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Reading: UPI Payment पर बड़ा अपडेट! 15 अक्टूबर से बदलेंगे नियम, लेकिन हर पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज; ₹2,000 तक UPI फ्री, जानिए पेट्रोल, बीमा, रेलवे, म्यूचुअल फंड और बड़े पेमेंट पर क्या होगा असर
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The Hill India > Blog > देश > UPI Payment पर बड़ा अपडेट! 15 अक्टूबर से बदलेंगे नियम, लेकिन हर पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज; ₹2,000 तक UPI फ्री, जानिए पेट्रोल, बीमा, रेलवे, म्यूचुअल फंड और बड़े पेमेंट पर क्या होगा असर
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UPI Payment पर बड़ा अपडेट! 15 अक्टूबर से बदलेंगे नियम, लेकिन हर पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज; ₹2,000 तक UPI फ्री, जानिए पेट्रोल, बीमा, रेलवे, म्यूचुअल फंड और बड़े पेमेंट पर क्या होगा असर

The Hill India News
Last updated: September 16, 2026 5:51 am
The Hill India News
Published: September 16, 2026
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UPI MDR Charge 2026: अगर आप रोजाना चाय, सब्जी, किराना, दवा, रेस्टोरेंट, कैब या किसी दुकान पर QR कोड स्कैन करके भुगतान करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। UPI को लेकर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ऐसी खबरें चल रही थीं कि ₹2,000 से अधिक का भुगतान करते ही ग्राहक की जेब से पैसा कटने लगेगा। लेकिन तस्वीर इससे अलग है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया Merchant Discount Rate यानी MDR ग्राहक पर लगाया जाने वाला कोई टैक्स या सीधे वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है।

वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया है कि UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान किसी भी राशि का हो, वह मुफ्त रहेगा। इसी तरह ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था में आने वाले छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति-से-व्यापारी UPI लेन-देन इस बदलाव से अप्रभावित रहेंगे।

यानी अगर आप दोस्त को ₹10,000 भेजते हैं, परिवार के सदस्य को ₹25,000 भेजते हैं या अपने एक बैंक खाते से दूसरे खाते में UPI के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करते हैं, तो इस MDR व्यवस्था के कारण आपसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं रोजमर्रा की छोटी खरीदारी में भी आम ग्राहक के लिए कोई नया UPI चार्ज लागू नहीं किया गया है।

लेकिन दूसरी तरफ बड़े व्यापारी भुगतान को लेकर नया ढांचा जरूर सामने आया है। निर्धारित ₹2,000 से अधिक के P2M भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ऐसे लेन-देन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन तक सीमित रहेगा। जरूरी और कम मार्जिन वाले कुछ क्षेत्रों के लिए अलग फ्लैट MDR रखा गया है, जबकि म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े योग्य पूंजी बाजार भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत की दर बताई गई है।

इसलिए “15 अक्टूबर से UPI खत्म”, “हर UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत कटेगा” या “₹2,000 से ज्यादा भेजते ही ग्राहक के खाते से चार्ज कट जाएगा” जैसी सामान्यीकृत बातें सही तस्वीर नहीं बतातीं। असल बदलाव भुगतान की श्रेणी और व्यापारी की कैटेगरी पर निर्भर करेगा।

सबसे पहले समझिए MDR आखिर है क्या?

MDR का पूरा नाम Merchant Discount Rate यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। आसान भाषा में समझें तो यह डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से जुड़ा भुगतान-इकोसिस्टम शुल्क है। यह ग्राहक से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है।

UPI के मामले में भुगतान पूरा होने के पीछे कई स्तर काम करते हैं। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI एप्लिकेशन से जुड़े अन्य भुगतान इकोसिस्टम प्रतिभागी इस व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। सरकार ने साफ किया है कि MDR को भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा और इसका उद्देश्य UPI व्यवस्था के संचालन तथा उसके विस्तार में सहयोग करना है।

इसका मतलब यह है कि यदि किसी निर्धारित श्रेणी के व्यापारी पर MDR लागू होता है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक के UPI ऐप से उसी अनुपात में अतिरिक्त पैसा कट जाएगा।

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहक पर न डालें। UPI ऐप प्रदाताओं को ग्राहक से प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।


₹2,000 तक का UPI भुगतान रहेगा मुफ्त

नए ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ₹2,000 तक के P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।

मान लीजिए आपने किसी दुकान से ₹850 का सामान खरीदा और QR कोड स्कैन करके भुगतान किया। इस भुगतान पर ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा।

इसी तरह ₹1,200 की दवा, ₹1,500 का किराना, ₹900 का रेस्टोरेंट बिल या ₹2,000 तक की अन्य योग्य दुकानदारी का भुगतान करने पर ग्राहक के लिए नया MDR शुल्क नहीं होगा।

इससे रोजाना होने वाले छोटे डिजिटल भुगतान पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यही वजह है कि छोटे मूल्य वाले भुगतान करने वाले करोड़ों UPI उपयोगकर्ताओं के लिए रोजमर्रा की भुगतान प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देगा।


दोस्त या रिश्तेदार को ₹1 लाख भेजेंगे तो भी MDR नहीं

यह बात विशेष रूप से समझना जरूरी है।

P2P यानी Person-to-Person भुगतान नए MDR ढांचे से बाहर रहेगा।

यदि आपने अपने दोस्त को ₹5,000 भेजे, परिवार के किसी सदस्य को ₹20,000 भेजे या किसी व्यक्ति को ₹1 लाख की राशि UPI से भेजी, तो केवल राशि बड़ी होने के कारण MDR नहीं लगेगा।

सरकार के मुताबिक सभी P2P UPI लेन-देन राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेंगे।

यानी:

₹500 P2P — मुफ्त

₹5,000 P2P — मुफ्त

₹50,000 P2P — मुफ्त

₹1 लाख P2P — MDR नहीं

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति हर समय कितनी भी राशि भेज सकता है। बैंक और NPCI द्वारा निर्धारित दैनिक लेन-देन सीमाएं अलग विषय हैं। ये सीमाएं सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी होती हैं, MDR से नहीं।


अपने एक बैंक खाते से दूसरे खाते में पैसे भेजने पर क्या होगा?

अगर आप अपने ही बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजते हैं, तो केवल इस MDR नियम के कारण कोई शुल्क नहीं लगेगा।

उदाहरण के लिए आपके पास बैंक A और बैंक B में खाते हैं। आपने बैंक A से बैंक B में ₹30,000 UPI के माध्यम से ट्रांसफर किए। यह P2P/व्यक्ति-आधारित भुगतान की श्रेणी में आता है और MDR व्यवस्था के तहत ग्राहक से कोई चार्ज नहीं लिया जाना है।


अब बात ₹2,000 से ज्यादा के बड़े मर्चेंट पेमेंट की

यहीं से नया बदलाव शुरू होता है।

निर्धारित सामान्य P2M लेन-देन में यदि भुगतान ₹2,000 से अधिक है, तो 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

उदाहरण के लिए:

₹3,000 का भुगतान → 0.4% = ₹12

₹5,000 का भुगतान → ₹20

₹10,000 का भुगतान → ₹40

₹25,000 का भुगतान → ₹100

₹50,000 का भुगतान → ₹200

₹75,000 का भुगतान → ₹300

लेकिन यहां सबसे जरूरी बात फिर से समझ लें—यह MDR ग्राहक से सीधे वसूलने वाला शुल्क नहीं है।

यह निर्धारित व्यापारी भुगतान के भुगतान-इकोसिस्टम में लागू होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक से UPI उपयोग के लिए अलग शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।


₹75,000 के बाद चार्ज ₹300 पर रुक जाएगा

नए ढांचे में एक कैप भी रखी गई है।

यदि सामान्य श्रेणी में कोई योग्य व्यापारी भुगतान ₹75,000 या उससे अधिक है, तो MDR अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन रहेगा।

उदाहरण:

₹75,000 × 0.4% = ₹300

लेकिन यदि भुगतान ₹1 लाख है तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹400 बनता, फिर भी निर्धारित कैप के कारण MDR ₹300 से अधिक नहीं होगा।

₹2 लाख पर भी कैप ₹300 रहेगी।

इस तरह बड़ी राशि वाले योग्य व्यापारी भुगतान में MDR की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है।


क्या चाय-पान और सब्जी खरीदने वालों को डरने की जरूरत है?

रोजमर्रा के छोटे भुगतान के संदर्भ में नई व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि छोटे व्यापारी और छोटे भुगतान सुरक्षित रहें।

सरकार ने छोटे व्यापारियों के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी रखी है। P2PM श्रेणी में आने वाले ऐसे छोटे व्यापारी जो UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करते हैं, उनके लेन-देन पर zero MDR की व्यवस्था बनी रहेगी।

इसमें सड़क किनारे सामान बेचने वाले, छोटे दुकानदार और स्थानीय स्तर के कई छोटे व्यवसाय शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित श्रेणी और पात्रता में आते हों।

इसलिए केवल यह देखकर कि किसी दुकान पर QR कोड लगा है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उस दुकानदार पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा।

व्यापारी की श्रेणी और UPI व्यवस्था में उसका वर्गीकरण महत्वपूर्ण होगा।


पेट्रोल पंप पर ₹2,000 से अधिक के भुगतान का क्या होगा?

पेट्रोलियम/ईंधन क्षेत्र को सामान्य व्यापारी श्रेणी से अलग रखा गया है।

सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक एवं कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के योग्य भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी योग्य ईंधन भुगतान की राशि ₹3,000 है, तो सामान्य 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹12 नहीं, बल्कि निर्धारित विशेष श्रेणी के अनुसार ₹5 का फ्लैट MDR होगा।

₹10,000 के योग्य भुगतान पर भी यह फ्लैट MDR ₹5 होगा।

₹20,000 के योग्य भुगतान पर भी ₹5।

यह व्यवस्था आवश्यक सेवाओं और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में लागत को निश्चित रखने के उद्देश्य से बनाई गई है।


बीमा प्रीमियम पर क्या बदलेगा?

बीमा क्षेत्र भी विशेष श्रेणी में रखा गया है।

₹2,000 से अधिक के योग्य बीमा भुगतान पर सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

इसका मतलब यह नहीं कि बीमा पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहक के खाते से ₹5 अतिरिक्त काट लिया जाएगा। MDR भुगतान-इकोसिस्टम और व्यापारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है।

ग्राहक के लिए UPI भुगतान पर अलग से MDR वसूलने की अनुमति नहीं है।


रेलवे टिकट और टेलीकॉम भुगतान पर भी विशेष नियम

रेलवे और दूरसंचार को भी आवश्यक/कम मार्जिन वाले क्षेत्रों की सूची में शामिल किया गया है।

₹2,000 से ऊपर के योग्य भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा।

इसका असर ग्राहक के UPI ऐप में किसी अतिरिक्त ग्राहक शुल्क के रूप में नहीं होना चाहिए।

यानी रेलवे टिकट या टेलीकॉम बिल का भुगतान करते समय यह समझना जरूरी है कि MDR का अर्थ ग्राहक से अतिरिक्त UPI फीस लेना नहीं है।


कृषि इनपुट खरीदने वालों के लिए क्या नियम है?

कृषि इनपुट को भी विशेष श्रेणी में शामिल किया गया है।

बीज, खाद, कीटनाशक और खेती से जुड़े अन्य योग्य इनपुट की खरीद में लागू मर्चेंट श्रेणी के अनुसार ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर सामान्य 0.4 प्रतिशत के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR लागू हो सकता है।

हालांकि हर भुगतान को केवल वस्तु के नाम से विशेष श्रेणी में मान लेना सही नहीं होगा। भुगतान की अंतिम श्रेणी व्यापारी के वर्गीकरण और संबंधित भुगतान व्यवस्था के आधार पर तय होगी।


बिजली, पानी और गैस बिल पर क्या होगा?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई लोग मान रहे हैं कि सभी जरूरी सेवाओं के बिलों पर ₹5 का फ्लैट MDR होगा।

लेकिन आधिकारिक स्पष्टीकरण में विशेष रूप से रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट का उल्लेख किया गया है।

इसलिए बिजली, पानी, गैस या शिक्षा जैसे सभी भुगतान को स्वतः ₹5 वाली श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा।

किसी विशेष बिलर की भुगतान श्रेणी और लागू व्यवस्था संबंधित बैंक, बिलर या भुगतान सेवा प्रदाता से देखना जरूरी होगा।


स्कूल-कॉलेज की फीस पर क्या होगा?

₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं है।

लेकिन ₹2,000 से अधिक की शिक्षा फीस को केवल “जरूरी सेवा” मानकर अपने-आप ₹5 वाली श्रेणी में रखना सही नहीं होगा, क्योंकि आधिकारिक सूची में इस विशेष फ्लैट MDR के लिए रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट का उल्लेख किया गया है।

इसलिए बड़ी फीस का भुगतान करने से पहले संबंधित संस्था के भुगतान पेज पर उपलब्ध जानकारी देखना उचित रहेगा।


म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने पर कितना MDR?

निवेशकों के लिए भी नए ढांचे में अलग व्यवस्था है।

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े योग्य भुगतान पर MDR 0.02 प्रतिशत रखा गया है और प्रति लेन-देन अधिकतम सीमा ₹300 है।

उदाहरण के तौर पर:

₹10,000 → ₹2

₹50,000 → ₹10

₹1 लाख → ₹20

₹5 लाख → 0.02 प्रतिशत के हिसाब से ₹100

और अधिक बड़ी राशि पर निर्धारित ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी।

यह सामान्य व्यापारी भुगतान वाले 0.4 प्रतिशत MDR से काफी कम दर है।


क्या शेयर बाजार में निवेश करने पर ग्राहक से MDR कटेगा?

फिर वही महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। यह व्यापारी भुगतान के इकोसिस्टम में लागू व्यवस्था है।

इसलिए किसी निवेशक को केवल इस आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि उसके बैंक खाते से निवेश राशि के ऊपर 0.4 प्रतिशत काट लिया जाएगा।

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े योग्य भुगतान के लिए आधिकारिक ढांचे में 0.02 प्रतिशत MDR और ₹300 कैप बताई गई है।


क्या PhonePe, Google Pay, Paytm या BHIM ग्राहक से फीस ले सकते हैं?

सरकारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि UPI ऐप प्रदाताओं को ग्राहक पर प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

इसका अर्थ यह है कि MDR की नई व्यवस्था को देखकर ग्राहक को यह नहीं समझना चाहिए कि अब UPI ऐप हर भुगतान पर कोई अलग सुविधा शुल्क काटने लगेंगे।

यदि किसी भुगतान स्क्रीन पर कोई शुल्क दिखाई देता है, तो उसे ध्यान से पढ़ना चाहिए और यह देखना चाहिए कि वह किस सेवा से संबंधित है।


क्या UPI इस्तेमाल करने की मासिक सीमा लगाई जाएगी?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तियों के लिए मुफ्त UPI उपयोग पर कोई मासिक कोटा, वॉल्यूम सीमा या टियर आधारित कैप नहीं लगाया गया है।

इसलिए यह कहना कि “महीने में इतने UPI भुगतान के बाद चार्ज लगेगा” नए MDR ढांचे की सही व्याख्या नहीं है।

हालांकि बैंक और NPCI की दैनिक लेन-देन सीमाएं अलग विषय हैं।


UPI की दैनिक लिमिट और MDR में अंतर समझिए

कई लोगों को दोनों चीजों में भ्रम हो रहा है।

UPI लिमिट का संबंध इस बात से है कि आप एक दिन में अधिकतम कितनी राशि ट्रांसफर कर सकते हैं।

MDR का संबंध निर्धारित व्यापारी भुगतान पर लागू भुगतान-इकोसिस्टम शुल्क से है।

सरकार के अनुसार बैंक और NPCI द्वारा तय दैनिक UPI सीमाएं आम तौर पर लेन-देन की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं और सुरक्षा तथा जोखिम प्रबंधन के लिए होती हैं। इन्हें MDR की चार्जिंग सीमा नहीं माना जाना चाहिए।


क्या हर ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत लगेगा?

नहीं।

यही इस पूरे बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

0.4 प्रतिशत सामान्य निर्धारित P2M व्यापारी लेन-देन के लिए है जो ₹2,000 से ऊपर हैं।

इसके अलावा:

  • P2P भुगतान मुफ्त रहेगा।
  • ₹2,000 तक के P2M भुगतान मुफ्त रहेंगे।
  • निर्धारित छोटे व्यापारियों के भुगतान zero-MDR रहेंगे।
  • आवश्यक क्षेत्रों में ₹5 फ्लैट MDR व्यवस्था है।
  • पूंजी बाजार के योग्य भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत MDR है।

इसलिए केवल भुगतान राशि देखकर MDR तय नहीं किया जा सकता। भुगतान किसे किया जा रहा है और वह किस श्रेणी में आता है, यह भी महत्वपूर्ण है।


RuPay क्रेडिट कार्ड से UPI भुगतान का क्या?

बैंक खाते से किए जाने वाले सामान्य UPI भुगतान और क्रेडिट कार्ड/क्रेडिट लाइन से जुड़े UPI भुगतान को एक ही नियम मानना उचित नहीं है।

RuPay क्रेडिट कार्ड से UPI भुगतान की इंटरचेंज और संबंधित भुगतान व्यवस्था अलग हो सकती है।

इसलिए किसी क्रेडिट-आधारित UPI भुगतान पर सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR को सीधे लागू मानना सही नहीं होगा।


MDR का पैसा आखिर जाता कहां है?

MDR को सरकार का टैक्स समझना सही नहीं है।

वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। यह भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाता है, जिसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI एप्लिकेशन प्रदाता शामिल हैं।

इसका घोषित उद्देश्य UPI व्यवस्था के संचालन और निरंतर विस्तार को समर्थन देना है।


सरकार ने MDR की व्यवस्था क्यों की?

UPI के उपयोग में लगातार वृद्धि हुई है। इसके साथ डिजिटल भुगतान के लिए सर्वर, नेटवर्क, तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, सिस्टम क्षमता और ग्राहक सहायता जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत करना पड़ता है।

सरकार का कहना है कि बड़े व्यापारी भुगतानों से जुड़े सीमित MDR से UPI इकोसिस्टम के संचालन और विस्तार को समर्थन मिल सकता है।

इस व्यवस्था का एक उद्देश्य छोटे व्यापारियों और आम उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाना भी बताया गया है।


छोटे दुकानदारों के लिए क्या व्यवस्था है?

छोटे दुकानदारों को नए ढांचे में विशेष सुरक्षा दी गई है।

P2PM श्रेणी के तहत UPI QR से प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को सभी लेन-देन पर zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।

इसका सीधा उद्देश्य सड़क किनारे विक्रेताओं, मोहल्ले की दुकानों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त डिजिटल भुगतान लागत का बोझ न पड़ने देना है।

यानी आपका स्थानीय चाय वाला, फल-सब्जी विक्रेता या छोटी दुकान केवल इसलिए MDR के दायरे में नहीं आ जाएगी क्योंकि वहां UPI QR लगा हुआ है।


क्या 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे?

वित्त मंत्रालय के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेन-देन इस बदलाव से अप्रभावित रहेंगे।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक MDR लगभग 4 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा, जबकि करीब 96 प्रतिशत लेन-देन या तो ₹2,000 तक के हैं या zero-MDR छोटे व्यापारी व्यवस्था में आते हैं।

इस आंकड़े का अर्थ यह है कि नया MDR पूरे UPI भुगतान तंत्र पर blanket charge के रूप में लागू नहीं किया गया है।


क्या दुकानदार MDR ग्राहक से वसूल सकता है?

सरकार ने कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यापारी MDR का शुल्क ग्राहकों पर न डालें।

इसलिए यदि कोई व्यापारी कहता है कि “UPI से भुगतान करने पर अलग चार्ज लगेगा”, तो ग्राहक को भुगतान की रसीद और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए।

यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उससे UPI भुगतान के नाम पर अनुचित शुल्क लिया गया है, तो वह संबंधित बैंक, UPI ऐप या उपलब्ध शिकायत प्रणाली के माध्यम से शिकायत कर सकता है।


UPI इस्तेमाल करते समय ग्राहक क्या सावधानी रखें?

MDR के अलावा UPI इस्तेमाल करते समय साइबर सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

ग्राहकों को कुछ बुनियादी बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए:

पहली बात: QR कोड स्कैन करने से पहले प्राप्तकर्ता या व्यापारी का नाम जांचें।

दूसरी बात: UPI PIN केवल पैसे भेजने के लिए डाला जाता है। पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN की जरूरत नहीं होती।

तीसरी बात: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर Collect Request स्वीकार न करें।

चौथी बात: OTP, UPI PIN, कार्ड PIN या बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।

पांचवीं बात: किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके भुगतान न करें।

छठी बात: भुगतान के बाद ऐप में ट्रांजैक्शन स्टेटस और राशि की जांच जरूर करें।


क्या QR कोड बदलना पड़ेगा?

सिर्फ MDR व्यवस्था बदलने के कारण हर व्यापारी को नया QR कोड या साउंडबॉक्स बदलना पड़ेगा, ऐसी कोई सामान्य बात आधिकारिक स्पष्टीकरण में नहीं कही गई है।

व्यापारी को अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से अपनी श्रेणी, सेटलमेंट और लागू MDR की जानकारी लेनी चाहिए।


बड़े कारोबारियों को क्या करना होगा?

बड़े व्यापारी अपने बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर या संबंधित UPI सेवा प्रदाता से अपनी Merchant Category Code और लागू MDR व्यवस्था की पुष्टि कर सकते हैं।

उन्हें यह समझना होगा कि उनका भुगतान सामान्य P2M श्रेणी में आता है, विशेष आवश्यक क्षेत्र में या किसी अन्य निर्धारित श्रेणी में।

इससे गलत शुल्क, गलत सेटलमेंट या ग्राहक से अनुचित वसूली जैसी स्थिति से बचने में मदद मिलेगी।


क्या UPI अब भी आम लोगों के लिए फ्री रहेगा?

सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण का जवाब हां है।

P2P लेन-देन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के P2M भुगतान मुफ्त रहेंगे। निर्धारित छोटे व्यापारियों के लेन-देन zero-MDR रहेंगे। और ग्राहक से MDR को सीधे वसूलने की व्यवस्था नहीं है।

यानी UPI के जरिए रोजाना होने वाले छोटे भुगतान के लिए आम ग्राहक को नया MDR शुल्क देने की बात नहीं है।


एक नजर में समझिए पूरा UPI MDR नियम

भुगतान की श्रेणी नई व्यवस्था
व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P मुफ्त
P2P में बड़ी राशि MDR नहीं
व्यापारी को ₹2,000 तक भुगतान MDR नहीं
निर्धारित छोटे व्यापारी Zero MDR
सामान्य योग्य P2M ₹2,000 से ऊपर 0.4% MDR
₹75,000 या अधिक सामान्य योग्य P2M अधिकतम ₹300
रेलवे ₹5 फ्लैट MDR, योग्य ₹2,000+ भुगतान पर
टेलीकॉम ₹5 फ्लैट MDR, योग्य ₹2,000+ भुगतान पर
बीमा ₹5 फ्लैट MDR, योग्य ₹2,000+ भुगतान पर
ईंधन ₹5 फ्लैट MDR, योग्य ₹2,000+ भुगतान पर
कृषि इनपुट ₹5 फ्लैट MDR, योग्य ₹2,000+ भुगतान पर
म्यूचुअल फंड/सिक्योरिटीज/स्टॉकब्रोकर/डीलर 0.02%, अधिकतम ₹300
ग्राहक पर सीधा MDR नहीं

उपरोक्त श्रेणियां वित्त मंत्रालय के 15 सितंबर 2026 के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर आधारित हैं।


कहां कितने रुपये का उदाहरण समझिए

मान लीजिए किसी सामान्य निर्धारित व्यापारी को ₹3,000 का भुगतान किया गया। 0.4 प्रतिशत की दर से MDR ₹12 होगा।

₹10,000 के भुगतान पर ₹40।

₹20,000 पर ₹80।

₹50,000 पर ₹200।

₹75,000 पर ₹300।

₹1 लाख पर सामान्य गणना ₹400 बनती है, लेकिन ₹300 की अधिकतम सीमा के कारण MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

अब यदि यही भुगतान किसी निर्धारित आवश्यक क्षेत्र में आता है, तो ₹2,000 से ऊपर के योग्य भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू हो सकता है।

और यदि भुगतान योग्य पूंजी बाजार श्रेणी में है तो 0.02 प्रतिशत की दर लागू होगी।

इससे स्पष्ट है कि एक ही राशि के दो अलग-अलग भुगतान पर MDR एक जैसा होना जरूरी नहीं है।


सबसे बड़ा भ्रम: “₹2,000 पार करते ही ग्राहक से पैसा कटेगा”

यह दावा पूरी तस्वीर नहीं बताता।

₹2,000 की सीमा मुख्य रूप से यह निर्धारित करने के लिए है कि निर्धारित P2M व्यापारी भुगतान में MDR कब लागू होगा।

लेकिन ग्राहक के लिए इसका अर्थ यह नहीं कि वह ₹2,500 का भुगतान करेगा तो उसके खाते से ₹2,510 कट जाएगा।

सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी इसे ग्राहक पर न डालें।


क्या UPI पर GST लगाया गया है?

MDR और GST को भी अलग-अलग समझना जरूरी है।

MDR स्वयं कोई GST या ग्राहक पर लगाया गया नया टैक्स नहीं है। वित्त मंत्रालय ने 2025 में भी स्पष्ट किया था कि ₹2,000 से ऊपर के UPI लेन-देन पर GST लगाने की वायरल खबरें गलत थीं और UPI ट्रांजैक्शन पर कोई ऐसा GST प्रस्ताव नहीं था।

2026 के नए ढांचे में भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई टैक्स नहीं है।

इसलिए “UPI पर 0.4 प्रतिशत टैक्स” कहना सही शब्दावली नहीं है।


UPI को लेकर सोशल मीडिया पर क्या सावधानी रखें?

UPI से जुड़े नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर आधी-अधूरी जानकारी तेजी से फैलती है।

कई बार किसी एक व्यापारी श्रेणी का नियम पूरे UPI पर लागू बताकर पोस्ट वायरल हो जाती है।

इसलिए अगर आपको कोई मैसेज मिलता है कि:

“अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा”

या

“₹2,000 से ज्यादा भेजने पर आपके खाते से 0.4 प्रतिशत कटेगा”

तो उसे बिना जांचे आगे न भेजें।

वित्त मंत्रालय ने भी लोगों को UPI से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह दी है।


UPI की कहानी: आज इतना बड़ा बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?

UPI ने भारत के डिजिटल भुगतान व्यवहार को बड़े स्तर पर बदल दिया है।

सरकार के अनुसार UPI को अप्रैल 2016 में लॉन्च किया गया था और एक दशक के भीतर यह भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के माध्यम से 24,162 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए गए।

ऐसे में UPI के पीछे मौजूद तकनीकी ढांचे को लगातार मजबूत रखना भी जरूरी है।

जैसे-जैसे लेन-देन बढ़ते हैं, सिस्टम क्षमता, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड मॉनिटरिंग, बैंकिंग कनेक्टिविटी और ग्राहक सहायता की जरूरत भी बढ़ती है।

सरकार द्वारा नए MDR ढांचे के पीछे दी गई प्रमुख वजहों में UPI के दीर्घकालिक संचालन और विस्तार को समर्थन देना शामिल है।


आम ग्राहक के लिए सबसे जरूरी 10 बातें

1. P2P UPI ट्रांसफर मुफ्त रहेगा।

2. ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं होगा।

3. निर्धारित छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर zero MDR रहेगा।

4. सामान्य निर्धारित P2M भुगतान में ₹2,000 से ऊपर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

5. ₹75,000 या उससे अधिक के सामान्य योग्य भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 है।

6. रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्धारित आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से ऊपर के योग्य भुगतान पर ₹5 फ्लैट MDR है।

7. म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े योग्य भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR और ₹300 की अधिकतम सीमा है।

8. MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है।

9. UPI ऐप ग्राहक पर प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ शुल्क नहीं लगा सकते।

10. UPI भुगतान करते समय PIN, OTP और QR कोड से जुड़ी सुरक्षा सावधानियां पहले की तरह जरूरी हैं।


तो आखिर 15 अक्टूबर 2026 से क्या बदलेगा?

15 अक्टूबर से UPI के हर उपयोगकर्ता के लिए कोई नया शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। बदलाव मुख्य रूप से उन निर्धारित व्यापारी भुगतानों से जुड़ा है जो ₹2,000 से ऊपर हैं।

एक तरफ व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। दूसरी तरफ ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और निर्धारित छोटे व्यापारियों के भुगतान भी zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे।

बड़े और निर्धारित सामान्य व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्धारित आवश्यक क्षेत्रों के लिए ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। वहीं पूंजी बाजार से जुड़े योग्य भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत की दर निर्धारित की गई है।

इस पूरी व्यवस्था में सबसे अहम बात यही है कि MDR को ग्राहक पर सीधे लगाए गए UPI चार्ज के रूप में नहीं समझना चाहिए।


निष्कर्ष: UPI फ्री है, लेकिन बड़े व्यापारी भुगतानों का ढांचा बदलेगा

UPI को लेकर वायरल हो रही “अब हर पेमेंट पर चार्ज” वाली तस्वीर वास्तविक नियमों से अलग है।

सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार आम व्यक्ति के लिए P2P UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के P2M भुगतान मुफ्त रहेंगे और निर्धारित छोटे व्यापारियों को भी zero-MDR सुरक्षा दी गई है। लगभग 96 प्रतिशत P2M लेन-देन के अप्रभावित रहने का अनुमान दिया गया है।

बदलाव मुख्य रूप से बड़े और निर्धारित व्यापारी भुगतानों से जुड़ा है। सामान्य श्रेणी में ₹2,000 से अधिक के योग्य P2M भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR, ₹75,000 या उससे ऊपर ₹300 की अधिकतम सीमा, कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹5 फ्लैट MDR और पूंजी बाजार के योग्य भुगतान में 0.02 प्रतिशत MDR की व्यवस्था की गई है।

इसलिए UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए सबसे जरूरी संदेश है—घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन नियमों को सही तरीके से समझना जरूरी है।

चाय की दुकान पर ₹20 की चाय हो, सब्जी वाले को ₹100 का भुगतान हो, किराना दुकान पर ₹800 की खरीदारी हो या दोस्त को ₹10,000 भेजने हों—इन सभी स्थितियों को “₹2,000 से ज्यादा पर 0.4 प्रतिशत ग्राहक शुल्क” वाले एक ही नियम में नहीं रखा जा सकता।

साथ ही, बड़े भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों को अपनी भुगतान श्रेणी समझनी होगी। व्यापारी अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से MDR की लागू दर, अपनी श्रेणी और सेटलमेंट प्रक्रिया की पुष्टि कर सकते हैं।

यानी 15 अक्टूबर 2026 से UPI की कहानी “हर भुगतान पर चार्ज” की नहीं, बल्कि निर्धारित बड़े व्यापारी भुगतानों के लिए नए MDR ढांचे की है। आम व्यक्ति का P2P UPI भुगतान मुफ्त है और छोटे मूल्य वाले अधिकांश व्यापारी भुगतान भी पहले की तरह zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे।

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