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Reading: पश्चिम बंगाल में SIR के बीच चुनावी हलचल तेज, चुनाव आयोग ने की ईवीएम की व्यापक जांच शुरू
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देशफीचर्ड

पश्चिम बंगाल में SIR के बीच चुनावी हलचल तेज, चुनाव आयोग ने की ईवीएम की व्यापक जांच शुरू

The Hill India News
Last updated: November 21, 2025 1:55 pm
The Hill India News
Published: November 21, 2025
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच चुनावी हलचल तेज होने लगी है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने 2026 के विधानसभा चुनावों की प्रारंभिक तैयारियों के मद्देनज़र शुक्रवार को पूरे राज्य में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) की गहन जांच और मॉक पोल का बड़ा अभ्यास शुरू किया। यह टेस्ट रूटीन प्रक्रिया से कहीं अधिक व्यापक, तकनीकी रूप से गहन और चुनावी मानकों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Contents
6 बटनों पर 16-16 बार वोटिंग: कुल 96 बार परीक्षणपहली बार: ईवीएम पर उम्मीदवार की तस्वीर भी होगीवेयरहाउस में कड़ी सुरक्षा—तीन परतों की निगरानीक्यों ज़रूरी था ये बड़ा अभ्यास?मतदाता सूची पुनरीक्षण भी अंतिम चरण में2026 के विधानसभा चुनावों का संकेत?निष्कर्ष

राज्य के सभी जिलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), वेयरहाउस निरीक्षक और ईवीएम तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर मौजूद चुनावी स्टाफ और मशीनों को संभालने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया, ताकि आगामी चुनावों में किसी भी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रियागत कमी की संभावना न्यूनतम हो सके।


6 बटनों पर 16-16 बार वोटिंग: कुल 96 बार परीक्षण

ईवीएम की विश्वसनीयता को परखने के लिए आयोग ने इस बार असाधारण रूप से कठोर परीक्षण मानक अपनाए। अधिकारियों के अनुसार, हर मशीन में मौजूद छह बटनों की कार्यप्रणाली का परीक्षण करने के लिए प्रत्येक बटन पर 16 बार वोट डाला गया—इस प्रकार एक मशीन पर कुल 96 वोटिंग संकेत दर्ज किए गए।

परीक्षण का उद्देश्य यह देखना था कि—

  • क्या प्रत्येक बटन वोट दर्ज करते समय सही प्रतिक्रिया दे रहा है?
  • क्या बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट के बीच समन्वय सटीक है?
  • क्या वीवीपैट (VVPAT) स्लिप पर मुद्रित जानकारी सही, स्पष्ट और क्रमबद्ध दिखाई दे रही है?
  • क्या किसी भी मशीन में तकनीकी लैग, बटन फेलियर या प्रिंटिंग त्रुटि तो नहीं है?

ईसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“मॉक पोल के दौरान किसी भी तरह की खामी सामने आए, तो मशीन को मौके पर ही बदल दिया जाता है। हमारा उद्देश्य है—2026 के चुनावों तक ऐसी कोई ईवीएम मैदान में न पहुंचे, जिसमें त्रुटि की संभावना शून्य से अधिक हो।”


पहली बार: ईवीएम पर उम्मीदवार की तस्वीर भी होगी

इस बार एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव यह है कि ईवीएम के बैलेट यूनिट पर पहली बार प्रत्येक उम्मीदवार की स्पष्ट तस्वीर भी प्रदर्शित की जाएगी। आयोग ने इसका उद्देश्य मतदाताओं को अधिक सुविधा देना बताया है—विशेषकर उन बूथों पर जहां मतदान आबादी में निरक्षरता, भाषाई विविधता या एक जैसे नाम वाले उम्मीदवार अधिक होते हैं।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया,
“मतदाता की पहचान और सुनिश्चित विकल्प चयन को आसान बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। उम्मीदवार का नाम, पार्टी का चुनाव चिह्न और अब उसकी तस्वीर—ये तीनों चीजें एक साथ दिखाई देंगी। इससे भ्रम की स्थिति लगभग समाप्त हो जाएगी।”

तस्वीर का प्रारूप, आकार तथा गुणवत्ता आयोग द्वारा निर्धारित होगी और नामांकन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों से ली गई फोटो ही मशीनों पर लगाई जाएगी। यह तस्वीर प्रशिक्षण सत्रों में कर्मचारियों को भी दिखाई गई, ताकि वे मशीनों को संभालते समय किसी प्रकार की तकनीकी भूल न करें।


वेयरहाउस में कड़ी सुरक्षा—तीन परतों की निगरानी

ईवीएम का परीक्षण राज्य के सुरक्षित वेयरहाउसों में किया गया, जहां सभी मशीनें चुनावी अवधि के अलावा सुरक्षित रखी जाती हैं। इन वेयरहाउसों में सुरक्षा के तीन स्तर लागू होते हैं—

  1. CCTV निगरानी – 24×7 रिकॉर्डिंग
  2. सील्ड प्रवेशद्वार – बिना अनुमति कोई प्रवेश संभव नहीं
  3. फिजिकल गार्ड और लॉग बुक सिस्टम

टेस्टिंग के दौरान प्रत्याशित राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को भी मौजूद रहने का विकल्प दिया गया, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रह सके। कई जिलों में राजनीतिक दलों के स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस निरीक्षण को देखा, दर्ज किया और मशीनों की तकनीकी प्रक्रिया पर संदेह दूर किए।


क्यों ज़रूरी था ये बड़ा अभ्यास?

पिछले कुछ वर्षों में ईवीएम को लेकर देशभर में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि तकनीकी मजबूती और चुनावी पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे।

पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय और उच्च मतदान प्रतिशत वाले राज्य में, मशीनों की विश्वसनीयता बनाए रखना चुनाव प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

इसके अलावा—

  • 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा
  • 2024 के लोकसभा चुनावों में बंगाल सबसे अधिक हिंसा-प्रभावित राज्यों में रहा
  • मतदाता सूची में SIR के दौरान भारी संख्या में संशोधन किए गए
  • नए मतदाताओं की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी

इन सभी कारणों से ईवीएम परीक्षण और भी संवेदनशील और आवश्यक हो गया।


मतदाता सूची पुनरीक्षण भी अंतिम चरण में

इसी बीच, राज्य में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अंतिम चरण में है। ब्लॉक स्तर पर बूथों से प्राप्त प्रारूपों की जांच, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और एक से अधिक पते पर दर्ज नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

सूत्रों के अनुसार—

  • जनवरी 2026 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने की संभावना है
  • संशोधित सूची में युवाओं, खासकर 18–19 वर्ष के नए मतदाताओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर हो सकती है

2026 के विधानसभा चुनावों का संकेत?

हालांकि चुनाव आयोग ने इसे नियमित प्रक्रिया बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी जल्दी और इतनी व्यापक तकनीकी तैयारी इस बात की ओर संकेत करती है कि आयोग किसी भी परिस्थिति में चुनावी तैयारियों को लेकर ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

एक राजनीतिक विशेषज्ञ ने कहा,
“इस तरह की मशीनों की गहन जांच आम तौर पर चुनावी वर्ष में होती है। यह तैयारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आयोग पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावों के लिए पहले से ही पूरी व्यवस्था दुरुस्त करना चाहता है।”


निष्कर्ष

ईवीएम की सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर भले ही देश में बहस जारी हो, लेकिन पश्चिम बंगाल में आयोग द्वारा की जा रही यह व्यापक और तकनीकी रूप से गहन कार्रवाई मतदाताओं में भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

अगले कुछ महीनों में—

  • मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
  • मशीनों की सेकेंड-लेवल चेकिंग (SLC)
  • पोलिंग स्टाफ का उन्नत प्रशिक्षण
  • वीवीपैट स्टॉक की जांच
  • बूथों के संवेदनशीलता-आधारित वर्गीकरण जैसे कदम चुनावी तैयारियों को और मजबूती देंगे।

2026 का विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं है, और भारतीय चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और सुचारु रूप से संपन्न हो।

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