मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर ग्वालियर अब केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत और किलों के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में भी देशभर में नई पहचान बनाने जा रहा है। जिले के जहांगीरपुर-खुरैरी गांव में लगभग 49 करोड़ रुपये की लागत से देश की पहली ‘3-इन-1’ हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी विकसित की जाएगी। यह परियोजना पारंपरिक फ्लोरीकल्चर केंद्रों से बिल्कुल अलग होगी, क्योंकि यहां एक ही परिसर में फूलों पर शोध (रिसर्च), उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का उत्पादन, किसानों का प्रशिक्षण और पर्यटन—इन सभी सुविधाओं को एक साथ विकसित किया जाएगा। यही वजह है कि इसे देश का पहला ‘3-इन-1’ मॉडल माना जा रहा है।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में फ्लोरीकल्चर को नई दिशा देने का काम करेगी। इसके पूरा होने के बाद ग्वालियर आधुनिक उद्यानिकी, वैज्ञानिक खेती और कृषि पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। साथ ही यह परियोजना स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी और आसपास के गांवों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे केवल खेती या पौधों के उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे एक ऐसे हाईटेक कृषि-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां किसान आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेंगे, वैज्ञानिक नई किस्मों पर शोध करेंगे और आम पर्यटक फूलों की खूबसूरती के बीच प्रकृति का आनंद ले सकेंगे। इस प्रकार यह केंद्र शिक्षा, अनुसंधान, व्यवसाय और पर्यटन का अनूठा संगम बनेगा।
नर्सरी परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां 500 लोगों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया जाएगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, कृषि प्रदर्शनी, फूलों की प्रदर्शनियां और विभिन्न सामाजिक आयोजन किए जा सकेंगे। इससे यह स्थान केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में यहां राज्य और राष्ट्रीय स्तर के फ्लावर शो तथा कृषि मेलों का आयोजन भी किया जा सकता है।
पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए पूरे परिसर में आकर्षक लैंडस्केपिंग की जाएगी। रंग-बिरंगे फूलों, दुर्लभ पौधों और हरियाली से सजा यह परिसर लोगों को प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा अनुभव देगा। इसके अलावा यहां एक विशेष सेल काउंटर और प्रदर्शनी क्षेत्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग विभिन्न प्रकार के सजावटी पौधे, फूलों की प्रजातियां और बागवानी से जुड़ी सामग्री खरीद सकेंगे। इससे स्थानीय नर्सरी उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों के प्रशिक्षण पर भी इस परियोजना में विशेष ध्यान दिया गया है। परिसर में 200 सीटों वाला आधुनिक ऑडिटोरियम सह प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा, जहां किसानों को आधुनिक फ्लोरीकल्चर तकनीकों, ग्रीनहाउस प्रबंधन, पौध संरक्षण, जैविक खेती और उन्नत उद्यानिकी पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही बाहर से आने वाले किसानों और प्रशिक्षुओं के ठहरने के लिए 30 बिस्तरों वाला रेसिडेंशियल हॉस्टल भी तैयार किया जाएगा, जिससे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बन सकेंगे।
यह परियोजना तकनीकी रूप से भी अत्याधुनिक होगी। पहले चरण के लिए 13 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। परिसर में 120 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की आधुनिक प्लांट पैथोलॉजी लैब स्थापित की जाएगी, जहां पौधों की बीमारियों की जांच, नई प्रजातियों पर अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ फसलों में होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी।
बेमौसम फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए यहां लगभग 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में अत्याधुनिक ग्रीन हाउस, पॉली हाउस और शेड नेट हाउस विकसित किए जाएंगे। इन संरचनाओं की मदद से नियंत्रित वातावरण में वर्षभर विभिन्न प्रकार के फूलों का उत्पादन संभव होगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और फ्लोरीकल्चर उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
फूलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए परियोजना में 8 मीट्रिक टन क्षमता वाला आधुनिक कोल्ड स्टोरेज भी बनाया जाएगा, जिससे फूलों को लंबे समय तक ताजा रखा जा सकेगा और उन्हें देश के विभिन्न बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। इसके अलावा मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जो तापमान, आर्द्रता, वर्षा और अन्य मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर किसानों को वैज्ञानिक सलाह देने में मदद करेगा।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना मध्य प्रदेश में फ्लोरीकल्चर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलने से उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होगा। वहीं, पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय लोगों को होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इससे जहांगीरपुर-खुरैरी गांव का समग्र विकास होगा और यह क्षेत्र एक नए आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में देश के अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के ‘3-इन-1’ फ्लोरीकल्चर केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। इससे भारत में फूलों की खेती को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि पर्यटन को भी मजबूत आधार मिलेगा।
उद्यानिकी विभाग के अनुसार, अगले दो वर्षों में यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी तरह तैयार हो जाएगी। इसके बाद ग्वालियर केवल ऐतिहासिक धरोहरों का शहर नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक कृषि, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रकृति आधारित पर्यटन का एक राष्ट्रीय मॉडल बनकर देशभर के किसानों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
