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The Hill India > Blog > देश > नई दिल्ली: शिक्षक पर्व की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, एआईसीटीई और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की ओर से उद्घाटन सम्मेलन आयोजित किया गया।
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नई दिल्ली: शिक्षक पर्व की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, एआईसीटीई और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की ओर से उद्घाटन सम्मेलन आयोजित किया गया।

Rajesh Dabral
Last updated: September 28, 2022 4:52 pm
Rajesh Dabral
Published: September 6, 2022
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शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, डॉ. सुभाष सरकार और डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने शिक्षक पर्व 2022 का उद्घाटन किया

इस अवसर पर शिक्षकों को उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए

शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, डॉ. सुभाष सरकार और डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने संयुक्त रूप से शिक्षक पर्व 2022 का उद्घाटन किया। शिक्षकों को सम्मानित करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षक पर्व मनाया जा रहा है। शिक्षक पर्व की शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई, एआईसीटीई और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की ओर से आज नई दिल्ली में उद्घाटन सम्मेलन आयोजित किया गया।

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सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि बच्चे शिक्षकों को रोल मॉडल (आदर्श) के रूप में देखते हैं और वे छात्रों के चरित्र को गढ़ने और मूल्य आधारित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत बनाने के पंच-प्रण के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षकों पर विशेष ध्यान दे रही है। समग्र शिक्षा और पीएम-पोषण जैसी केंद्रीय योजनाएं एनईपी 2020 की सिफारिशों के अनुरूप हैं। एनईपी 2020 के तहत शिक्षकों को एकीकृत और बहुविषयक दृष्टिकोण की अवधारणा के तहत भविष्य की कार्ययोजना पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का बहुमूल्य सहयोग और समन्वय छात्रों के कौशल एवं चरित्र निर्माण की कुंजी एवं प्रेरणा है।

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डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने शिक्षकों समेत शिक्षा जगत के प्रयासों की सराहना की और एनईपी 2020 के कार्यान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक चाहे स्कूलों में हों या उच्च शिक्षा में उनका लक्ष्य एकसमान होता है और इस तरह के सम्मान का उद्देश्य अध्यापन की विशेष योग्यता, सर्वोत्तम प्रथाओं, शैक्षणिक नेतृत्व और संस्था निर्माण को मान्यता प्रदान करना है।

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इस मौके पर राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की प्रधानमंत्री के साथ बातचीत ने उन्हें और प्रेरित किया है और वे ‘शिक्षित भारत और विकसित भारत’ के सच्चे संदेशवाहक और ब्रांड एंबेसडर बनेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कल घोषित पीएम श्री पहल के बारे में भी बताया और इसे ऐतिहासिक निर्णय कहा, जिसका शिक्षा प्रणाली पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने छात्रों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका को समझाया और कहा कि न केवल छात्रों का यह कर्तव्य है कि वे शिक्षक की आज्ञा का पालन करें बल्कि शिक्षकों का भी कर्तव्य है कि वे विद्यार्थियों की जरूरतों की समीक्षा करें। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हमारी शिक्षा प्रणाली को सशक्त और अधिक आत्मनिर्भर बना रही है।

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मंत्रियों ने सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के 19 प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को ‘शिक्षण और विद्यालय नेतृत्व में उत्कृष्टता के लिए सीबीएसई सम्मान 2021-22’ प्रदान किए। इन पुरस्कार विजेताओं का चयन अकादमिक और व्यावसायिक उपलब्धियों, समुदाय में योगदान, नवीन शिक्षण पद्धतियों, छात्रों के व्यापक विकास पर प्रभाव और राष्ट्रीय स्तर पर बनी चयन समिति के साथ साक्षात्कार के आधार पर किया गया था।

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उन्होंने पीडब्ल्यूडी/दिव्यांग श्रेणी में एक विशिष्ट पुरस्कार सहित 14 संकाय सदस्यों को एआईसीटीई के राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया। प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की एक टीम ने भारत के एआईसीटीई स्वीकृत संस्थानों से इन 14 विजेताओं का चयन कड़े, व्यापक और तीन चरण के मूल्यांकन के बाद किया। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने असाधारण शिक्षकों, शिक्षण उत्कृष्टता, संस्थागत नेतृत्व, नवीनता और रचनात्मकता की पहचान कर उन्हें सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक पुरस्कार (एनटीटीए) की स्थापना की थी।

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शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की निम्नलिखित अभिनव पहलों को भी शुरू किया गया है:

  • स्कूल जाने वाले बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य के मामलों का जल्द पता लगाने के लिए पुस्तिका- यह शिक्षकों, परामर्शदाताओं और अन्य हितधारकों के प्रशिक्षण के लिए एक व्यापक हैंडबुक है। मानसिक स्वास्थ्य और जीवन कौशल से संबंधित मामलों के विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र नागपाल की अध्यक्षता में बनी समिति द्वारा किए गए विचार-विमर्श के आधार पर यह मॉड्युलर हैंडबुक तैयार की गई है।
  • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण पर रिपोर्ट- स्कूली छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और बेहतरी- 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 3,79,842 छात्रों पर मनोदर्पण सेल, डीईपीएफई, एनसीईआरटी द्वारा जनवरी-मार्च 2022 के बीच एक सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वे ने कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सेहत के बारे में उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश की। सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चला है कि अधिकांश छात्र स्कूली जीवन से प्रसन्न और संतुष्ट थे, हालांकि माध्यमिक स्तर पर जाने पर इसमें गिरावट आई। पढ़ाई-लिखाई, परीक्षा और नतीजे छात्रों की चिंता की मुख्य वजह बताई गई। तनाव को कम करने के लिए छात्रों की ओर से किए गए प्रमुख उपायों में योग और ध्यान, सोचने के तरीके को बदलने और पत्रिकाओं में लिखना बताया गया।
  • राष्ट्रीय मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान अध्ययन रिपोर्ट- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) पढ़ने और लिखने की क्षमता और बुनियादी स्तर पर संख्या ज्ञान को सबसे ज्यादा महत्व देती है क्योंकि यह भविष्य की स्कूली शिक्षा और आजीवन सीखने के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में सभी बच्चों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान निपुण (राष्ट्रीय साक्षरता एवं संख्या ज्ञान दक्षता पहल) भारत के तहत एक राष्ट्रीय मिशन बन गया है। एफएलएन मिशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रेड 3 के अंत तक सभी बच्चे वर्ष 2026-27 तक बुनियादी रूप से सीखने के मानकों को हासिल करें।

मूलभूत शिक्षण अध्ययन ने 10 हजार स्कूलों के करीब 86,000 ग्रेड-3 के छात्रों को कवर किया। इस अध्ययन के सैंपल में राज्य सरकार के स्कूल, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, निजी मान्यता प्राप्त और केंद्र सरकार के विद्यालय शामिल थे। शोध में 18 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने हिस्सा लिया। एफएलएस 20 भाषाओं में किया गया, जिसे संबंधित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाया गया है। इस अध्ययन के जरिए बच्चों में बुनियादी स्तर पर सीखने की क्षमता का आकलन किया गया और निष्कर्षों का उपयोग व्यवस्थित रूप से योजना तैयार करने में किया जाएगा। यह अध्ययन बिल्कुल अनूठा है क्योंकि यह दुनिया में पहली बार है कि वैश्विक निपुणता तंत्र के आधार पर समझ के साथ मौखिक रूप से धाराप्रवाह पढ़ने और संख्या ज्ञान बेंचमार्क 20 भाषाओं के लिए तैयार किए गए हैं। एक-एक के हिसाब से मूल्यांकन का यह अब तक का सबसे बड़ा सैंपल है।

सीखने की अक्षमताओं और शब्दावली के लिए स्क्रीनिंग टूल्स मोबाइल एप- स्कूलों के लिए दिव्यांगता स्क्रीनिंग चेकलिस्ट मोबाइल एप और बुकलेट जारी किया गया है। आरपीडब्ल्यूडी कानून 2016 के तहत ‘प्रशस्त’ 21 अक्षमताओं को कवर करता है। इस पहल से जल्द स्क्रीनिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे दिव्यांग बच्चों को समग्र शिक्षा के प्रावधानों के अनुसार प्रमाण पत्र मिल सकेगा। प्रशांत मोबाइल एप को एंड्रॉयड प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। अलवर, राजस्थान के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त एक स्कूल शिक्षक श्री इमरान खान के सहयोग से एनसीईआरटी द्वारा इसे डिजाइन किया गया है।

  • खिलौना आधारित शिक्षण पद्धति का शुभारंभ- स्कूली शिक्षा, बचपन में प्रारंभिक देखभाल एवं शिक्षा और शिक्षकों की शिक्षा के पाठ्यक्रम में स्वदेशी खिलौने और शिक्षण पद्धित के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए खिलौने पर आधारित अध्यापन शास्त्र की हैंडबुक तैयार की गई है। बुनियादी स्तर पर, प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक विभिन्न स्तरों पर कई तरह के खिलौनों और खेल के साथ कौशल, योग्यता और सीखने के परिणामों की मैपिंग शिक्षकों को उम्र के हिसाब से खिलौनों को चुनने में मदद करेगी और वे विभिन्न विचारों, सिद्धातों को अच्छे से समझा सकेंगे।
  • शिक्षा शब्दकोष- स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा शब्दकोष नाम से महत्वपूर्ण शब्दों की व्यापक शब्दावली तैयार की है। इस शब्दकोष में ऐसे शब्द और संदर्भ शामिल किए गए हैं जिनका शिक्षाविद, शैक्षिक प्रशासक, शिक्षक, परीक्षक आदि व्यापक रूप से उपयोग करते हैं।

उपरोक्त के अलावा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा तैयार की गई दो पुस्तिकाएं भी जारी की गईं।

  • रोजगार योग्यता कौशल पाठ्यक्रम- कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) ने क्वेस्ट एलायंस, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और एमएसडीई ईकोसिस्टम के तहत विभिन्न पाठ्यक्रम निकायों के सहयोग से रोजगार योग्यता कौशल पर पाठ्यक्रम को नया रूप दिया है। 15,600 से ज्यादा सरकारी और निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के 25 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम से लाभ होगा जिसमें हिंदी और अंग्रेजी में एक नया और विस्तारित 120 घंटे का पाठ्यक्रम शामिल किया गया है। कुछ मॉड्यूल में रोजगार योग्यता कौशल का परिचय, डिजिटल कौशल, नागरिकता, विविधता और समावेश, करियर विकास और लक्ष्य निर्धारण, काम और उद्यमिता की तैयारी शामिल हैं। दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों पाठ्यक्रमों के लिए 30, 60 और 90 घंटे की अवधि के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।

यह पाठ्यक्रम सीखने वालों को तीन प्रमुख लाभ प्रदान करेगा- खुद से सीखने की मानसिकता तैयार होगी, महामारी के बाद की दुनिया में करियर के लिए तैयार हो सकेंगे और नए करियर के बारे में जागरूकता विकसित होने के साथ ही 21वीं सदी के कौशल से लैस होंगे। यह शिक्षकों को भी नए युग की कक्षाओं के लिए अपने कौशल को उन्नत बनाने और मिश्रित शिक्षण मॉडल से परिचित कराने में मदद करेगा। संशोधित पाठ्यक्रम के हिसाब से किताबें जारी की जा रही हैं, मिश्रित शिक्षा के लिए डिजिटल प्रतियां जल्द ही उपलब्ध होंगी।

प्रशिक्षकों को एक सहायक मार्गदर्शिका प्रदान की जाएगी जिससे वे मिश्रित शिक्षण मॉड्यूल का उपयोग करके संशोधित पाठ्यक्रम को पढ़ा सकें। छात्रों की कार्यपुस्तिका का डिजिटल संस्करण भारत कौशल पोर्टल और रोजगार क्षमता कौशल पोर्टल पर उपलब्ध है। इसके अलावा, एमएसडीई और नेशनल इंस्ट्रक्शनल मीडिया इंस्टिट्यूट (एनआईएमआई) ने राज्य के विभागों द्वारा उपयोग के लिए इन पुस्तकों को प्रकाशित करने की योजना बनाई है।

  • इग्नू और एनआईओएस पाठ्यक्रमों में आईटीआई आवेदकों के लिए एक क्लिक पर पंजीकरण- आईटीआई प्रशिक्षुओं की आवश्यकता के अनुसार 10वीं या 12वीं करने या डिग्री कोर्स करने में सुविधा के लिए एमएसडीई ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। कोई भी प्रशिक्षु एक अतिरिक्त भाषा पाठ्यक्रम लेकर अपनी पसंद के एनआईओएस प्रोग्राम के लिए नामांकन कर सकता है। एनआईओएस से कोर्स पूरा करने के बाद प्रशिक्षु को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जो 10वीं या 12वीं के समकक्ष होता है। इसी तरह से 12वीं पास आईटीआई प्रशिक्षु इग्नू से डिग्री स्तर के कार्यक्रम के लिए नामांकन कर सकते हैं। इग्नू ने अपने अंडर-ग्रेजुएट कार्यक्रमों में सीधे प्रवेश के उद्देश्य से दो वर्षीय एनटीसी (कक्षा 10 के बाद) को चार विषयों के साथ मान्यता दी है जो 10+2 के समकक्ष होगा।

प्रक्रिया को आसान बनाने और एनआईओएस, इग्नू और अप्रेंटिसशिप के लिए आईटीआई प्रशिक्षुओं को सुगमतापूर्वक पंजीकरण की सुविधा के लिए डीजीटी के डीजीटीएमआईएस (https://ncvtmis.gov.in) पोर्टल पर प्रशिक्षु प्रोफाइल पेज के जरिए एक क्लिक समाधान प्रदान किया गया है। डीजीटीएमआईएस पोर्टल को दोतरफा एपीआई के माध्यम से एनआईओएस, इग्नू और अप्रेंटिसशिप पोर्टलों के साथ एकीकृत किया गया है।

प्रशिक्षु के पास एनसीवीटीएमआईएस पोर्टल या एनआईओएस, इग्नू या अप्रेंटिसशिप के अलग-अलग पोर्टलों के माध्यम से पंजीकरण करने का विकल्प होता है। प्रशिक्षु अपने आईटीआई रोल नंबर, पिता का नाम और जन्मतिथि दर्ज करके प्रशिक्षु प्रोफाइल पेज के माध्यम से अपने प्रोफाइल तक पहुंच सकता है। प्रशिक्षु को उसकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर एनआईओएस/इग्नू/अप्रेंटिसशिप में पंजीकरण का विकल्प दिखाई देता है। वह अपनी पसंद के हिसाब से विकल्प का चयन कर सकता है और एक क्लिक पर कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कर सकता है।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और साक्षरता सचिव श्रीमती अनीता करवाल, उच्च शिश्रा सचिव श्री संजय मूर्ति, कौशल विकास और शिक्षा मंत्रालय में सचिव श्री राजेश अग्रवाल, सीबीएसई के अध्यक्ष, एआईसीटीई के अध्यक्ष समेत संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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