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भारत मादक पदार्थों के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में अमेरिका के साथ सहयोग और मजबूत करना चाहता है: केंद्र

नई दिल्ली: भारत ने कहा है कि वह मादक पदार्थों की तस्करी और नशे से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ अमेरिका के साथ मिलकर चल रहे परिचालन सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच न केवल आपसी संवाद बढ़ा है, बल्कि वास्तविक जमीनी स्तर पर संयुक्त अभियानों की संख्या भी बढ़ी है, जिनके परिणामस्वरूप कई बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स को ध्वस्त किया गया है।

परिचालन सहयोग ‘महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा’: विदेश मंत्रालय

साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा और जांच एजेंसियों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा:

“पिछले कई वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में परिचालन सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों ने विभिन्न जांच एजेंसियों के माध्यम से संयुक्त अभियानों को अंजाम दिया है, जिससे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गिरोहों का खात्मा हुआ है।”

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ड्रग तस्करी आज एक सीमा-विहीन चुनौती बन चुकी है, इसलिए किसी एक देश के लिए अकेले उससे निपटना संभव नहीं है।

संयुक्त अभियानों का प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय गिरोहों पर करारा प्रहार

अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में भारत और अमेरिका की विभिन्न एजेंसियों—जैसे कि एनसीबी, डीईए (Drug Enforcement Administration), एफबीआई, और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस—ने कई महत्वपूर्ण अभियानों में सहयोग किया है। इन अभियानों के तहत:

  • सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई चेन का पर्दाफाश
  • दक्षिण एशिया से अमेरिका और यूरोप तक सक्रिय नेटवर्क पर नकेल
  • ऑनलाइन ड्रग डार्कनेट मार्केट्स पर तलवारबाजी
  • केमिकल प्रीकर्सर्स की तस्करी पर कड़ा नियंत्रण

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस सहयोग ने न केवल भारत में मादक पदार्थों की उपलब्धता को कम किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ऐसे नेटवर्क की रीढ़ भी तोड़ी है जिन्हें पहले पकड़ पाना मुश्किल माना जाता था।

भारत की प्राथमिकता: ‘साझा लड़ाई को और मजबूत करना’

रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत केवल मौजूदा स्तर पर संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह इस सहयोग को और व्यापक बनाना चाहता है। उनका कहना था कि मादक पदार्थों के अवैध व्यापार का मुकाबला करने के लिए दोनों देशों को—

  • सूचना साझाकरण और तेज करना
  • संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाना
  • नई तकनीकों का साझा उपयोग
  • समुद्री और साइबर डोमेन में संयुक्त निगरानी

जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा:

“भारत इस साझा लड़ाई में अमेरिका के साथ खड़ा है। हम इसे और मजबूत करना चाहते हैं क्योंकि ड्रग तस्करी न केवल कानून व्यवस्था की समस्या है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा खतरा है।”

रणनीतिक साझेदारी का नया आयाम

विश्लेषकों का मानना है कि भारत-अमेरिका सहयोग का यह ट्रैक दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के व्यापक स्वरूप का हिस्सा है। जिस तरह रक्षा, तकनीक, व्यापार और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा में सहयोग गहराया है, उसी तरह मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई में भी तालमेल एक नया आयाम जोड़ रहा है।

इसके साथ ही यह सहयोग भारत की “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट ड्रग्स” नीति को वैश्विक मंच पर और मजबूती देता है। अमेरिका भी दक्षिण एशिया में उभरते ड्रग रूट्स और सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क को लेकर चिंतित है।

महत्वपूर्ण है सहयोग का अगला चरण

सरकार से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में दोनों देश:

  • उन्नत ड्रग डिटेक्शन तकनीकों की साझेदारी
  • डार्क वेब मॉनिटरिंग टूल्स का संयुक्त उपयोग
  • सीमा सुरक्षा सहयोग का विस्तार
  • और प्रीकर्सर केमिकल्स की ट्रैकिंग व्यवस्था

जैसे क्षेत्रों में नए समझौते या कार्य-योजनाएँ आगे बढ़ा सकते हैं।

भारत ने साफ कर दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई वैश्विक साझेदारी से ही मजबूत होगी। अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग न केवल परिचालन स्तर पर प्रभावी है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि दक्षिण एशिया में ड्रग नेटवर्क्स को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत आने वाले समय में भी इस संयुक्त लड़ाई को और आक्रामक और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।

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