देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) पेपर लीक मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शनिवार, 25 जुलाई को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देहरादून में सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस ने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सुद्धोवाला जेल भेज दिया।
शनिवार सुबह कांग्रेस कार्यकर्ता प्रेमनगर से आगे नंदा की चौकी के पास एकत्र हुए, जहां से उन्होंने उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय कार्यालय तक पैदल मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे तथा वे पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। विश्वविद्यालय कार्यालय के बाहर पहुंचकर कांग्रेस नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है।
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय अधिक तनावपूर्ण हो गया, जब एनएसयूआई कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश करने लगे, जबकि कुछ नेता फायर ब्रिगेड के वाहन पर चढ़ गए। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। बाद में सभी को सुद्धोवाला जेल भेज दिया गया।
इस प्रदर्शन में कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं को रोकने में पूरी तरह विफल रही है और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उनका कहना था कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई और पारदर्शी जांच के बिना छात्रों का विश्वास बहाल नहीं हो सकता।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि उत्तराखंड के युवा वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत और सपनों पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
इधर, यह विरोध प्रदर्शन केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहा। उधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में भी भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग उठाई। इस दौरान कई कार्यकर्ता पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच गए, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में चिंता का माहौल है और सरकार को इस विषय पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
वहीं हरिद्वार जिले के लक्सर में भी भीम आर्मी ने NEET पेपर लीक मामले और दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में शिव चौक पर उग्र प्रदर्शन किया। संगठन के कैप्टन दीपक सेठपुर के नेतृत्व में चल रही पांच दिवसीय भूख हड़ताल को विभिन्न सामाजिक और किसान संगठनों का समर्थन मिलने लगा है। भारतीय किसान यूनियन (पटेल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी कीरत सिंह भी आंदोलन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए स्वयं भी भूख हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की।
राज्यभर में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर युवाओं और राजनीतिक दलों में व्यापक असंतोष है। कांग्रेस सहित विभिन्न संगठनों का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई नियमानुसार की गई।
फिलहाल UTU पेपर लीक मामले की जांच जारी है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, सरकार के अगले कदम और न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। छात्रों, अभिभावकों और समाज की अपेक्षा है कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
