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हिंदू-मुस्लिम नहीं, देश का बचपन और भविष्य खतरे में… स्वामी रामदेव ने आंदोलनों में बच्चों के इस्तेमाल पर जताई चिंता

The Hill India News
Last updated: August 17, 2026 5:46 am
The Hill India News
Published: August 17, 2026
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योगगुरु स्वामी रामदेव ने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में हिंदू, मुस्लिम, दलित या आदिवासी के खतरे में होने की बात करने के बजाय हमें देश के बच्चों और युवा पीढ़ी के भविष्य की चिंता करनी चाहिए। रामदेव ने विरोध प्रदर्शनों में छोटे बच्चों को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों को आंदोलनों में नहीं धकेला जाना चाहिए। उनके इस बयान ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Contents
‘न हिंदू खतरे में, न मुसलमान… देश का बचपन खतरे में’विरोध प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल पर जताई आपत्तिशिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी उठाया सवाल‘अंधेरगर्दी से आक्रोश फूटता है’दो दिन पहले सरकारी नौकरियों को लेकर भी दिया था बयानयुवाओं के भविष्य को लेकर चिंता

‘न हिंदू खतरे में, न मुसलमान… देश का बचपन खतरे में’

स्वामी रामदेव ने अपने बयान में कहा कि देश में अलग-अलग समुदायों को खतरे में बताने की राजनीति से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि देश की नई पीढ़ी किस दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि न हिंदू खतरे में हैं, न मुसलमान, न दलित और न ही आदिवासी खतरे में हैं। असल चिंता देश के बचपन और युवा पीढ़ी को लेकर होनी चाहिए।

रामदेव के मुताबिक, देश का वर्तमान और भविष्य उसकी युवा पीढ़ी से जुड़ा हुआ है। अगर बच्चों और युवाओं को सही शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते हैं तो इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।

उन्होंने देश की प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता, अखंडता और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए बच्चों और युवाओं के हितों पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

विरोध प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति

योगगुरु ने विरोध प्रदर्शनों में बच्चों को शामिल करने के तरीके पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विरोध प्रदर्शनों में देश के बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं और छोटे बच्चों को ऐसे प्रदर्शनों में नहीं धकेला जाना चाहिए।

रामदेव का कहना है कि बच्चों का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के आंदोलन या विरोध के लिए नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों की प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और उनके सुरक्षित भविष्य से जुड़ी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। खासकर बच्चों को ऐसे माहौल से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि उनका मानसिक और शैक्षणिक विकास प्रभावित हो सकता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी उठाया सवाल

स्वामी रामदेव ने अपने बयान में देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों को सही दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

उनके अनुसार, देश के बच्चों और युवाओं का भविष्य तभी मजबूत होगा जब उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केवल राजनीतिक या सामाजिक विवादों में उलझने के बजाय इन बुनियादी क्षेत्रों में सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, रोजगार की चिंता और युवाओं के सामने मौजूद अवसरों को देखते हुए रामदेव का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना भी देश की युवा पीढ़ी के विकास के लिए जरूरी है।

‘अंधेरगर्दी से आक्रोश फूटता है’

रामदेव ने कहा कि जब व्यवस्था में लोगों को अन्याय या अव्यवस्था का अनुभव होता है तो उसके खिलाफ आक्रोश पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अंधेरगर्दी से आक्रोश फूटता है, इसलिए व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।

उन्होंने संकेत दिया कि युवाओं में बढ़ते असंतोष को केवल विरोध या प्रदर्शन के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे मौजूद कारणों को भी समझना चाहिए। अगर युवाओं को लगता है कि उनके साथ अवसरों के मामले में अन्याय हो रहा है, तो उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।

दो दिन पहले सरकारी नौकरियों को लेकर भी दिया था बयान

स्वामी रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले उन्होंने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए थे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने का आरोप लगाया था।

रामदेव ने दावा किया था कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 फीसदी तक घोटाला होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लोग अपने विचार, संगठन, संस्कार, जाति या समुदाय से जुड़े लोगों को प्राथमिकता देते हैं और दूसरे उम्मीदवारों को बाहर कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा था कि अगर भर्ती प्रक्रिया में सब कुछ ठीक नहीं होगा तो युवाओं में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने युवाओं के बीच बढ़ते आक्रोश का जिक्र करते हुए व्यवस्था को सुधारने की जरूरत बताई थी।

युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता

रामदेव के लगातार सामने आ रहे बयानों में एक बात समान दिखाई देती है—देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य पर जोर। उनका कहना है कि देश की युवा आबादी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और अगर यही वर्ग व्यवस्था से निराश हो गया तो इसका असर आने वाले समय में दिखाई देगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युवाओं को केवल आंदोलन और विरोध की राजनीति में उलझाने के बजाय उनकी शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल स्वामी रामदेव का ताजा बयान सोशल और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके बयान ने बच्चों को विरोध प्रदर्शनों से दूर रखने, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण सवालों को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि उनके इन बयानों के बाद सरकार और संबंधित संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों पर किस तरह के कदम उठाती हैं।

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