पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मानसून के बीच एक बार फिर पहाड़ों का रौद्र रूप देखने को मिला है। धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को भारी पत्थर और बोल्डर गिरने से कूलागाड़ पुल क्षतिग्रस्त हो गया। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है। घटना के बाद सीमा सड़क संगठन यानी BRO की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने का काम शुरू कर दिया।
कूलागाड़ पुल सीमांत क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्रियों की आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। खास बात यह है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का 9वां जत्था बुधवार को भारत में प्रवेश करने वाला है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
बोल्डर गिरने से क्षतिग्रस्त हुआ कूलागाड़ पुल
जानकारी के मुताबिक, धारचूला-तवाघाट एनएच पर पहाड़ी से अचानक पत्थर और बड़े-बड़े बोल्डर गिरने लगे। इसकी चपेट में आने से कूलागाड़ पुल को नुकसान पहुंचा। पुल के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया।
सीमांत इलाके में यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए स्थानीय आबादी के साथ-साथ सुरक्षा बलों और यात्रियों की आवाजाही भी होती है। मानसून के दौरान पहले से ही इस पूरे क्षेत्र में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना रहता है।
घटना के बाद BRO की टीम ने मौके का जायजा लिया और जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने का काम शुरू किया।
BRO बना रहा वैकल्पिक डायवर्जन
कूलागाड़ पुल को हुए नुकसान के बाद यातायात को पूरी तरह प्रभावित होने से बचाने के लिए BRO की ओर से डायवर्जन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार शाम तक डायवर्जन का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
अगर डायवर्जन समय पर तैयार हो जाता है तो इस मार्ग पर यातायात को वैकल्पिक रास्ते से संचालित किया जा सकेगा। इससे स्थानीय लोगों और यात्रा से जुड़े वाहनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
BRO की टीम लगातार मौके पर काम कर रही है और प्राथमिकता यह है कि सीमांत क्षेत्र का संपर्क ज्यादा समय तक बाधित न रहे।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के बीच बढ़ी चिंता
कूलागाड़ पुल को नुकसान पहुंचने की घटना ऐसे समय हुई है जब कैलाश मानसरोवर यात्रा भी जारी है। यात्रा के 9वें जत्थे में कुल 48 यात्री शामिल हैं। इनके साथ कुमाऊं मंडल विकास निगम यानी KMVN के तीन कुक भी हैं।
9वां जत्था बुधवार को भारत में प्रवेश करने वाला है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए मार्ग की स्थिति का लगातार आकलन किया जा रहा है। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक भूस्खलन और बोल्डर गिरने की घटनाओं को देखते हुए यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
10वां जत्था अभी तिब्बत में
कैलाश मानसरोवर यात्रा के अगले जत्थे को लेकर भी जानकारी सामने आई है। 10वां जत्था फिलहाल तिब्बत में है और उसके 23 अगस्त 2026 को भारत में प्रवेश करने की संभावना है।
इस जत्थे में कुल 44 यात्री शामिल हैं। इनके साथ KMVN के तीन कुक भी यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भी धारचूला और आसपास के मार्गों पर आवाजाही बनी रहने वाली है।
यही वजह है कि कूलागाड़ पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था को जल्द तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मानसून में पहाड़ों पर बढ़ा खतरा
उत्तराखंड में इस समय मानसून सक्रिय है और पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। पिथौरागढ़ जैसे सीमांत और संवेदनशील जिले में कई सड़कें पहाड़ी मलबे, बोल्डर और भूस्खलन की चपेट में आती रहती हैं।
बारिश के दौरान पहाड़ों से अचानक बड़े पत्थर गिरने की घटनाएं वाहन चालकों और यात्रियों के लिए बड़ा खतरा पैदा करती हैं। ऐसे में सड़क खोलने के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।
धारचूला-तवाघाट मार्ग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां मानसून के दौरान विशेष सतर्कता की जरूरत रहती है।
स्थानीय लोगों के लिए भी अहम है यह मार्ग
धारचूला-तवाघाट एनएच केवल कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सीमांत क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी यह जीवनरेखा की तरह है। दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं, व्यापार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोगों को इसी मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में पुल क्षतिग्रस्त होने से लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित रहती है तो इसका सीधा असर स्थानीय जनजीवन पर पड़ सकता है। इसलिए BRO की ओर से वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की कोशिश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शाम तक स्थिति साफ होने की उम्मीद
फिलहाल सभी की निगाहें BRO की ओर से तैयार किए जा रहे डायवर्जन पर टिकी हैं। विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग तैयार करके यातायात को नियंत्रित तरीके से बहाल किया जाए।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के अगले जत्थों की आवाजाही को देखते हुए मार्ग को सुरक्षित बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी यात्री या स्थानीय व्यक्ति की सुरक्षा से समझौता न हो।
कूलागाड़ पुल का क्षतिग्रस्त होना एक बार फिर बताता है कि उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों में मानसून के दौरान सड़क संपर्क कितना संवेदनशील हो जाता है। फिलहाल BRO की टीम मोर्चे पर है और वैकल्पिक डायवर्जन तैयार किया जा रहा है। अब उम्मीद यही है कि जल्द यातायात बहाल हो और कैलाश मानसरोवर यात्रा के यात्रियों समेत स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
