नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। चीन की सीमा से सटे नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई गांवों, परियोजना स्थलों और सड़क मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है तथा नेपाल सरकार ने सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया है।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9 बजे स्थानीय समय के अनुसार भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का प्रवाह बेहद तेज हो गया। बताया जा रहा है कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया, जिसके बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। पानी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि देखते ही देखते नदी के आसपास मौजूद इलाकों में तबाही फैल गई। नेपाल सेना के अनुसार, रसुवा जिले के तिमुरे और इसके आसपास के स्याफ्रुबेसी क्षेत्र में बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया। कई वाहन, निर्माण सामग्री, सामान और अन्य संपत्तियां तेज बहाव में बह गईं।
इस आपदा के बाद सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। पर्यटन और यात्रा कंपनियों से प्राप्त प्रारंभिक एजेंसी-वार रिकॉर्ड के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना मिली है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों की ओर से लापता लोगों की तलाश और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में संचार और आवागमन बाधित होने के कारण राहत एवं बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रसुवा और आसपास के इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। सुरक्षा बलों की टीमें बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश करने और प्रभावित इलाकों में जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं।
बाढ़ के कारण कई महत्वपूर्ण मार्गों पर भी असर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर सड़क संपर्क टूटने और परिवहन व्यवस्था बाधित होने से राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और लापता लोगों का पता लगाना है। इसके साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
नेपाल में आई इस भीषण आपदा का असर सीमावर्ती और पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका है। रसुवा जिला चीन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां से होकर बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में यात्रियों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। विदेशी नागरिकों के लापता होने के कारण संबंधित एजेंसियां उनकी पहचान और स्थिति की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
भारत में भी नेपाल की इस आपदा को लेकर चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री से बात कर स्थिति और संभावित प्रभावों की जानकारी ली है। सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए संबंधित एजेंसियां सतर्क हैं।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। प्रशासन की ओर से लोगों से प्रभावित और नदी किनारे वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है। लापता लोगों की संख्या और बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा आने वाले समय में बढ़ सकता है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों तक अभी राहत एवं बचाव दल पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं। अधिकारियों द्वारा लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है और बचाव अभियान को और व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है।
