BPSC TRE-4 Notification: बिहार में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ और BPSC TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया, लेकिन नोटिफिकेशन सामने आने के बाद भी छात्रों की नाराजगी कम नहीं हुई है। भर्ती में कुल 32,388 शिक्षक पदों पर नियुक्ति होनी है, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी कई महत्वपूर्ण मांगों को नजरअंदाज कर दिया गया है। यही वजह है कि अब छात्र नेताओं ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है और सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है।
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग TRE-4 की परीक्षा को एकल परीक्षा के रूप में आयोजित करने और नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पहले ही काफी देरी हो चुकी है और ऐसे समय में परीक्षा पैटर्न में बदलाव से अभ्यर्थियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी क्यों नाराज हैं छात्र?
बिहार में TRE-4 भर्ती को लेकर अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे थे। भर्ती की तारीख को लेकर कई बार चर्चाएं और संभावित तारीखें सामने आईं, लेकिन नोटिफिकेशन जारी नहीं हो सका।
आखिरकार 18 अगस्त को पटना में छात्रों के प्रदर्शन के बीच BPSC TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी किया गया। नोटिफिकेशन में भर्ती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई, लेकिन इसके साथ ही अभ्यर्थियों की नाराजगी भी सामने आ गई।
छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार से पहले ही एकल परीक्षा कराने की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। अब अभ्यर्थी इसे लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
एकल परीक्षा की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों का कहना है कि TRE-4 की परीक्षा पुराने पैटर्न के आधार पर ही कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि भर्ती में पहले ही करीब दो साल की देरी हो चुकी है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को और जटिल बनाने के बजाय इसे सरल और पारदर्शी रखा जाना चाहिए।
छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक, सरकार को मांगों पर फैसला लेने के लिए 21 अगस्त तक का समय दिया गया है।
अगर इस अवधि में मांगें नहीं मानी गईं तो अभ्यर्थी धरने पर बैठने की तैयारी में हैं। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर भी छात्रों के जुटने और सत्याग्रह की तैयारी की बात सामने आई है।
नेगेटिव मार्किंग को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी
TRE-4 में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान भी अभ्यर्थियों के विरोध का एक बड़ा कारण है। छात्रों का सवाल है कि जब पहले की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में अलग पैटर्न रहा है तो अचानक TRE-4 में नेगेटिव मार्किंग क्यों जोड़ी गई?
अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती में बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल होंगे और नेगेटिव मार्किंग की वजह से परीक्षा का दबाव बढ़ सकता है। उनका कहना है कि अगर परीक्षा पैटर्न में कोई नया प्रयोग करना ही है तो उसे अगली भर्ती यानी TRE-5 में लागू किया जाए, लेकिन TRE-4 के अभ्यर्थियों पर अचानक नया नियम नहीं थोपा जाना चाहिए।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इतना ही नहीं, कुछ प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाने की भी बात कर रहे हैं।
32,388 शिक्षक पदों पर होनी है भर्ती
TRE-4 भर्ती बिहार के शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 32,388 शिक्षक पदों को भरे जाने की योजना है।
भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली थी जो लंबे समय से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, अब परीक्षा के पैटर्न और नेगेटिव मार्किंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
छात्रों का कहना है कि सरकार को भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए, ताकि लंबे समय से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर मिल सके।
BSSC CGL-4 को लेकर भी छात्रों का प्रदर्शन
TRE-4 के अलावा बिहार के अभ्यर्थियों की नाराजगी सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी छात्र BSSC CGL-4 की परीक्षा तारीख घोषित करने की भी मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। छात्रों के मुताबिक, करीब 36 लाख अभ्यर्थी अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
इसके अलावा बिहार कर्मचारी चयन आयोग की भर्तियों में संविदा कर्मचारियों को मिलने वाले 25 प्रतिशत वेटेज को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से नए अभ्यर्थियों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो सकती है।
17वीं BPSC और दरोगा भर्ती की जांच की भी मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कई अन्य मुद्दों को भी अपने आंदोलन में शामिल किया है। छात्रों की मांग है कि 17वीं BPSC परीक्षा में कथित धांधली की जांच कराई जाए और दरोगा भर्ती में भी सामने आए आरोपों की जांच हो।
इसके साथ ही पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की जा रही है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। अगर किसी परीक्षा में पेपर लीक या धांधली के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार के सामने बढ़ सकती है चुनौती
TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सरकार को उम्मीद रही होगी कि अभ्यर्थियों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार खत्म होगा और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेकिन नोटिफिकेशन के बाद ही छात्रों की नई मांगों ने सरकार के सामने एक अलग चुनौती खड़ी कर दी है।
एक तरफ सरकार को हजारों शिक्षक पदों की भर्ती प्रक्रिया को समय पर पूरा करना है, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों के विरोध और परीक्षा पैटर्न से जुड़े सवालों का जवाब भी देना होगा।
अब सबसे ज्यादा नजर 21 अगस्त पर है। छात्रों ने सरकार को तीन दिन का समय दिया है। अगर इस दौरान उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं होता है तो आंदोलन तेज होने की संभावना है।
अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर
बिहार में TRE-4 को लेकर जारी विवाद सिर्फ एक भर्ती परीक्षा के पैटर्न तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों की मांगों में एकल परीक्षा, नेगेटिव मार्किंग हटाने के साथ-साथ BSSC CGL-4 की तारीख, संविदा वेटेज और कथित परीक्षा धांधली की जांच जैसे कई मुद्दे शामिल हो गए हैं।
एक तरफ 32,388 शिक्षक पदों की भर्ती का रास्ता खुल चुका है, तो दूसरी तरफ अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता पकड़ लिया है। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और क्या 21 अगस्त से पहले कोई ऐसा समाधान निकलता है जिससे TRE-4 की भर्ती प्रक्रिया बिना किसी बड़े विवाद के आगे बढ़ सके।
