नई दिल्ली/वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठ गया है। ओमान के तट पर अमेरिकी सेना के ‘अपाचे हेलीकॉप्टर’ के क्रैश होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य जंग शुरू हो गई है। वैश्विक भू-राजनीति को हिलाकर रख देने वाली इस घटना में, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस टकराव के साथ ही दुनिया पर Iran US War 2026 का सबसे बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी एक बेहद कड़े बयान में कहा कि ये हमले “ईरान की गैर-वाजिब आक्रामकता का उचित और आनुपातिक जवाब” हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया था और वादा किया था कि अमेरिका इसका ऐसा सबक सिखाएगा जिसे दुनिया याद रखेगी। राष्ट्रपति ट्रंप की इस सख्त चेतावनी के चंद घंटों के भीतर ही अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोन्स ने ईरान की धरती को दहलाना शुरू कर दिया।
ईरान के जास्क काउंटी और तटीय इलाकों में भारी बमबारी, गूंजे धमाके
ईरान की आधिकारिक ‘तस्नीम समाचार एजेंसी’ की रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी ईरान के तटीय इलाकों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय सूत्रों, निवासियों और आस-पास के गांवों के लोगों ने जास्क काउंटी (Jask County) इलाके में सिलसिलेवार और बेहद भीषण धमाकों की आवाजें सुनी हैं। ग्राउंड जीरो से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार सुबह से अब तक जास्क काउंटी में धमाके सुने जाने की यह दूसरी बड़ी घटना है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान के उन तटीय रडार और मिसाइल ठिकानों को पंगु बना देना चाहता है, जो फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं मिसाइलें
अमेरिकी सेना के इस एकतरफा और भीषण हमले के बाद ईरान ने भी घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान की ‘टॉप जॉइंट मिलिट्री कमांड’ ने एक आपातकालीन बयान जारी कर घोषणा की है कि ईरान ने भी अमेरिकी हमलों का करारा जवाब देना शुरू कर दिया है।
ईरानी सेना अब इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बेसों (US Military Bases) को निशाना बना रही है। ईरानी सैन्य कमान के मुताबिक:
“ईरान की संप्रभुता पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में, इस क्षेत्र में सक्रिय हमारे मिसाइल दस्तों ने मध्य-पूर्व में मौजूद कई अमेरिकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। किसी भी आक्रामकता का अंत अमेरिकी सेना की तबाही के साथ होगा।”
केशम द्वीप, सिरिक और बंदर अब्बास में तबाही के मंजर
ईरान की एक और प्रमुख मीडिया आउटलेट ‘मेहर न्यूज एजेंसी’ ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया है कि दक्षिणी ईरान का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) इस समय अमेरिकी हमलों का मुख्य केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, केशम द्वीप पर अमेरिकी हमलों की वजह से एक के बाद एक छह भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
प्रारंभिक खुफिया और सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला किसी आत्मघाती ड्रोन से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक अमेरिकी लड़ाकू विमानों (F-35 या F-22 रैप्टर) द्वारा बेहद सटीकता से किया गया है। इसके अलावा, ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास (Bandar Abbas) और सिरिक (Sirik) में भी लगातार कई धमाके सुने गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
‘इतिहास गवाह है, घुसपैठियों का बुरा अंजाम होगा’— ईरान के विदेश मंत्री की सख्त चेतावनी
इस भीषण सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी आग लग चुकी है। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अमेरिका को बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा:
‘युद्ध के मैदान में बार-बार हार का सामना करने के बावजूद, U.S. ने एक बार फिर हमारे इरादे और हमारी संप्रभुता को परखने की बड़ी भूल की है। हमारी ताकतवर और जांबाज सेना किसी भी हमले या बाहरी खतरे का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेगी। अगर अमेरिकी सैनिक खुद को सुरक्षित देखना चाहते हैं, तो वे तुरंत हमारे इलाके (मिडल ईस्ट) को खाली करके चले जाएं। फारस की खाड़ी के इतिहास में घुसपैठ करने वाले बाहरी लोगों के बुरे अंजाम के बारे में कई अध्याय दर्ज हैं।’
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल के बाजारों में हड़कंप
इस अचानक भड़के Iran US War 2026 के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। चूंकि बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक कच्चे तेल के परिवहन का सबसे बड़ा लाइफलाइन रूट हैं, इसलिए इस इलाके में युद्ध छिड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
यदि यह तनाव अगले कुछ दिनों तक और खिंचता है, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक महाशक्तियां इस समय युद्ध को रोकने के लिए आपातकालीन बैठकें बुला रही हैं, लेकिन दोनों देशों के कड़े रुख को देखते हुए फिलहाल शांति के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।



