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तबादलों पर बड़ा फैसला: उत्तराखंड सरकार ने बढ़ाई समय सीमा, अब 30 जून तक होंगे अधिकारियों-कर्मचारियों के ट्रांसफर

The Hill India News
Last updated: June 10, 2026 9:53 am
The Hill India News
Published: June 10, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों को बड़ी राहत देते हुए तबादला सत्र 2026-27 की समय सीमा में 20 दिनों का विस्तार कर दिया है। पहले जहां अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण की अंतिम तिथि 10 जून 2026 निर्धारित थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 30 जून 2026 कर दिया गया है। शासन के इस फैसले से उन विभागों को काफी राहत मिली है जो निर्धारित समय सीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे।

Contents
विभागों की मांग पर बढ़ाई गई समय सीमासंशोधित कार्यक्रम के तहत होगी कार्रवाईकई विभागों में लंबित थी प्रक्रियाक्या है स्थानांतरण अधिनियम का उद्देश्य?सभी अधिकारियों को दिए गए निर्देशकर्मचारियों और विभागों की नजर प्रक्रिया पर

कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार यह निर्णय विभागों से प्राप्त सुझावों, फीडबैक और स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान सामने आई व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। शासन का मानना है कि अतिरिक्त समय मिलने से विभाग अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरा कर सकेंगे।

विभागों की मांग पर बढ़ाई गई समय सीमा

उत्तराखंड में हर वर्ष स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के तहत एक निश्चित समय-सारिणी के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं। इस वर्ष भी अप्रैल माह में शासन ने सभी विभागों को स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने और तय समय के भीतर उसे पूरा करने के निर्देश जारी किए थे।

हालांकि, कई विभाग विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से निर्धारित अवधि के भीतर तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। कुछ विभागों में रिक्त पदों का सही आकलन करने, कर्मचारियों का अद्यतन डाटा तैयार करने और संवेदनशील पदों से जुड़े मामलों के निस्तारण में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। इसके चलते कई विभागों ने शासन से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था।

इन अनुरोधों पर विचार करने के बाद शासन ने तबादला प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त 20 दिन देने का फैसला लिया है। इससे विभागों को लंबित मामलों का निस्तारण करने और स्थानांतरण प्रस्तावों की समीक्षा के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

संशोधित कार्यक्रम के तहत होगी कार्रवाई

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल अंतिम तिथि ही नहीं बढ़ाई गई है, बल्कि स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़े अन्य चरणों की समय सीमा में भी 20 दिनों का विस्तार किया गया है। इसका अर्थ है कि विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार करने, उनकी जांच करने, अनुमोदन प्राप्त करने और अंतिम आदेश जारी करने से संबंधित सभी प्रक्रियाएं अब नई समय-सारिणी के अनुसार संचालित होंगी।

सरकार का मानना है कि इससे जल्दबाजी में लिए जाने वाले निर्णयों की संभावना कम होगी और स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक संतुलित एवं निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सकेगी।

कई विभागों में लंबित थी प्रक्रिया

राज्य के अनेक विभागों में अभी तक तबादलों की अंतिम सूची तैयार नहीं हो पाई थी। कुछ स्थानों पर कर्मचारियों की कमी, महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती और प्रशासनिक आवश्यकताओं के कारण स्थानांतरण संबंधी फैसले लंबित थे। कई विभागों को यह चिंता भी थी कि यदि समय सीमा समाप्त हो गई तो अधूरी प्रक्रिया के कारण प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

विशेष रूप से दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के तबादलों को लेकर विभागों को कई स्तरों पर समन्वय स्थापित करना पड़ रहा था। ऐसे मामलों में अतिरिक्त समय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। शासन के इस फैसले ने विभागों की इन चिंताओं को काफी हद तक दूर कर दिया है।

क्या है स्थानांतरण अधिनियम का उद्देश्य?

उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए लागू वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी पर्याप्त संख्या में अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध रहें।

साथ ही लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों का नियमानुसार स्थानांतरण किया जाता है, ताकि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। यह व्यवस्था कर्मचारियों को विभिन्न क्षेत्रों में काम करने का अवसर भी प्रदान करती है तथा सरकारी सेवाओं के बेहतर संचालन में मदद करती है।

हालांकि, हर वर्ष स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान कुछ विभागों को समय सीमा और प्रशासनिक औपचारिकताओं से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष भी ऐसी ही परिस्थितियां सामने आईं, जिसके बाद शासन को समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा।

सभी अधिकारियों को दिए गए निर्देश

अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत द्वारा जारी आदेश में सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों, गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आयुक्तों तथा सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे संशोधित समय-सारिणी के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इसके अलावा शासनादेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय तथा सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को भी भेजी गई है, ताकि सभी संबंधित विभागों को संशोधित आदेश की जानकारी समय पर मिल सके।

कर्मचारियों और विभागों की नजर प्रक्रिया पर

समय सीमा बढ़ने के बाद अब विभागों को स्थानांतरण प्रस्तावों की गहन समीक्षा करने और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने का अवसर मिलेगा। इससे कर्मचारियों की शिकायतों और लंबित मामलों के समाधान में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

वहीं कर्मचारी संगठनों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि विस्तारित अवधि के दौरान स्थानांतरण प्रक्रिया कितनी पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप पूरी की जाती है। शासन का दावा है कि अतिरिक्त समय मिलने से पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और प्रशासनिक हितों के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों का भी बेहतर तरीके से ध्यान रखा जा सकेगा।

उत्तराखंड सरकार के इस फैसले को विभागों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब सभी संबंधित विभागों के पास 30 जून तक का समय होगा, जिसके दौरान वे लंबित स्थानांतरण मामलों का निस्तारण कर सकेंगे और नई समय-सारिणी के अनुसार प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकेंगे।

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