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PoK में विरोध की आवाज पर पाकिस्तान का शिकंजा, 100 से ज्यादा मौतों के बाद JAAC के 4 नेताओं पर रखा 1 करोड़ का इनाम

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अपने अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे लोगों के खिलाफ पाकिस्तान प्रशासन और सेना की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को तनाव और भय के माहौल में धकेल दिया है। प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में 100 से अधिक लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबरों के बीच अब पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के चार प्रमुख नेताओं के सिर पर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।

इस कदम ने पहले से ही उबल रहे जनाक्रोश को और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए दमनकारी नीतियां अपना रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों का खुलेआम हनन किया जा रहा है।

चार नेताओं को घोषित किया गया वांछित

प्रशासन द्वारा जिन नेताओं पर इनाम रखा गया है, उनमें शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, ख्वाजा मेहरान अरशद और सरदार अमान खान शामिल हैं। ये सभी संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं और हाल के विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे थे।

जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन JAAC से जुड़े इन व्यक्तियों की गिरफ्तारी में सहायता करने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 मिलियन यानी 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

क्या है JAAC और क्यों भड़का आंदोलन?

संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) PoK में सक्रिय एक प्रमुख नागरिक संगठन है, जो लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के अधिकारों, संसाधनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे उठाता रहा है। हालिया विवाद तब शुरू हुआ जब 27 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले 45 में से 12 सीटों को शरणार्थियों के लिए आरक्षित किए जाने का निर्णय सामने आया।

JAAC और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस फैसले से क्षेत्र के मूल निवासियों के राजनीतिक अधिकार प्रभावित होंगे और उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी कम हो जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

हालांकि, आंदोलन केवल सीट आरक्षण तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने बिजली संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, इंटरनेट बंदी, संसाधनों के कथित शोषण और राजनीतिक उपेक्षा जैसे कई अन्य मुद्दों को भी उठाया। इन मांगों के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव शुरू हो गया।

हिंसक झड़पों में 100 से अधिक लोगों की मौत

रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जो बाद में हिंसक रूप लेती चली गईं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि गोलीबारी और कार्रवाई में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

इसके अलावा सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं, जिससे लोगों को सूचना और संचार के साधनों से वंचित होना पड़ा।

JAAC पर लगाया गया प्रतिबंध

पिछले सप्ताह पाकिस्तान समर्थित प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए JAAC पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। प्रशासन का कहना है कि संगठन की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन रही थीं।

हालांकि JAAC ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताया है। संगठन के सदस्यों का कहना है कि सरकार उन्हें आतंकवादी साबित करने की कोशिश कर रही है, जबकि वे केवल लोकतांत्रिक अधिकारों और जनता की समस्याओं को उठाने का काम कर रहे हैं।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर भारत ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और मानवाधिकारों का उल्लंघन गंभीर चिंता का विषय है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी पाकिस्तान को उसके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नई दिल्ली का कहना है कि लोगों की आवाज को हिंसा और दमन के जरिए दबाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

मानवाधिकार आयोग ने भी उठाए सवाल

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी PoK में हो रही घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध, अत्यधिक बल प्रयोग, इंटरनेट बंदी और नागरिकों की मौतों की निंदा की है।

अपने बयान में आयोग ने कहा कि जब तक क्षेत्र के लोगों को राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा जाएगा, तब तक किसी भी प्रकार की बातचीत या समाधान सार्थक नहीं हो सकता। आयोग ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है और उनकी शिकायतों का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए।

PoK में बढ़ रहा असंतोष

विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर असंतोष मौजूद है। हालिया घटनाओं ने उस असंतोष को और अधिक उजागर कर दिया है। लगातार हो रहे विरोध, प्रशासनिक कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों ने क्षेत्र की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

वर्तमान हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि PoK में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। एक ओर पाकिस्तान प्रशासन आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों में नाराजगी और विरोध का स्वर लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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