नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस बुधवार को नई दिल्ली में I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक के साथ और तेज हो गई। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई विपक्षी दलों की इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव, SIR की प्रक्रिया और मतदान व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की साझा रणनीति तय करना था। बैठक से पहले ही विपक्षी दलों की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग सामने आ चुकी थी।
खड़गे ने उठाए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
बैठक के शुरुआती संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भविष्य के चुनावों में प्री-SIR मतदाता सूची के इस्तेमाल की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने चुनावों में EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की वकालत की।
खड़गे ने कहा कि मतदाता सूची के प्रत्येक पुनरीक्षण में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित जानकारी निर्वाचन क्षेत्र और बूथ स्तर तक सार्वजनिक की जानी चाहिए।
खड़गे ने विपक्षी दलों से संयुक्त एक्शन प्लान के साथ आगे बढ़ने की अपील भी की। उनके अनुसार, मतदाता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों को साझा रणनीति बनानी चाहिए।
विपक्ष की 6 प्रमुख मांगें क्या हैं?
बैठक में खड़गे की ओर से जिन मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई, उनमें मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया से जुड़े छह प्रमुख बिंदु शामिल हैं।
1. प्री-SIR मतदाता सूची का इस्तेमाल
विपक्षी दलों की मांग है कि आगामी चुनावों के लिए SIR से पहले मौजूद मतदाता सूची को आधार बनाया जाए। साथ ही प्रत्येक चुनावी रोल रिवीजन में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
2. नाम हटाने से पहले उचित नोटिस
खड़गे ने कहा कि किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे उचित नोटिस दिया जाना चाहिए। नाम हटाने का कारण स्पष्ट हो और संबंधित व्यक्ति के पास प्रभावी अपील का अवसर भी होना चाहिए।
3. दस्तावेजों और प्रशासनिक गलतियों से प्रभावित न हों पात्र मतदाता
विपक्ष का कहना है कि केवल प्रशासनिक त्रुटियों, दस्तावेजों की कमी या जानकारी उपलब्ध न होने के कारण पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
4. EVM की जगह बैलेट पेपर
बैठक में मतदान के लिए EVM के बजाय बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी उठाई गई। यह मांग विपक्षी दल पहले भी विभिन्न मौकों पर उठाते रहे हैं। हालांकि वर्तमान भारतीय चुनाव व्यवस्था में EVM का इस्तेमाल चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है।
5. पहली बार वोट देने वालों के लिए आसान पंजीकरण
खड़गे ने युवा नागरिकों और विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की।
6. चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही
छठे बिंदु में चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही और ऐसी चुनावी संस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया जिस पर राजनीतिक दलों का विश्वास बना रहे।
ये मांगें विपक्ष की बैठक में चर्चा के प्रमुख मुद्दों में रहीं और इन्हीं के आधार पर आगे की राजनीतिक गतिविधियों की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों तेज हुई?
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध हाल के दिनों में और मुखर हुआ है। यह विवाद मुख्य रूप से SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर निर्णयों को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद बढ़ा है।
The Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में SIR से संबंधित आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
इसके बाद कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपनी राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी।
हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और मांगों को उनके संबंधित दलों के रुख के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए गए सवालों पर आयोग का आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज अंतिम तथ्यात्मक स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
खड़गे का मोदी और शाह पर आरोप
बैठक के बाद खड़गे ने चुनाव आयोग को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर चुनाव आयोग को प्रभावित करने का आरोप लगाया और आयोग के अधिकारियों को लेकर कड़ी टिप्पणी की।
यह आरोप कांग्रेस अध्यक्ष का राजनीतिक बयान है। इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जुड़े पक्षों ने विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। बीजेपी नेताओं ने इसके उलट कांग्रेस पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया है।
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर असहमति की चर्चा
SIR को लेकर विवाद केवल विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा है। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्टों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है।
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के 26 सितंबर के पूर्ण आयोग बैठक के बाद जारी चार पन्नों के नोट में नौ निर्णयों का उल्लेख किया गया, जिनमें संधू और जोशी की ओर से उठाई गई कुछ चिंताओं को संबोधित किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ सवालों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई।
यही वजह है कि विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को और मजबूती से उठा रहे हैं।
AAP ने खुद को I.N.D.I.A. ब्लॉक से अलग बताया
इस बैठक के बीच आम आदमी पार्टी का रुख भी महत्वपूर्ण रहा। AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी अब I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं है और इसलिए बैठक में शामिल होने का सवाल नहीं है।
संजय सिंह के अनुसार, AAP ने जुलाई 2025 में विपक्षी गठबंधन से बाहर होने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि I.N.D.I.A. ब्लॉक का गठन विशेष रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए हुआ था।
हालांकि, AAP ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के समर्थन की बात कही है। संजय सिंह ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की अलग राजनीतिक लड़ाई जारी रखने की बात कही।
इससे साफ है कि चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच कुछ साझा चिंताएं हैं, लेकिन गठबंधन की संरचना और आगे की रणनीति को लेकर सभी दलों की स्थिति एक जैसी नहीं है।
जयराम रमेश ने जारी की शामिल दलों की सूची
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बैठक में शामिल होने वाले दलों की सूची भी साझा की। इसमें कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, NCP-SP, शिवसेना-UBT, RJD, CPI(M), CPI, जम्मू-कश्मीर से जुड़े दलों, JMM, CPI-ML, IUML, MDMK, VCK और अन्य विपक्षी दलों के नाम शामिल बताए गए।
बैठक का उद्देश्य अलग-अलग विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर लाकर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रणनीति तैयार करना था।
BJP ने विपक्षी बैठक पर किया पलटवार
वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं ने I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के अभियान पर सवाल उठाए।
बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने I.N.D.I.A. गठबंधन की राजनीतिक प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए बैठक को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गठबंधन के पास स्पष्ट संगठनात्मक ढांचा नहीं है और अलग-अलग दलों के बीच मतभेद हैं।
बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया है कि विपक्ष चुनावी हार या राजनीतिक असफलताओं के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहा है। बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने भी कांग्रेस के चुनाव आयोग पर हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्था को राजनीतिक विवाद का विषय बनाया जा रहा है।
इस तरह SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष तथा सत्तारूढ़ बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
आगे क्या होगा?
I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक के बाद विपक्षी दलों की रणनीति अब केवल संसद तक सीमित रहने के बजाय सार्वजनिक कार्यक्रमों और संयुक्त आंदोलनों तक जाने की संभावना पर केंद्रित है। कांग्रेस ने पहले ही राज्य, जिला और बूथ स्तर तक अभियान चलाने की बात कही है।
बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन की ओर से संयुक्त कार्यक्रम और रैलियां आयोजित करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई है। Indian Express के मुताबिक, विपक्ष ने 1 नवंबर को संयुक्त रैली की घोषणा की है।
कुल मिलाकर, SIR, मतदाता सूची की पारदर्शिता, CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका, EVM बनाम बैलेट और चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही अब राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने हैं। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर संयुक्त राजनीतिक अभियान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रणनीति बताते हुए चुनाव आयोग का बचाव कर रही है।
आने वाले दिनों में इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव संसद, चुनाव आयोग की ओर से होने वाली कार्रवाई और विपक्ष के प्रस्तावित आंदोलनों के रूप में सामने आ सकता है। इस पूरे मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों के दावों के साथ-साथ चुनाव आयोग के आधिकारिक निर्णयों, कानूनी प्रक्रियाओं और उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड को देखना महत्वपूर्ण होगा।
