जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया। यहां एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ कथित तौर पर फिल्मी अंदाज में किडनैपिंग की गई। हथियारों के बल पर बदमाशों ने CA को उनकी ही मर्सिडीज में बंधक बना लिया और कार को लेकर निकल पड़े। जान बचाने के लिए पीड़ित ने चलती कार से बाहर निकलने की तीन बार कोशिश की, लेकिन हर बार बदमाशों ने उन्हें पकड़ लिया। इस दौरान कार कई जगह अनियंत्रित हुई और सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब आखिरकार मर्सिडीज दुर्घटनाग्रस्त होकर नाले में जा गिरी और पीड़ित किसी तरह कार से बाहर निकला, तो मदद करने के बजाय मौके पर मौजूद भीड़ ने उसे ही आरोपी समझ लिया। लोगों को लगा कि वही कार चला रहा था और सड़क पर हुए हादसे के लिए भी वही जिम्मेदार है। पुलिस के पहुंचने के बाद पूरी कहानी सामने आई और पता चला कि जिस व्यक्ति को भीड़ बदमाश समझ रही थी, वह खुद इस पूरी घटना का पीड़ित था।
मॉर्निंग वॉक के बाद कार में बैठे थे CA, तभी सामने आ गए नकाबपोश
बताया जा रहा है कि घटना सुबह के समय जयपुर के सेंट्रल पार्क के आसपास हुई। रोज की तरह चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव गुप्ता मॉर्निंग वॉक के लिए पार्क पहुंचे थे। कुछ समय टहलने के बाद वह अपनी मर्सिडीज कार में बैठने पहुंचे। इसी दौरान कथित तौर पर दो नकाबपोश बदमाश उनकी कार के पास पहुंचे।
आरोप है कि दोनों ने हथियार दिखाकर राजीव गुप्ता को डराया। एक बदमाश ने उनकी कनपटी पर पिस्टल तान दी, जबकि दूसरे ने गर्दन पर चाकू रख दिया। हथियारों के बल पर उन्हें ड्राइविंग सीट से हटाया गया और दोनों बदमाश कार में सवार हो गए।
इसके बाद राजीव गुप्ता के लिए हालात बेहद खतरनाक हो गए। वह अपनी ही कार में बंधक बन चुके थे और दोनों हमलावर उन्हें धमकाते हुए अपने साथ ले जाने लगे।
बदमाशों को मर्सिडीज चलानी नहीं आती थी, पीड़ित से ही पूछते रहे कार के फीचर्स
घटना का एक और हैरान करने वाला पहलू सामने आया। जिस मर्सिडीज कार को बदमाश अपने कब्जे में लेकर निकले थे, उसे चलाने में उन्हें परेशानी हो रही थी। कार के फीचर्स और कंट्रोल की जानकारी नहीं होने के कारण कथित तौर पर बदमाशों ने राजीव गुप्ता से ही कार के बारे में पूछना शुरू कर दिया।
हालात ऐसे थे कि जिस व्यक्ति को हथियारों के बल पर अगवा किया गया था, वही बदमाशों को कार के गियर, कंट्रोल और अन्य फीचर्स के बारे में जानकारी दे रहा था। बताया जा रहा है कि कार जयपुर से दिल्ली रोड की ओर बढ़ रही थी और इसी दौरान राजीव गुप्ता लगातार खुद को बचाने का मौका तलाशते रहे।
एक तरफ उनके सामने हथियारबंद बदमाश थे और दूसरी तरफ चलती कार। ऐसे में उनके लिए जरा सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती थी।
एक नहीं, तीन बार चलती कार से कूदने की कोशिश
राजीव गुप्ता ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को बचाने के लिए चलती मर्सिडीज से बाहर निकलने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि तीन बार कार से कूदने का प्रयास किया।
लेकिन हर बार उनकी कोशिश नाकाम कर दी गई। पीछे बैठे बदमाशों ने उन्हें पकड़ लिया और धमकाकर वापस कार के अंदर कर दिया। कभी पिस्टल दिखाई गई तो कभी चाकू के जरिए डराया गया। इस दौरान कार के अंदर लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
राजीव गुप्ता के लिए यह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसा था। बाहर तेज रफ्तार सड़क थी और अंदर हथियारों के बल पर उन्हें बंधक बनाए जाने का आरोप है।
चलती कार में हाथापाई से बिगड़ा संतुलन, सड़क पर मची अफरा-तफरी
इसी दौरान कार के अंदर कथित तौर पर हाथापाई और संघर्ष शुरू हो गया। इसका असर कार की रफ्तार और नियंत्रण पर भी पड़ा। मर्सिडीज कई बार अनियंत्रित हुई और सड़क पर चल रहे लोगों तथा बाइक सवारों के लिए खतरा पैदा हो गया।
कार को बेकाबू हालत में देखकर सड़क पर मौजूद लोगों में भी हड़कंप मच गया। कुछ लोगों ने कार का पीछा करना शुरू कर दिया। लोगों को उस समय पूरी घटना की जानकारी नहीं थी। उन्हें सिर्फ इतना दिखाई दे रहा था कि एक तेज रफ्तार लग्जरी कार बेकाबू होकर सड़क पर दौड़ रही है।
इसी दौरान हालात और बिगड़ गए और मर्सिडीज सड़क किनारे बने एक गहरे नाले में जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि कार कई पलटियां खाने के बाद नाले में जा पहुंची।
हादसे के बाद दोनों बदमाश फरार, लेकिन भीड़ ने CA को ही घेर लिया
हादसे के बाद कथित तौर पर दोनों नकाबपोश बदमाश मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। दूसरी तरफ नाले में गिरी कार से राजीव गुप्ता किसी तरह बाहर निकलने में सफल हुए।
उन्हें उम्मीद थी कि आसपास मौजूद लोग उनकी मदद करेंगे और पुलिस को बुलाएंगे। लेकिन यहां कहानी ने एक और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया।
कार का पीछा कर रही भीड़ ने जब राजीव गुप्ता को बाहर निकलते देखा तो लोगों को लगा कि वही कार चला रहे थे। लोगों ने उन्हें ही हादसे का जिम्मेदार और बदमाश समझ लिया। देखते ही देखते भीड़ ने उन्हें घेर लिया।
बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट भी शुरू कर दी। राजीव गुप्ता लगातार यह बताने की कोशिश करते रहे कि उन्हें अगवा किया गया था और कार में दो नकाबपोश बदमाश मौजूद थे। लेकिन उस समय मौके पर मौजूद लोगों को उनकी बात पर विश्वास नहीं हुआ।
यानी जिस शख्स को कुछ देर पहले हथियारों के बल पर अगवा किया गया था, वही हादसे के बाद लोगों की नजर में आरोपी बन गया।
पुलिस पहुंची तो सामने आई पूरी सच्चाई
घटना की सूचना मिलने के बाद आमेर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने राजीव गुप्ता को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाला और मामले की जांच शुरू की।
इसके बाद पुलिस ने नाले में गिरी मर्सिडीज की भी जांच की। क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया। तलाशी के दौरान कार से एक नकली पिस्टल और धारदार चाकू मिलने की बात सामने आई है। प्रारंभिक जांच में पिस्टल नकली बताई जा रही है, जबकि चाकू असली होने की जानकारी सामने आई है।
इन बरामद वस्तुओं ने पुलिस की जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा दी है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों कथित हमलावर कौन थे और उन्होंने CA को ही निशाना क्यों बनाया।
सेंट्रल पार्क से दिल्ली रोड तक CCTV खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब पूरी घटना की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। सेंट्रल पार्क के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से लेकर उस रास्ते तक के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जिस रास्ते से मर्सिडीज दिल्ली रोड की ओर गई थी।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों कथित आरोपी कहां से कार में सवार हुए, किस रास्ते से भागे और हादसे के बाद किस दिशा में फरार हुए। इसके अलावा पुलिस उन स्थानों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल सकती है, जहां कार के रुकने या गुजरने की संभावना है।
फिलहाल इस पूरी घटना ने जयपुर में सुरक्षा व्यवस्था और अपराध के तौर-तरीकों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो नकाबपोश बदमाशों ने एक CA को उसकी लग्जरी कार समेत क्यों अगवा किया और उनका वास्तविक मकसद क्या था।
पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की पूरी कहानी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल राजीव गुप्ता के लिए राहत की बात यह है कि वह इस खतरनाक घटनाक्रम के बावजूद सुरक्षित बच गए, हालांकि हादसे के बाद उन्हें अपनी ही पहचान साबित करने और भीड़ से बचने की एक और मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा।
