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दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मौलवी इरफान ने बताया—डॉक्टर्स कई बार AK-47 लेकर आते थे मस्जिद

नई दिल्ली: दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। पढ़े-लिखे डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अब जम्मू-कश्मीर के शोपियां की एक मस्जिद में मौलवी रहे इरफान की पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियाँ मिली हैं। NIA के सामने मौलवी ने स्वीकार किया कि आरोपी डॉक्टर कई बार AK-47 लेकर मस्जिद पहुंचे थे और वहीं बैठकर हथियारों की सफाई करते थे।


AK-47 का कनेक्शन: मस्जिद में होता था हथियारों का लेन-देन

सूत्रों के अनुसार, मौलवी इरफान ने बताया कि अक्टूबर 2023 में डॉ. अदिल और डॉ. उमर मस्जिद अली में AK-47 लेकर आए थे। दोनों ने हथियार मस्जिद में रखकर उसका बैरल साफ किया और फिर चले गए।
नवंबर 2023 में डॉ. अदिल दोबारा AK-47 लेकर पहुंचा। थोड़ी देर बाद डॉ. मुझम्मिल और उसकी डॉक्टर दोस्त शाहीन सईद भी मस्जिद पहुंचीं। जाने से पहले तीनों ने हथियार मौलवी इरफान के पास छोड़ दिया।

मौलवी का कहना है कि बाद में डॉ. अदिल मस्जिद आकर वही AK-47 ले गया था।


कैसे जुड़े डॉक्टर आतंकी संगठन AGuH से?

मौलवी ने स्वीकार किया कि उसकी मुलाकात 2022 में डॉ. मुझम्मिल ने ही डॉ. अदिल अहमद रठार और डॉ. उमर मोहम्मद नबी से कराई थी।
तीनों आँसर अल-ग़ुज़वात-ए-हिंद (AGuH) की विचारधारा से प्रभावित थे।

जुम्मे की नमाज़ के दौरान मौलवी की मुलाकात मुश्ताक से हुई, जो पहले से आतंकी हैंडलर हाशिम के संपर्क में था।


पिस्टल और राइफल की सप्लाई का नेटवर्क उजागर

जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी आरिफ निसार डार कुरान की क्लास लेने मौलवी के पास आता था और दोनों की विचारधारा मेल खाती थी।
मौलवी ने NIA को बताया कि:

  • उसने अनंतनाग (ईदगाह) से पिस्टल उठाकर आरिफ को दी थी
  • आरिफ ने नमाल क्षेत्र (PS Nowgam) में एक राउंड फायर भी किया
  • डर की वजह से उसने पिस्टल वापस कर दी, जो बाद में मुश्ताक से बरामद हुई

इसी तरह, हैंडलर हाशिम के निर्देश पर मौलवी ने:

  • सिमेंट ब्रिज, नूरबाग से ज़मीर उर्फ Mitlashi के ज़रिए एक शॉटगन/क्रिंकोव राइफल ली
  • उसे दो अज्ञात लोगों को सौंप दिया
  • पदशाही बाग से पिस्टल उठाकर भी ज़मीर को दी—जो उसकी गिरफ्तारी के समय बरामद हुई

हैंडलर हाशिम से कैसे हुआ संपर्क?

मौलवी ने एनआईए को बताया कि अगस्त 2023 में उसने हाशिम से उसकी असली पहचान पूछी। इसके बाद हाशिम ने सभी सामान्य माध्यमों से संपर्क बंद कर दिया और केवल टेलीग्राम पर बातचीत जारी रखी।


मौलवी की मुख्य भूमिका: पढ़े-लिखे युवाओं को रेडिकलाइज़ करना

NIA की जांच में यह भी सामने आया कि:

  • मौलवी इरफान शो‍पियां मस्जिद में तैनात था
  • उसका काम शिक्षित युवाओं को रेडिकलाइज़ कर जैश से जोड़ना था
  • उसके कई जैश कमांडरों से सीधे संबंध थे
  • डॉक्टरों को आतंकी मॉड्यूल में शामिल कराने में उसकी अहम भूमिका थी

पहले उसने डॉ. मुझम्मिल को जोड़ा, फिर मुझम्मिल ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अपने जैसे विचारधारा वाले डॉक्टर अदिल, उमर और शाहीन को भर्ती किया।
बाद में शाहीन ने अपने भाई डॉ. परवेज अंसारी को भी इस साजिश का हिस्सा बनाया।

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