नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के युवा वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। पंजाब के एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे लवप्रीत ने पुरुषों की 110+ किलोग्राम भार वर्ग प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। खास बात यह रही कि वह गोल्ड मेडल से महज 1 किलोग्राम पीछे रह गए। उन्होंने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाया, जबकि न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। इंग्लैंड के एंड्रयू ग्रिफिथ्स 356 किलोग्राम वजन उठाकर तीसरे स्थान पर रहे।
यह मुकाबला कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। आखिरी लिफ्ट तक गोल्ड मेडल की तस्वीर साफ नहीं थी और दर्शकों की सांसें थमी हुई थीं। हालांकि अंत में लवप्रीत सिल्वर तक ही सीमित रह गए, लेकिन उनके संघर्ष, साहस और प्रदर्शन ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया।
स्नैच में दिखाया दम, सबसे ज्यादा वजन उठाकर बनाई बढ़त
प्रतियोगिता के पहले चरण स्नैच में लवप्रीत सिंह का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने पहले प्रयास में 168 किलोग्राम वजन आसानी से उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 173 किलोग्राम का सफल प्रयास किया। अंतिम प्रयास में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर नया शानदार प्रदर्शन किया और न्यूजीलैंड के डेविड लिटी पर 10 किलोग्राम की मजबूत बढ़त बना ली।
स्नैच के बाद ऐसा लग रहा था कि गोल्ड मेडल भारत की झोली में आने वाला है। लवप्रीत आत्मविश्वास से भरपूर दिखाई दे रहे थे और स्टेडियम में मौजूद भारतीय समर्थकों का उत्साह चरम पर था।
क्लीन एंड जर्क में बदल गया मुकाबले का पूरा समीकरण
दूसरे चरण क्लीन एंड जर्क में मुकाबला पूरी तरह बदल गया। लवप्रीत ने पहले 205 किलोग्राम और फिर 212 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने गोल्ड सुनिश्चित करने के लिए अपनी आखिरी कोशिश में 217 किलोग्राम उठाने का फैसला किया।
यह फैसला बेहद साहसी था। अगर वह इस लिफ्ट में सफल हो जाते तो न केवल गोल्ड मेडल जीतते बल्कि नया गेम्स रिकॉर्ड भी बना सकते थे। उन्होंने वजन को शानदार तरीके से ‘क्लीन’ किया, लेकिन ‘जर्क’ के दौरान उसे सिर के ऊपर पूरी तरह स्थिर नहीं रख सके। इसी एक असफल प्रयास ने मुकाबले की दिशा बदल दी।
दूसरी ओर न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने शानदार वापसी करते हुए 223 किलोग्राम वजन उठाया और नया गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। कुल 389 किलोग्राम वजन के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया, जबकि लवप्रीत 388 किलोग्राम के साथ केवल 1 किलोग्राम के अंतर से गोल्ड से चूक गए।
‘कम ऑन जट्टा’ के नारों से गूंज उठा स्टेडियम
लवप्रीत के अंतिम प्रयास के दौरान स्टेडियम का माहौल पूरी तरह भारत के पक्ष में नजर आया। दर्शक लगातार “कम ऑन जट्टा” और “कम ऑन सिंह” के नारे लगा रहे थे। हर किसी को उम्मीद थी कि भारतीय खिलाड़ी इतिहास रच देगा।
हालांकि आखिरी प्रयास सफल नहीं हो सका, लेकिन लवप्रीत ने जिस आत्मविश्वास और जुझारूपन का परिचय दिया, उसने उन्हें करोड़ों भारतीयों का हीरो बना दिया।
दर्जी पिता के बेटे ने मेहनत से बदली किस्मत
6 सितंबर 1997 को पंजाब के सीमावर्ती जिले अमृतसर के बाल सिकंदर गांव में जन्मे लवप्रीत सिंह बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता पेशे से दर्जी हैं, जबकि उनके दादा सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करते थे।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने बेटे के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। पुश्तैनी काम संभालने के बजाय लवप्रीत ने खेलों को अपना भविष्य चुना। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्थानीय DAV ग्राउंड में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की और दिन-रात मेहनत करके खुद को देश के सर्वश्रेष्ठ हेवीवेट खिलाड़ियों में शामिल कर लिया।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
साल 2010 में वेटलिफ्टिंग शुरू करने वाले लवप्रीत ने स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में लगातार अभ्यास किया। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व करने के बाद वर्ष 2017 में उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के पटियाला स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली। यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को नई उड़ान मिली।
उन्होंने शुरुआत में 105 किलोग्राम वर्ग में खेलते हुए जूनियर कॉमनवेल्थ और एशियन जूनियर चैंपियनशिप में पदक जीते। बाद में अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महासंघ द्वारा नई भार वर्ग प्रणाली लागू होने के बाद वे 109 किलोग्राम वर्ग में पहुंचे और लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे।
पहले भी जीत चुके हैं कई बड़े मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सिल्वर लवप्रीत के करियर का पहला बड़ा पदक नहीं है। इससे पहले उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया था। इसके अलावा कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2022 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हेवीवेट वेटलिफ्टरों में शामिल हैं और आने वाले वर्षों में भारत के लिए कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पदक जीत सकते हैं।
भारत को मिला भविष्य का गोल्डन स्टार
भले ही इस बार लवप्रीत सिंह गोल्ड मेडल से सिर्फ 1 किलोग्राम दूर रह गए, लेकिन उनका प्रदर्शन किसी चैंपियन से कम नहीं था। एक दर्जी के बेटे का छोटे से गांव से निकलकर विश्व मंच पर देश का तिरंगा ऊंचा करना करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है।
लवप्रीत सिंह की यह उपलब्धि बताती है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों के रास्ते की बाधा नहीं बन सकते। मेहनत, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास के दम पर कोई भी खिलाड़ी दुनिया के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकता है। देश को अब उम्मीद है कि यही जुझारू खिलाड़ी आने वाले ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्णिम इतिहास लिखेगा।
