देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित सृष्टि कंडारी मौत मामले में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे प्रकरण की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CB-CID) को सौंपने के लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता, लगातार उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग और समाज में बढ़ती चिंताओं को देखते हुए सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब इस मामले की जांच नए सिरे से होगी और अब तक जुटाए गए सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा तकनीकी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी।
इस फैसले को मृतका के परिजनों, स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उठाई जा रही मांगों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच एजेंसी के माध्यम से मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, साक्ष्य छिपाने या आपराधिक साजिश के संकेत मिलते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बदली जांच की दिशा
सृष्टि कंडारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। घटना के बाद से ही परिजनों ने आरोप लगाया कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए। लगातार बढ़ते जनदबाव और सवालों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गृह विभाग को निर्देश देते हुए पूरे प्रकरण की जांच CB-CID को सौंपने का फैसला लिया।
सरकार का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराने से तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल संभव होती है और न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होता है।
देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने उठाई थी मांग
इस मामले में देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विशेष रूप से CB-CID जांच की मांग की थी।
मुख्यमंत्री से हुई बैठक में विधायक ने कहा कि सृष्टि कंडारी की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर देने वाली घटना है। उन्होंने आग्रह किया कि जांच किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए ताकि यदि किसी भी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गृह सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद CB-CID जांच के आदेश जारी कर दिए गए।
अब किन पहलुओं की होगी दोबारा जांच?
CB-CID के पास जांच पहुंचने के बाद पूरे मामले की शुरुआत से समीक्षा की जाएगी।
जांच एजेंसी निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दे सकती है—
- घटनास्थल का दोबारा परीक्षण।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों की समीक्षा।
- फॉरेंसिक साक्ष्यों का पुनः विश्लेषण।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच।
- मृतका द्वारा भेजे गए वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री का परीक्षण।
- गवाहों के बयानों का पुनर्मूल्यांकन।
- आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से दोबारा पूछताछ।
- शुरुआती पुलिस विवेचना में किसी तथ्य के छूट जाने या किसी जांच कोण की अनदेखी की संभावना की जांच।
जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि अब तक की विवेचना कानूनन निर्धारित मानकों के अनुरूप हुई थी या नहीं।
वीडियो और डिजिटल साक्ष्य बन सकते हैं अहम कड़ी
मामले में पहले ही पुलिस को एक वीडियो उपलब्ध कराया गया था, जिसे मृतका सृष्टि कंडारी ने कथित रूप से घटना से पहले अपनी मां को भेजा था।
बताया गया है कि उस वीडियो में उसने शादी के बाद कथित रूप से हो रही मानसिक प्रताड़ना और परेशानियों का जिक्र किया था।
अब CB-CID इस वीडियो की तकनीकी जांच, उसकी सत्यता, समय और उससे जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी विस्तार से समीक्षा कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक आपराधिक जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या है पूरा मामला?
सृष्टि कंडारी उत्तराखंड में सरकारी शिक्षिका थीं।
उनकी शादी नवंबर 2025 में हर्रावाला निवासी सौरभ खत्री से हुई थी, जो सचिवालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं।
सृष्टि के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज और अन्य कारणों से लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
परिजनों के अनुसार, उसे बार-बार ताने दिए जाते थे और उसके साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जाता था।
इन्हीं परिस्थितियों के कारण उसकी मौत हुई। हालांकि, इस मामले में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
पहले भी हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस पहले ही सृष्टि के पति और ननद को गिरफ्तार कर चुकी है।
साथ ही सास की भूमिका की भी जांच की जा रही थी।
अब CB-CID जांच शुरू होने के बाद उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।
विधायक ने जताया न्याय पर भरोसा
देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि CB-CID पूरी निष्पक्षता के साथ जांच करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से भी अपील की कि जांच प्रक्रिया में सहयोग करें और अफवाहों से बचें।
सोशल मीडिया पर भी लगातार उठते रहे सवाल
घटना के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं।
कई लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई और कहा कि मामले के हर पहलू की वैज्ञानिक तरीके से जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या संदेह समाप्त हो सके।
इसी बढ़ते जनदबाव और सार्वजनिक चिंता के बीच सरकार ने जांच CB-CID को सौंपने का निर्णय लिया।
क्या बदल सकता है CB-CID जांच से?
विशेषज्ञों का मानना है कि CB-CID जैसी विशेष जांच एजेंसी के पास जाने के बाद—
- जांच अधिक तकनीकी और विस्तृत हो सकती है।
- इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल की जा सकती है।
- घटनाक्रम की समय-रेखा (Timeline) का पुनर्निर्माण किया जा सकता है।
- आवश्यकता पड़ने पर नए गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं।
- पहले दर्ज बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का आपसी मिलान किया जाएगा।
हालांकि, जांच का अंतिम निष्कर्ष केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
