  • बेस्ट सीनियर हाउस
  • सी. हाउस

के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
समारोह में बड़ी संख्या में कैडेट्स, अभिभावक और पूर्व छात्र मौजूद रहे।

कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों में—

  • विधायक नैनीताल सरिता आर्या
  • विधायक राम सिंह कैड़ा
  • ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट
  • मंडलायुक्त दीपक रावत
  • आईजी रिद्धिम अग्रवाल
  • जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल
  • एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी

सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


निष्कर्ष

हीरक जयंती समारोह ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि सैनिक स्कूल घोड़ाखाल केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि अनुशासन, देशभक्ति, त्याग और नेतृत्व की अकादमी है।
मुख्यमंत्री धामी के शब्दों ने स्कूल की विरासत को और भी ऊँचा उठाते हुए यह स्पष्ट किया कि घोड़ाखाल आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशाला बना रहेगा।

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