UGC NET Cancelled Papers Reason: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। जून में आयोजित UGC NET परीक्षा के तीन विषयों के पेपर अब रद्द कर दिए गए हैं। इन विषयों में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी शामिल हैं। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से पेपर में कई तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद NTA ने इन तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया है। खास बात यह है कि यह निर्णय प्रोविजनल आंसर की जारी होने के बाद लिया गया, जिससे अभ्यर्थियों के बीच भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
NTA की ओर से बताया गया है कि तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों की जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। इनमें स्पेलिंग की गलतियां, प्रिंटिंग संबंधी त्रुटियां, व्याकरण की गलतियां और पहले पूछे जा चुके सवालों का दोबारा शामिल होना जैसी शिकायतें प्रमुख थीं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन गलतियों का असर उनकी परीक्षा पर पड़ा और कई सवालों को समझना तक मुश्किल हो गया।
तीन विषयों के पेपर रद्द करने की आखिर जरूरत क्यों पड़ी?
UGC NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा कराने तक कई स्तरों पर सावधानी बरती जाती है। ऐसे में प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आना अपने आप में गंभीर विषय बन जाता है।
NTA के अनुसार, इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्रों में ऐसी कई खामियां मिलीं जिन्हें केवल कुछ सवाल हटाकर या उनके उत्तर बदलकर ठीक करना संभव नहीं था। यही वजह रही कि संबंधित विषयों की पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
अभ्यर्थियों की ओर से भी परीक्षा के बाद लगातार शिकायतें की गई थीं। उनका आरोप था कि प्रश्नपत्र में ऐसे सवाल मौजूद थे जिनमें भाषा और व्याकरण से जुड़ी गलतियां थीं। कुछ प्रश्नों की स्पेलिंग गलत होने के कारण उनके अर्थ को समझने में परेशानी हुई। इसके अलावा पुराने वर्षों में पूछे जा चुके सवालों के दोबारा आने की बात भी कही गई।
अंग्रेजी के पेपर में स्पेलिंग और ग्रामर की गलतियां
सबसे ज्यादा चर्चा अंग्रेजी के प्रश्नपत्र को लेकर सामने आई। अभ्यर्थियों का कहना था कि कई सवालों में स्पेलिंग मिस्टेक और ग्रामर से जुड़ी गलतियां थीं। अंग्रेजी विषय की परीक्षा में भाषा ही सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में अगर प्रश्न में ही शब्द या व्याकरण संबंधी गलती हो तो उम्मीदवार के लिए सही विकल्प चुनना मुश्किल हो सकता है।
छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी प्रश्न का वाक्य ही स्पष्ट नहीं है तो उसके आधार पर अभ्यर्थियों की योग्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है। यही कारण है कि परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया।
कई सवालों के रिपीट होने का भी आरोप
तीनों पेपरों को लेकर एक और बड़ी शिकायत पिछले वर्षों के सवालों के दोहराए जाने की रही। अभ्यर्थियों का दावा था कि प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में ऐसे प्रश्न शामिल थे जो पहले की परीक्षाओं में पूछे जा चुके थे।
हालांकि पुराने प्रश्नों की अवधारणा पर आधारित सवालों का दोबारा आना अपने आप में असामान्य नहीं माना जाता, लेकिन अभ्यर्थियों ने जिस तरह बड़ी संख्या में सवालों के रिपीट होने की शिकायत की, उसने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
इसके अलावा कुछ प्रश्नों में प्रिंटिंग और भाषा संबंधी त्रुटियों की शिकायत भी सामने आई। इन सभी शिकायतों को देखते हुए NTA ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की। कमेटी की सिफारिश के बाद ही तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया।
आंसर की जारी होने के बाद ही क्यों लिया गया फैसला?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब परीक्षा के तुरंत बाद अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को लेकर शिकायतें की थीं, तो परीक्षा रद्द करने का फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया?
बताया गया कि NTA ने पहले प्रोविजनल आंसर की जारी की। इसके बाद अभ्यर्थियों को विवादित प्रश्नों और उत्तरों को चुनौती देने का अवसर मिलना था। लेकिन जब शिकायतों की गंभीरता और प्रश्नपत्र की खामियों की समीक्षा की गई तो यह स्पष्ट हुआ कि समस्या केवल एक-दो सवालों तक सीमित नहीं है।
अगर सिर्फ कुछ सवालों में गलती होती तो उन्हें हटाकर या उनके अंक समायोजित करके परिणाम जारी किया जा सकता था। लेकिन जब प्रश्नपत्र के कई हिस्सों में अलग-अलग प्रकार की त्रुटियां सामने आईं, तो निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोबारा परीक्षा कराना ज्यादा उचित माना गया।
अभ्यर्थियों की शिकायतों में क्या-क्या था?
अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को लेकर कई तरह की आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- कई सवालों में स्पेलिंग की गलतियां होने का आरोप।
- अंग्रेजी के प्रश्नों में व्याकरण संबंधी त्रुटियां।
- कुछ सवालों को समझने में भाषा की वजह से परेशानी।
- पिछले वर्षों के प्रश्नों के रिपीट होने की शिकायत।
- प्रश्नपत्र में प्रिंटिंग संबंधी गलतियां।
- कुछ प्रश्नों के शब्दों और वाक्य संरचना को लेकर आपत्ति।
अभ्यर्थियों का कहना था कि ऐसी स्थिति में सभी उम्मीदवारों के लिए समान और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।
अब कब होगी UGC NET की दोबारा परीक्षा?
NTA ने तीनों विषयों के लिए नई परीक्षा तारीखों का ऐलान कर दिया है। इंग्लिश और कॉमर्स विषय की परीक्षा 9 सितंबर को आयोजित की जाएगी। वहीं सोशियोलॉजी का पेपर 10 सितंबर की पहली शिफ्ट में आयोजित होगा।
अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात यह है कि दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा। यानी जिन उम्मीदवारों ने पहले इन विषयों की परीक्षा दी थी, उन्हें दोबारा परीक्षा के लिए फिर से फीस जमा नहीं करनी होगी।
84 विषयों का रिजल्ट अपने तय समय पर
NTA के मुताबिक UGC NET के कुल 87 विषयों में से बाकी 84 विषयों की परीक्षा से संबंधित परिणाम और अन्य प्रक्रियाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेंगी। केवल इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषय के अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होना होगा।
इस फैसले से इन तीन विषयों के उम्मीदवारों के लिए परिणाम में देरी जरूर होगी, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें निष्पक्ष तरीके से अपनी योग्यता साबित करने का एक और मौका मिलेगा।
अब नई परीक्षा में NTA के सामने बड़ी चुनौती
तीनों पेपर रद्द होने के बाद अब NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि दोबारा होने वाली परीक्षा में किसी भी तरह की तकनीकी, प्रिंटिंग या प्रश्नपत्र संबंधी गलती न हो। अभ्यर्थी पहले ही परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में नई परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों की नजर हर छोटी-बड़ी व्यवस्था पर रहेगी।
UGC NET जैसी परीक्षा लाखों उम्मीदवारों के करियर से जुड़ी होती है। इसलिए प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी अंतिम जांच की प्रक्रिया को कितना मजबूत बनाया गया है।
फिलहाल इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के अभ्यर्थियों को 9 और 10 सितंबर की नई परीक्षा तारीखों का इंतजार है। अब उम्मीद यही है कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह त्रुटिरहित और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी, ताकि उम्मीदवारों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन हो सके।
