
देहरादून/नई दिल्ली: भौगोलिक रूप से बेहद कठिन और संवेदनशील माने जाने वाले हिमालयी राज्य उत्तराखंड के लिए बीता एक दशक से अधिक का समय बुनियादी ढांचे के कायाकल्प का ‘स्वर्णिम काल’ साबित हुआ है। देश की सत्ता कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में आने के बाद, विगत 12 वर्षों के दौरान उत्तराखंड ने सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में वह अभूतपूर्व विस्तार देखा है, जिसकी कल्पना कुछ दशक पहले तक लगभग असंभव मानी जाती थी।
राष्ट्रीय स्तर के नीतिगत रणनीतिकारों का मानना है कि इस बुनियादी विकास की रफ्तार को राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के युवा नेतृत्व ने ‘डबल इंजन’ की ताकत देकर और तेज कर दिया है। आज उत्तराखंड केवल तीर्थाटन का केंद्र नहीं, बल्कि देश के सबसे तेजी से सुगम हो रहे राज्यों की सूची में अग्रणी बनकर उभर रहा है। आइए विस्तार से विश्लेषण करते हैं कि इस PM Modi Era Uttarakhand Infrastructure Development ने राज्य की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ को कैसे मजबूत किया है।
सड़क परिवहन का कायाकल्प: चारधाम ऑल वेदर रोड से दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर तक
उत्तराखंड के विकास में सबसे पहला और दृश्यमान बदलाव उसकी सड़कों के नेटवर्क में आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2016 में जिस ‘चारधाम सड़क परियोजना’ का शिलान्यास किया था, वह आज लगभग पूर्णता की ओर है।
1. चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना
करीब ₹12,000 करोड़ की लागत वाली इस विशाल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना का 90 प्रतिशत से अधिक कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ है कि यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे दुर्गम धामों सहित संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्रों में सालभर आवाजाही सुगम और सुरक्षित हो गई है। भूस्खलन जैसी आपदाओं के समय भी अब रास्ते हफ्तों बंद नहीं रहते।
2. दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: अकल्पनीय सफर
केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड को मिला सबसे बड़ा और आधुनिक उपहार ‘दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ है। ₹11,963 करोड़ की लागत से तैयार हुए इस 210 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के पूरी तरह शुरू होने से देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच का सफर महज ढाई घंटे के अकल्पनीय समय में सिमट गया है। इसने न केवल पर्यटन को पंख लगाए हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति दी है।
इसके साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से वर्तमान में:
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सितारगंज–टनकपुर
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पौंटा साहिब–देहरादून
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भानियावाला–ऋषिकेश
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काठगोदाम–लालकुआं–हल्द्वानी बाईपास
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और रुद्रपुर बाईपास जैसी अरबों रुपये की अन्य महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है।
हवाई सेवाओं का लोकतांत्रिकरण: आम आदमी के सपनों को मिले पंख
“हवाई चप्पल पहनने वाला नागरिक भी हवाई जहाज की यात्रा करे”—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विजन को उत्तराखंड ने जमीनी स्तर पर सच होते देखा है। बीते 12 वर्षों के भीतर राज्य के भीतर और अंतरराज्यीय हवाई संपर्कों का जाल बिछाया गया है।
एयरपोर्ट्स का आधुनिकीकरण
केंद्र सरकार के विशेष सहयोग से राज्य के तीन प्रमुख हवाई अड्डों—देहरादून का जॉलीग्रांट, पंतनगर और सामरिक रूप से संवेदनशील पिथौरागढ़ एयरपोर्ट का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विस्तार किया जा चुका है। आज देहरादून एयरपोर्ट से देश के प्रमुख महानगरों जैसे अहमदाबाद, भुवनेश्वर, बैंगलोर, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, पुणे और कुल्लू के लिए नियमित व सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं, जिससे उत्तराखंड वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सीधे जुड़ गया है।
हेलीकॉप्टर सेवाओं का जाल और ‘उड़न खटोला’
क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ (UDAN) के तहत राज्य भर में 18 रणनीतिक हेलीपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 हेलीपोर्ट्स पर व्यावसायिक सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ हो चुकी हैं। इस व्यवस्था को और अधिक सुदूर क्षेत्रों तक ले जाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री उड़न खटोला योजना’ संचालित कर रही है। इस अभिनव योजना के तहत देहरादून और हल्द्वानी को केंद्र बनाकर राज्य के सुदूर पर्वतीय जिलों के लिए किफायती दरों पर हेली सेवा प्रदान की जा रही है, जो आपातकालीन चिकित्सा और स्थानीय परिवहन के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।
इतिहास रचने के करीब भारतीय रेल: पहाड़ की छाती चीरकर बढ़ रही ट्रेन
उत्तराखंड के इतिहास में जो काम आजादी के बाद के कई दशकों में असंभव माना जाता था, वह इस PM Modi Era Uttarakhand Infrastructure Development के दौर में धरातल पर उतर रहा है। भारतीय रेलवे का नेटवर्क अब केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों की ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: 72% काम पूरा
पहाड़ में रेल पहुंचाने के इस ऐतिहासिक विजन के तहत 125 किलोमीटर लंबी ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन’ का 72 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। सुरंगों और ऊंचे पुलों के नेटवर्क से सजी यह रेललाइन उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सामरिक सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल देगी।
नए रेल मार्गों का सर्वे और स्टेशनों का पुनर्विकास
मुख्यमंत्री धामी की सक्रिय पैरवी और केंद्र के त्वरित निर्णय के चलते अब टनकपुर–बागेश्वर और डोईवाला से लेकर सीधे गंगोत्री-यमुनोत्री तक नई रेललाइनों के अंतिम सर्वे को मंजूरी मिल चुकी है। इसके समानांतर, रेलवे स्टेशनों को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए चल रही ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के अंतर्गत उत्तराखंड के 11 रेलवे स्टेशनों को अत्याधुनिक और उनकी सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप नया स्वरूप दिया जा रहा है।
‘डबल इंजन’ सरकार का दृष्टिकोण: स्वर्णिम भविष्य की नींव
इस ऐतिहासिक विकास यात्रा पर अपने विचार साझा करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:
मुख्यमंत्री का आधिकारिक वक्तव्य: “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह कार्यकाल उत्तराखंड के समग्र विकास के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। विगत 12 वर्षों में उत्तराखंड में हर तरह की कनेक्टिविटी (सड़क, रेल, हवाई) इतनी मजबूत हुई है कि अब प्रदेश के किसी भी हिस्से से देश के बड़े शहरों तक चंद घंटों में पहुंचना संभव हो चुका है। हमारी सरकार प्रदेश में अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यातायात के हर संभव और पर्यावरण-अनुकूल साधनों को विकसित करने के लिए निरंतर संकल्पित है।”
राष्ट्रीय मीडिया के चश्मे से देखें तो उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे का यह तीव्र विकास केवल यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। यह चीन सीमा से लगे इस रणनीतिक राज्य की सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती देता है, पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन (Migration) को रोकने में मदद करता है और स्थानीय युवाओं के लिए होमस्टे, लॉजिस्टिक्स व पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा कर रहा है। ‘कनेक्टिविटी की यह महाक्रांति’ निश्चित रूप से आने वाले दशकों में उत्तराखंड को आत्मनिर्भर और देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।



