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Uttarakhand: हल्द्वानी में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष–2025 का भव्य शुभारंभ, सीएम धामी ने 17 करोड़ से अधिक की सहायता बांटी, सहकारिता को बताया राज्य विकास की रीढ़

हल्द्वानी, 26 नवंबर: उत्तराखंड में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष–2025 का आगाज सोमवार को हल्द्वानी में एक भव्य सहकारिता मेला आयोजित कर किया गया। एमबी इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी संख्या में उपस्थित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और सहकारी समितियों के सदस्यों को संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पशुपालन और सब्जी उत्पादन में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों को मध्यकालीन दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता कल्याण योजना के तहत 16.97 करोड़ रुपये तथा एनआरएलएम के अंतर्गत 75.50 लाख रुपये की सहायता राशि वितरण की।

कार्यक्रम में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों प्रतिभागियों की उपस्थिति में सहकारिता वर्ष के औपचारिक शुभारंभ के साथ ही मुख्यमंत्री धामी ने सहकारिता को उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

“सहकारिता से पर्यटन विकास”—मेले की थीम ने आकर्षित किए सभी की निगाहें

इस सात दिवसीय मेले में इस वर्ष की थीम “सहकारिता से पर्यटन विकास” रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन न केवल सहकारिता तंत्र को मजबूती देगा, बल्कि पर्यटन से रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा।
मेले में राज्य की विभिन्न सहकारी समितियों और SHG समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही ईको-पर्यटन, होमस्टे प्रबंधन, स्थानीय व्यंजनों, प्राकृतिक खेती, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण से जुड़ी कार्यशालाएँ और विशेष सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “सहकारिता आधारित पर्यटन मॉडल उत्तराखंड को आत्मनिर्भर व रोजगारयुक्त राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

डिजिटलाइजेशन में उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने वाले राज्यों में उत्तराखंड अग्रणी है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में पहली बार सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत उत्तराखंड ने ही की थी और आज राज्य की 671 समितियाँ पूर्णत: डिजिटल प्रणाली से संचालित हो रही हैं।
राज्य की 24 समितियाँ जन औषधि केंद्रों के रूप में कार्य कर रही हैं, जबकि 640 समितियाँ कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा, पेंशन, आधार और अन्य डिजिटल सरकारी सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 5511 समितियों में से 3838 समितियों के डेटा को राष्ट्रीय सहकारी डेटा बेस पर अपलोड कर दिया गया है, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि योजनाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी हो पाई है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य में 800 नई PACS, 248 नई डेयरी समितियाँ और 116 मत्स्य समितियाँ गठित की गई हैं। वहीं मिलेट मिशन के अंतर्गत किसानों से मंडुवा खरीद की दर बढ़ाकर 48.86 रुपये प्रति किलो कर दी गई है, जिससे पहाड़ी किसानों की आय में बड़ा सुधार हुआ है।

महिला सशक्तिकरण में नई मिसाल—1.68 लाख से अधिक महिलाएँ बनीं “लखपति दीदी”

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड आज महिला आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत मॉडल बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1,68,000 से अधिक महिलाएँ “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जो स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का नया चेहरा पेश कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारिता आधारित आय वृद्धि योजनाओं, पर्यटन आधारित आजीविका और ऋण सुविधाओं ने महिलाओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

हल्द्वानी में तेजी से बदल रहा विकास का स्वरूप

मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम में हल्द्वानी शहर में जारी विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि शहर में 792 करोड़ रुपये की रिंग रोड, मल्टीस्टोरी पार्किंग, शहर की सड़कों का व्यापक सुधार, लिगेसी वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट, पोलिनेटर पार्क और एस्ट्रो पार्क जैसे प्रोजेक्ट तेजी से आकार ले रहे हैं।
इसके अलावा हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में राजकीय कैंसर संस्थान का निर्माण भी तेजी से प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर से विभिन्न जिलों और मुंबई के लिए नई रेल एवं हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और चिकित्सा सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।

धर्मांतरण, लैंड जिहाद और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने अपराध और अवैध गतिविधियों पर सरकार की सख्त नीति पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है, जबकि 250 अवैध मदरसों को सील किया गया है और मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि “लैंड जिहाद” और “लव जिहाद” जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई जारी है। साथ ही “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत सनातन संस्कृति के विरुद्ध फर्जी प्रचार करने वालों को पकड़ा जा रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राज्य में अब तक 200 से अधिक भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लागू देश का सबसे सख्त नकल-विरोधी कानून युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने में मील का पत्थर साबित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े चार वर्षों में राज्य में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है।

स्वदेशी को प्रोत्साहन—जनभागीदारी का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “स्वदेशी अपनाओ” के संदेश का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड को आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए स्थानीय उत्पादों का उपयोग जनआंदोलन का रूप लेना चाहिए। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे स्थानीय हस्तशिल्प, कृषि उत्पादों और सहकारिता आधारित वस्तुओं को अपनाएं और आगे बढ़ाएँ।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट, क्षेत्रीय विधायक, दर्जाधारी मंत्री, सहकारी क्षेत्र के अधिकारी, बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ उपस्थित रहीं। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष–2025 का यह शुभारंभ राज्य में सहकारिता आधारित विकास के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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