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देहरादून में ‘नंदा-सुनंदा’ परियोजना का 10वां संस्करण सम्पन्न, डीएम सविन बंसल की पहल बनी राज्य में संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

32 असहाय छात्राओं को मिली 13 लाख की शिक्षा सहायता; अब तक 90 बालिकाओं की पढ़ाई पुनर्जीवित, 32 लाख रुपये वितरित

देहरादून, 14 नवंबर 2025। प्रदेश में बालिकाओं के लिए शिक्षा और अवसरों के नए द्वार खोलने वाली देहरादून जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ ने शुक्रवार को अपना 10वां संस्करण पूरा कर लिया। जिला कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 32 असहाय, अनाथ और आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को 13 लाख रुपये की शिक्षा सहायता राशि प्रदान की गई। यह छात्राएं आगे स्नातक, स्नातकोत्तर और कौशल शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राजपुर रोड विधायक खजान दास और जिलाधिकारी सविन बंसल ने न केवल चेक वितरित किए बल्कि बालिकाओं को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन भी दिया।


एक दशक जैसा प्रभाव: अब तक 90 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित

‘नंदा-सुनंदा’ परियोजना की शुरुआत निराशा में डूबी उन बालिकाओं के लिए की गई थी, जिनकी पढ़ाई गरीबी, असहायता या सामाजिक परिस्थितियों के कारण रुक गई थी।
जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में चल रही इस परियोजना के तहत अब तक—

  • 90 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित
  • कुल 32 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित
  • 10 संस्करणों में सैकड़ों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक संबल

डीएम बंसल ने इस पहल को “हमारे जीवन की वास्तविक नंदा-सुनंदा—असली देवियों—को सशक्त बनाने का माध्यम” बताया।


“जब लक्ष्य तय हो, सहयोग अपने आप मिलता है”: डीएम सविन बंसल

कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने भावुक शब्दों में कहा कि यह परियोजना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के लिए वह मरहम है जिसकी उन्हें नए सिरे से शुरुआत के लिए आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा—
“बालिकाएं अपनी शिक्षा की स्पार्क को बनाए रखें। जब हम लक्ष्य निर्धारण कर मेहनत करते हैं, तो रास्ते में कहीं ना कहीं सहयोग अवश्य मिलता है। जीवन की इच्छा शक्ति को कभी कम न होने दें।”

डीएम ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपनी बेटियों को हर संभव समर्थन देते रहें और शिक्षा को प्राथमिकता बनाएं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग के कारण ही यह परियोजना लगातार आगे बढ़ रही है और सामाजिक परिवर्तन की वास्तविक मिसाल बन चुकी है।


विधायक खजान दास ने की प्रशंसा—“जब कार्य सराहनीय हों, तो सराहना भी होनी ही चाहिए”

राजपुर विधायक खजान दास ने जिला प्रशासन की इस अनूठी पहल को “अभिनव और जनहितकारी परियोजना” बताते हुए कहा कि इसके परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा—

“अब तक 32 लाख रुपये की मदद से 90 बेटियों की पढ़ाई पुनर्जीवित होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। जिलाधिकारी सविन बंसल पूरी निष्ठा से जनहित के कार्य आगे बढ़ा रहे हैं। जब कार्य सराहनीय हों तो सराहना तो होनी ही चाहिए।”

विधायक ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी छात्राओं को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अभिभावक बच्चों की रुचि और शिक्षा को कभी कम न होने दें।


बेटियों की आंखों में सपनों की चमक—किसी की पढ़ाई छूटी, कोई नई शुरुआत को तैयार

इस कार्यक्रम के तहत जिन 32 बालिकाओं को सहायता मिली है, उनमें—

  • 31 स्कूली छात्राएं
  • 1 कॉलेज छात्रा

शामिल हैं, जिनकी पढ़ाई कभी अभाव के कारण रुक गई थी। कई बालिकाएं विज्ञान, नर्सिंग, कला और तकनीकी शिक्षा में अपना करियर आगे बढ़ाना चाहती हैं।

इनमें कई ऐसी छात्राएं भी हैं, जिन्होंने आज तक कभी स्कूल या कॉलेज की फीस खुद भरने का अवसर नहीं पाया था, लेकिन अब जिला प्रशासन और शासन की मदद से उनके सपनों को नई उड़ान मिली है।


संवेदना, संरक्षण और सशक्तिकरण—तीन स्तंभों पर खड़ी यह पहल

प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा प्रशासनिक तंत्र की एक ऐसी मिसाल है, जिसमें—

  • समाज के वंचित वर्ग तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँच रहा है
  • अनाथ और असहाय बालिकाओं को शिक्षा का संरक्षण मिल रहा है
  • भविष्य के लिए आत्मनिर्भरता का मार्ग तैयार हो रहा है

डीएम की इस पहल को उत्तराखंड की सबसे संवेदनशील और प्रभावी जिला स्तरीय पहल माना जा रहा है, जिसका मॉडल प्रदेशभर में लागू करने की चर्चाएं भी तेज हैं।


वरिष्ठ अधिकारी और अभिभावक भी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम अपूर्वा सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित बड़ी संख्या में बालिकाएं और उनके अभिभावक मौजूद रहे।
सभी ने इस परियोजना की उपयोगिता और इसके सकारात्मक परिणामों की प्रशंसा की।


देहरादून जिला प्रशासन का नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट न सिर्फ शिक्षा का पुनर्जीवन है बल्कि एक सामाजिक क्रांति है, जो उन बालिकाओं को नई पहचान दे रहा है जिनके सपने कभी परिस्थितियों की धुंध में खो गए थे।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और डीएम सविन बंसल की संवेदनशील नेतृत्व क्षमता ने इस परियोजना को उत्तराखंड की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक बना दिया है।

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