ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का जैवलिन थ्रो फाइनल खेल प्रेमियों के लिए लंबे समय तक याद रखा जाने वाला मुकाबला बन गया। जहां करोड़ों भारतीयों की निगाहें ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा पर थीं, वहीं श्रीलंका के युवा एथलीट रुमेश थरंगा पथिराज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंका दिया। पूर्व तेज गेंदबाज रहे पथिराज ने 89.75 मीटर का दमदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा को 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत के ही यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
वहीं पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और गत चैंपियन अरशद नदीम उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और वे 9वें स्थान पर रहकर टॉप-8 में भी जगह नहीं बना पाए।
पूर्व क्रिकेटर ने जैवलिन में रचा नया इतिहास
इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण श्रीलंका के 23 वर्षीय रुमेश थरंगा पथिराज रहे। बहुत कम लोग जानते हैं कि एथलेटिक्स में आने से पहले वह एक प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज थे। क्रिकेट के दौरान उनकी गेंद की रफ्तार लगभग 134 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचती थी। बाद में उन्होंने जैवलिन थ्रो को अपना करियर बनाया और अब उन्होंने अपने देश को कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिला दिया।
उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि श्रीलंका के एथलेटिक्स इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बन गई है। उनकी जीत के साथ ही वे 2006 मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर चिंथाना विदानागे के बाद कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले श्रीलंकाई एथलीट बन गए।
पांच प्रयास असफल, एक थ्रो ने बदल दी किस्मत
ग्लासगो की ठंडी और तेज हवा वाले माहौल में आयोजित इस फाइनल मुकाबले में पथिराज ने अपने शुरुआती पांच प्रयासों में केवल एक वैध थ्रो किया। लेकिन यही एक थ्रो उनके लिए इतिहास लिख गया।
उनका 89.75 मीटर का थ्रो इतना शानदार था कि कोई भी प्रतिद्वंद्वी उसे पार नहीं कर सका। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि दबाव की स्थिति में ऐसा प्रदर्शन किसी बड़े चैंपियन की पहचान होता है।
यह केवल एक दूरी नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम था।
नीरज चोपड़ा ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन गोल्ड से चूके
भारत के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 85.83 मीटर का अपना इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और आखिरी तक स्वर्ण पदक की दौड़ में बने रहे।
हालांकि, पथिराज के 89.75 मीटर के थ्रो को पार करना उनके लिए संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद नीरज का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने भारत के लिए रजत पदक सुनिश्चित किया।
नीरज का यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि वे दुनिया के सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले जैवलिन थ्रो खिलाड़ियों में शामिल हैं।
भारत को मिला दूसरा मेडल, यश वीर सिंह ने जीता कांस्य
भारतीय दल के लिए सबसे सुखद पहलुओं में से एक रहा यश वीर सिंह का प्रदर्शन। उन्होंने 85.41 मीटर का अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और कांस्य पदक जीत लिया।
भारत के दो खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारतीय जैवलिन थ्रो लगातार मजबूत हो रहा है और देश के पास भविष्य के लिए कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।
अरशद नदीम का खराब दिन
पाकिस्तान के स्टार खिलाड़ी और पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता अरशद नदीम इस बार बिल्कुल भी लय में नजर नहीं आए।
उनका पहला प्रयास फाउल रहा, जबकि दूसरे प्रयास में उन्होंने केवल 77.41 मीटर का थ्रो किया। इसके बाद भी वे लय हासिल नहीं कर सके और अंततः 9वें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए।
कॉमनवेल्थ गेम्स में पाकिस्तान की सबसे बड़ी पदक उम्मीद अरशद नदीम ही थे, लेकिन उनका निराशाजनक प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
विश्व जैवलिन में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
इस फाइनल ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब विश्व जैवलिन थ्रो में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक कठिन हो चुकी है।
कुछ वर्ष पहले तक मुकाबला मुख्य रूप से नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम के बीच माना जाता था, लेकिन अब श्रीलंका, यूरोप और अन्य देशों के युवा खिलाड़ी भी तेजी से उभर रहे हैं।
रुमेश थरंगा पथिराज की जीत इस बात का संकेत है कि अब कोई भी खिलाड़ी बड़े मंच पर चौंकाने वाला प्रदर्शन कर सकता है।
जीत के बाद भावुक हुए पथिराज
स्वर्ण पदक जीतने के बाद पथिराज ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि श्रीलंका के लिए जैवलिन में पहला स्वर्ण पदक जीतना उनके जीवन का सबसे बड़ा पल है।
उन्होंने कहा,
“मैं बेहद खुश हूं कि मैंने अपने देश के लिए इतिहास रचा। जब पोडियम पर श्रीलंका का राष्ट्रगान बजा तो वह पल मेरे जीवन का सबसे भावुक क्षण था। यह स्वर्ण पदक मेरे देश और मेरे परिवार को समर्पित है।”
उनके इस बयान ने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।
भारत के लिए सकारात्मक संकेत
हालांकि नीरज चोपड़ा स्वर्ण पदक नहीं जीत सके, लेकिन भारत के लिए यह प्रतियोगिता कई मायनों में सफल रही। एक ओर नीरज ने रजत पदक जीता, वहीं यश वीर सिंह ने कांस्य पदक हासिल कर भारतीय एथलेटिक्स की गहराई और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत के पास एक नहीं बल्कि कई ऐसे खिलाड़ी होंगे जो विश्व स्तर पर पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।
