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संसद से सोशल मीडिया तक छिड़ी सियासी जंग: पप्पू यादव के ‘साधु वेश’ प्रदर्शन पर भड़के शहजाद पूनावाला, राहुल गांधी से पूछे तीखे सवाल

The Hill India News
Last updated: August 1, 2026 4:45 am
The Hill India News
Published: August 1, 2026
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नई दिल्ली। संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु के वेश में किए गए प्रदर्शन ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस प्रदर्शन के बाद जहां विपक्ष इसे धार्मिक आस्था से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बता रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे हिंदू भावनाओं का अपमान और राजनीतिक नाटक करार दिया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों से कई सवाल पूछे हैं।

Contents
क्या था पूरा मामला?शहजाद पूनावाला का तीखा हमलाराहुल गांधी से पूछे कई सवाल‘मुद्दा उठाइए, लेकिन धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल क्यों?’विपक्ष का क्या है पक्ष?सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसशहजाद पूनावाला अपने बायो को लेकर भी रहे चर्चा मेंराजनीतिक माहौल और गरमाने के आसार

यह विवाद अब केवल संसद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेज राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

क्या था पूरा मामला?

शुक्रवार को संसद परिसर में पप्पू यादव साधु का वेश धारण कर पहुंचे। उनका कहना था कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले को देश के सामने लाना जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह सहित विपक्ष के कई नेता मौजूद रहे।

संसद परिसर में हुए इस अनोखे प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद भाजपा नेताओं, संत समाज और कई धार्मिक संगठनों ने इसकी कड़ी आलोचना शुरू कर दी।

शहजाद पूनावाला का तीखा हमला

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए इस प्रदर्शन को “शर्मनाक” और “बेवकूफी भरा” बताया।

उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को उठाना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन किसी विशेष धार्मिक वेशभूषा का इस्तेमाल करके पूरे समाज को निशाना बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

शहजाद ने सवाल उठाया कि यदि विरोध केवल कथित चोरी के खिलाफ था, तो फिर साधु का वेश धारण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

राहुल गांधी से पूछे कई सवाल

शहजाद पूनावाला ने अपने बयान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि यदि भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ कोई प्रदर्शन होगा तो क्या राहुल गांधी टोपी पहनकर उसमें शामिल होंगे?

उन्होंने आगे कहा कि यदि वक्फ संपत्तियों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन किया जाए तो क्या विपक्षी नेता मौलवी का वेश धारण करेंगे?

उनका कहना था कि विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे किसी धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत न हों।

‘मुद्दा उठाइए, लेकिन धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल क्यों?’

शहजाद पूनावाला ने कहा कि यदि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी न तो संत हैं और न ही साधु। ऐसे में विरोध प्रदर्शन को साधु के वेश से जोड़ना उचित नहीं है।

उनके अनुसार किसी विशेष धार्मिक पहचान को प्रतीक बनाकर प्रदर्शन करने से गलत संदेश जाता है और समाज में अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है।

विपक्ष का क्या है पक्ष?

विपक्षी नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक परंपरा का अपमान करना नहीं था, बल्कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।

विपक्ष का दावा है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक प्रदर्शन जनप्रतिनिधियों का अधिकार है तथा जनता से जुड़े मुद्दों को संसद और संसद परिसर में उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

हालांकि भाजपा का आरोप है कि प्रदर्शन की शैली जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाली थी।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने पप्पू यादव के प्रदर्शन को भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया, जबकि कई लोगों ने इसे धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल करार दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक प्रदर्शन अक्सर जनध्यान आकर्षित करने में सफल रहते हैं, लेकिन कई बार यही तरीका विवाद का कारण भी बन जाता है।

शहजाद पूनावाला अपने बायो को लेकर भी रहे चर्चा में

इस विवाद के बीच शहजाद पूनावाला एक अन्य वजह से भी चर्चा में रहे। उन्होंने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से “भाजपा प्रवक्ता” शब्द हटा दिया था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगने लगीं।

हालांकि इस बदलाव को लेकर न तो शहजाद पूनावाला और न ही भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इसलिए इसे लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

राजनीतिक माहौल और गरमाने के आसार

विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में हुए इस प्रदर्शन और उसके बाद भाजपा की प्रतिक्रिया से आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। एक ओर विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बताकर अपने अभियान को आगे बढ़ा सकता है, वहीं भाजपा धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक मर्यादा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगी।

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