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दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए ‘स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर’ का इस्तेमाल शुरू करेगा यूपीएससी, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जानकारी

The Hill India News
Last updated: October 31, 2025 1:09 pm
The Hill India News
Published: October 31, 2025
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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा निर्णय लेते हुए अपनी विभिन्न परीक्षाओं में ‘स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर’ के इस्तेमाल की अनुमति देने का फैसला किया है। आयोग ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि इस तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित अभ्यर्थी अब अधिक सहजता और समान अवसर के साथ परीक्षा दे सकेंगे।

Contents
सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारीक्या है स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर?दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहततकनीकी और सुरक्षा पहलुओं पर ध्यानसमावेशी व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदमन्यायालय की टिप्पणीआगे की राह

यूपीएससी ने अदालत को बताया कि यह सुविधा तभी शुरू की जाएगी जब सभी परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक बुनियादी ढांचा, सॉफ्टवेयर परीक्षण और सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह स्थापित हो जाएंगे। आयोग ने कहा कि प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता बनी रहे, साथ ही दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को भी समान अवसर प्राप्त हो।

सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

मामले की सुनवाई के दौरान यूपीएससी ने उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि आयोग पहले ही इस दिशा में तकनीकी और व्यावहारिक पहल कर चुका है। अदालत को बताया गया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर को परीक्षा प्रणाली में सुरक्षित रूप से एकीकृत किया जा सके।

सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से कहा गया कि “यूपीएससी सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन-रीडर तकनीक का प्रयोग इस दिशा में एक ठोस कदम है।”

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने आयोग के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल सुगम्य भारत अभियान की भावना के अनुरूप है, बल्कि यह शिक्षा और रोजगार में समान अवसर के अधिकार को भी मजबूत करेगा।

क्या है स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर?

‘स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर’ एक ऐसा डिजिटल उपकरण है जो कंप्यूटर या टैबलेट स्क्रीन पर मौजूद टेक्स्ट को आवाज़ में पढ़ता है। यह तकनीक विशेष रूप से दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए बनाई गई है, जिससे वे बिना देखे कंप्यूटर पर जानकारी सुन सकते हैं और कीबोर्ड की सहायता से उसका उपयोग कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सॉफ्टवेयर उम्मीदवारों को प्रश्न पढ़ने, उत्तर दर्ज करने और ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को नेविगेट करने में सक्षम बनाता है। दुनिया के कई विकसित देशों में सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में इसका उपयोग पहले से हो रहा है।

दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत

देशभर में लंबे समय से दृष्टिबाधित उम्मीदवार यह मांग करते रहे हैं कि यूपीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की अनुमति दी जाए। इससे पहले कई बार आयोग को अभ्यर्थियों की ओर से याचिकाएं और सुझाव दिए गए थे।

एक दृष्टिबाधित अभ्यर्थी ने अदालत में दायर याचिका में कहा था कि “वर्तमान व्यवस्था में हमें लेखक (scribe) पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे स्वतंत्रता और गोपनीयता दोनों प्रभावित होती हैं।” इस पर न्यायालय ने यूपीएससी से पूछा था कि वह तकनीकी रूप से क्या व्यवस्था कर सकता है जिससे अभ्यर्थियों को अधिक स्वायत्तता मिले।

अब आयोग के इस निर्णय से हजारों दृष्टिबाधित युवाओं को न केवल राहत मिलेगी, बल्कि स्वावलंबन और आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ेगी।

तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं पर ध्यान

यूपीएससी ने बताया कि सॉफ्टवेयर के चयन और तैनाती से पहले व्यापक परीक्षण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हो और परीक्षा के दौरान कोई तकनीकी या सुरक्षा बाधा उत्पन्न न हो।

आयोग ने यह भी कहा कि सॉफ्टवेयर का चयन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर किया जाएगा और उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रशिक्षण या डेमो भी प्रदान किया जा सकता है, ताकि वे परीक्षा के दिन सहज महसूस करें।

एक अधिकारी ने बताया, “यूपीएससी के लिए सबसे अहम चुनौती यह है कि तकनीक को इस तरह लागू किया जाए कि परीक्षा की निष्पक्षता और गोपनीयता पर कोई असर न पड़े। इसलिए हम चरणबद्ध तरीके से परीक्षण कर रहे हैं।”

समावेशी व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक संगठनों ने यूपीएससी के इस कदम का स्वागत किया है। ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड’ ने बयान जारी कर कहा, “यह निर्णय भारत में समावेशी परीक्षा प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। अब दृष्टिबाधित युवाओं को भी अन्य अभ्यर्थियों की तरह स्वतंत्र रूप से परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।”

संगठन ने उम्मीद जताई कि अन्य सरकारी भर्ती एजेंसियां — जैसे एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड और राज्य लोक सेवा आयोग — भी जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगी।

न्यायालय की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुगम्य भारत अभियान के तहत सरकार और सभी संवैधानिक संस्थाओं का दायित्व है कि वे दिव्यांगजनों के लिए समावेशी वातावरण तैयार करें। अदालत ने यूपीएससी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि “यह एक ऐसे भारत की झलक है, जहां योग्यता और अवसरों की समानता सर्वोपरि है।”

आगे की राह

आयोग ने कहा कि वह आने वाले महीनों में विभिन्न केंद्रों पर पायलट परीक्षण शुरू करेगा। इसके बाद परिणामों का मूल्यांकन कर इसे मुख्य सिविल सेवा परीक्षा और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लागू किया जाएगा।

यह पहल न केवल दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को नई दिशा देगी, बल्कि यह भी दर्शाएगी कि भारत की परीक्षा प्रणाली अब टेक्नोलॉजी आधारित समानता की ओर तेजी से अग्रसर है।

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