देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि जब कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, तो आखिर JEE जैसी बड़ी परीक्षा में अब तक पेपर लीक की बड़ी घटना क्यों नहीं हुई? IIT मद्रास के डायरेक्टर और परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के सदस्य वी. कामाकोटी ने इसके पीछे की पूरी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि JEE परीक्षा को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए वर्षों में कई स्तरों पर बदलाव किए गए हैं। परीक्षा प्रणाली को पेन-पेपर मॉडल से लेकर आधुनिक कंप्यूटर आधारित टेस्ट तक पहुंचाने में तकनीक और कड़े सुरक्षा उपायों की अहम भूमिका रही है।
5 हजार उम्मीदवारों से 15 लाख तक का सफर, फिर भी नहीं टूटा भरोसा
IIT मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी ने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 1985 में JEE परीक्षा दी थी, तब इसमें करीब 5 हजार उम्मीदवार शामिल होते थे। लेकिन आज यह संख्या बढ़कर लगभग 15 लाख तक पहुंच चुकी है।
इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा आयोजित करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा में एक छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में JEE को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार नई तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाया गया।
कामाकोटी के अनुसार, परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी और पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करना आसान काम नहीं था। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को समय के साथ लगातार मजबूत किया गया।
पेन-पेपर से ऑप्टिकल सेंसर और कंप्यूटर टेस्ट तक बदली व्यवस्था
वी. कामाकोटी ने बताया कि JEE परीक्षा प्रणाली ने कई चरणों में बदलाव देखा है। शुरुआत में परीक्षा पूरी तरह पेन-पेपर आधारित होती थी। इसके बाद सब्जेक्टिव पेपर, ऑप्टिकल सेंसर आधारित जांच प्रणाली और उत्तर पुस्तिकाओं की पहचान जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शुरू हुआ।
धीरे-धीरे परीक्षा व्यवस्था इमेज प्रोसेसिंग और फिर कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग तक पहुंची। इन बदलावों का उद्देश्य परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को कम करना था।
उन्होंने बताया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा भी मजबूत की गई। आज के दौर में जब मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और इंटरनेट के जरिए धोखाधड़ी की संभावनाएं बढ़ गई हैं, ऐसे में परीक्षा केंद्रों पर विशेष निगरानी जरूरी हो गई है।
डिवाइस रोकने के लिए अपनाई गईं हाईटेक तकनीकें
कामाकोटी ने बताया कि लाखों उम्मीदवारों वाली परीक्षा में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि कोई भी छात्र परीक्षा केंद्र में प्रतिबंधित उपकरण न ले जा सके।
इसके लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें उम्मीदवारों की पहचान की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल की कोशिश की जा सकती है, तब परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाना जरूरी है। इसी वजह से JEE में कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
NEET पेपर लीक पर बोले- भरोसे की कड़ी टूटना सबसे बड़ी वजह
नीट पेपर लीक मामले पर बात करते हुए कामाकोटी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा के कई उपाय लागू किए गए थे, लेकिन एक जगह भरोसे की कड़ी टूट गई।
उन्होंने बताया कि परीक्षा सुधार के लिए बनाई गई कमेटियों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। राधाकृष्णन कमेटी ने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 250 से ज्यादा सुझाव दिए थे।
कामाकोटी के अनुसार, इस बार NEET परीक्षा में कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे। पेपर की छपाई से लेकर उसके पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई थी।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर लीक परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में नहीं, बल्कि उससे पहले हुआ। यानी परीक्षा प्रणाली में जिस भरोसे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वहीं पर कमजोरी सामने आई।
2024 की गलतियों से सीखने की जरूरत
कामाकोटी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ तकनीक ही काफी नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुरक्षा केवल मशीनों या तकनीक से नहीं आती, बल्कि उसमें शामिल लोगों की ईमानदारी और निगरानी व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
उनका मानना है कि अगर परीक्षा सुधार कमेटियों की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाए और सुरक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार किया जाए तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
JEE मॉडल से दूसरी परीक्षाओं को मिल सकता है रास्ता
IIT निदेशक वी. कामाकोटी ने संकेत दिया कि JEE की परीक्षा व्यवस्था से दूसरी प्रतियोगी परीक्षाएं भी सीख ले सकती हैं। लाखों छात्रों वाली परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए तकनीक, निगरानी और मजबूत प्रक्रिया का इस्तेमाल जरूरी है।
JEE में अपनाए गए सुरक्षा उपायों में उम्मीदवारों की पहचान से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी तक कई स्तर शामिल हैं। यही कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने के बावजूद परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना हुआ है।
परीक्षा सुधार की राह में तकनीक और पारदर्शिता सबसे जरूरी
प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के करियर का फैसला करती हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं।
JEE की व्यवस्था यह दिखाती है कि मजबूत योजना, आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी के जरिए बड़ी परीक्षाओं को सुरक्षित बनाया जा सकता है। वहीं, NEET जैसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में एक छोटी सी कमजोरी भी पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती है।
अब परीक्षा सुधार का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि छात्रों का भरोसा बना रहे और हर उम्मीदवार को अपनी मेहनत के आधार पर सफलता हासिल करने का समान अवसर मिले।
