देहरादून: देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ को लेकर उपजा विवाद अब केवल कोर्ट-कचहरी और बयानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के लाखों होनहार युवाओं के सपनों और जिंदगियों को लीलने लगा है। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के खिलाफ देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आक्रोश की आग सुलग उठी है।
हाल ही में 23 वर्षीय मेडिकल एस्पिरेंट रिया थापा की असमय मौत ने इस NEET Paper Leak Controversy के दर्दनाक मानवीय पहलू को सामने ला दिया है। इसके विरोध में कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देहरादून के पूजा विहार स्थित रिया थापा के निवास से लेकर शहर के मुख्य मार्गों तक कैंडल मार्च और मशाल जुलूस निकालकर युवाओं और विपक्ष ने व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है।
एक होनहार सपने का दर्दनाक अंत: कौंध रहे कई सवाल
मूल रूप से देहरादून की रहने वाली 23 साल की रिया थापा का शव बीते दिनों उसके कमरे में फंदे से लटका मिला था। रिया कोई आम छात्रा नहीं थी, बल्कि वह मेधा और कड़े परिश्रम का प्रतीक थी। 12वीं की परीक्षा में 97.6 फीसदी अंक प्राप्त करने वाली रिया का सपना देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डॉक्टर बनने का था। वह पिछले कुछ समय से री-नीट (Re-NEET) परीक्षा की तैयारी में दिन-रात एक कर रही थी।
परिजनों और करीबियों के मुताबिक, परीक्षाओं में लगातार आ रही धांधली, पेपर लीक की खबरों और अनिश्चित भविष्य ने उसे भीतर तक तोड़ दिया था। सालों की मेहनत के बाद भी जब व्यवस्था की कमियों के कारण परीक्षा का भविष्य अधर में लटका दिखा, तो इस होनहार छात्रा ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रिया की यह खामोश विदाई आज देश की पूरी शिक्षा प्रणाली पर एक गहरा और तीखा सवालिया निशान लगाती है।
कैंडल मार्च में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी श्रद्धांजलि
रिया थापा को न्याय दिलाने और परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों, रिश्तेदारों और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने रिया के निवास पूजा विहार से एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। मार्च की शुरुआत में रिया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और दो मिनट का मौन रखकर उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान वहां मौजूद हर आंख नम थी और माहौल में व्यवस्था के प्रति गहरा रोष साफ महसूस किया जा रहा था।
मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता व युवा नेता वैभव वालिया ने इस मौके पर बेहद भावुक लेकिन तीखा बयान दिया।
“रिया थापा की असमय मृत्यु केवल एक परिवार की निजी क्षति नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था की विफलता का एक जीवंत और वीभत्स प्रतीक है। NEET Paper Leak Controversy समेत देश की तमाम बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक, संस्थागत भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही ने देश के लाखों युवाओं के भविष्य को अंधेरे कुएं में धकेल दिया है।” — वैभव वालिया, कांग्रेस नेता
वालिया ने आगे कहा कि सालों-साल तपस्या करने वाले छात्रों का अब इस सरकारी व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उनके सपनों के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है और सरकार युवाओं को सुरक्षा और निष्पक्षता देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
‘अब युवाओं से खिलवाड़ मंजूर नहीं’— ज्योति रौतेला के नेतृत्व में मशाल जुलूस
देहरादून की छात्रा रिया थापा को न्याय दिलाने और देश भर के पीड़ित छात्रों की आवाज को बुलंद करने के संकल्प के साथ कांग्रेस पार्टी की महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में देहरादून की सड़कों पर एक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। इस जन आंदोलन में न केवल युवा और छात्र, बल्कि बड़ी संख्या में अभिभावक और समाज के प्रबुद्ध नागरिक भी मशालें थामे सड़कों पर उतरे।
हाथों में जलती मशालें और गगनभेदी नारे इस बात का सबूत थे कि अब देश का युवा चुप बैठने वाला नहीं है। जुलूस का नेतृत्व कर रही ज्योति रौतेला ने कहा:
“इस जन आंदोलन में समाज के हर वर्ग और विशेषकर युवाओं की भारी भागीदारी ने सरकार को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है। युवा अब अपने भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता या खिलवाड़ स्वीकार नहीं करेंगे। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में जो छात्रों का राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है, वह आज देश के कोने-कोने में जन-जन की आवाज बन चुका है।”
रौतेला ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल रिया थापा को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक छात्र के सम्मान, जवाबदेही और एक पूरी तरह से निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की बहाली की सामूहिक लड़ाई है।
सिस्टम की खामोशी और सुलगता आक्रोश
रिया थापा की आत्महत्या की घटना ने अभिभावकों के भीतर एक गहरा डर पैदा कर दिया है। प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों का कहना है कि वे पेट काटकर बच्चों को कोचिंग और पढ़ाई के लिए बाहर भेजते हैं, लेकिन अंत में उन्हें पेपर लीक और धांधली जैसी खबरें मिलती हैं। NEET Paper Leak Controversy ने यह साबित कर दिया है कि जब तक परीक्षा माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई नहीं होगी, तब तक देश की मेधा इसी तरह दम तोड़ती रहेगी।
देहरादून से उठी न्याय की यह चिंगारी अब एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। देखना यह होगा कि युवाओं के इस भारी आक्रोश और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद क्या सोई हुई प्रशासनिक व्यवस्था जागती है, या फिर आने वाले दिनों में देश को किसी और ‘रिया’ के रूप में इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
