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झारखंड राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सियासी तनातनी: कांग्रेस के एकतरफा उम्मीदवार ऐलान से INDIA गठबंधन में मचा घमासान, JMM ने दिखाई ताकत

The Hill India News
Last updated: June 5, 2026 12:29 pm
The Hill India News
Published: June 5, 2026
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रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन के भीतर ही खींचतान और शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस द्वारा गठबंधन सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से औपचारिक सहमति लिए बिना अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा करने के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

गुरुवार शाम कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सलाहकार प्रणव झा को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया। यह घोषणा ऐसे समय में हुई जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम निर्णय 5 जून को होने वाली बैठक में लिया जाएगा। कांग्रेस के इस कदम को JMM ने राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा और इसके तुरंत बाद पार्टी नेतृत्व सक्रिय हो गया।

कांग्रेस की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद JMM ने अपने सभी विधायकों और मंत्रियों की आपात बैठक बुला ली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान मौजूद विधायकों और मंत्रियों ने एक स्वर में मांग की कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर JMM को अपने उम्मीदवार उतारने चाहिए। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि पार्टी अपने राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक ताकत को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती।

बैठक के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने बताया कि सभी विधायकों और मंत्रियों ने अपनी भावनाएं पार्टी नेतृत्व के सामने रखी हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष द्वारा जल्द लिया जाएगा, लेकिन कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की भावना यही है कि दोनों सीटों पर JMM के उम्मीदवार मैदान में उतरें।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने जिस तरह जल्दबाजी में उम्मीदवार की घोषणा की, उसने गठबंधन की आंतरिक समन्वय प्रक्रिया को झटका पहुंचाया है। कांग्रेस संभवतः यह संदेश देना चाहती थी कि राज्य में उसकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है और सीट बंटवारे में उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि यह दांव फिलहाल उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है क्योंकि JMM ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है।

यदि विधानसभा में मौजूदा संख्या बल पर नजर डालें तो कांग्रेस की स्थिति उतनी मजबूत नहीं दिखती जितनी उसने प्रदर्शित करने की कोशिश की है। झारखंड विधानसभा में कांग्रेस के पास केवल 16 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए प्रथम वरीयता के आधार पर लगभग 28 विधायकों का समर्थन आवश्यक माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस को जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 12 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए होगा।

सत्ताधारी गठबंधन में कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भाकपा-माले भी शामिल हैं। RJD के चार विधायक हैं और माले के दो विधायक। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह मानना मुश्किल है कि ये सभी विधायक कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में बिना किसी विवाद के लामबंद हो जाएंगे। खासकर तब, जब JMM खुद दोनों सीटों पर दावा ठोकने की तैयारी में दिखाई दे रही है।

दूसरी ओर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। विधानसभा में भाजपा के 21 विधायक हैं। इसके अलावा जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और आजसू के एक-एक विधायक विपक्षी खेमे में हैं। इस प्रकार विपक्षी गठबंधन के पास कुल 24 विधायक हैं। यदि सत्ता पक्ष में मतों का बिखराव होता है तो भाजपा के लिए राज्यसभा की एक सीट जीतने का अवसर बन सकता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि INDIA गठबंधन के भीतर सहमति नहीं बनती है तो चुनाव में द्वितीय वरीयता के वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव का परिणाम केवल संख्या बल से नहीं बल्कि रणनीतिक मतदान और गठबंधन की एकजुटता पर भी निर्भर करेगा।

झारखंड की राजनीति में JMM और कांग्रेस लंबे समय से सहयोगी रहे हैं, लेकिन समय-समय पर सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले पैदा हुआ यह विवाद आने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल दोनों दल सार्वजनिक रूप से गठबंधन को मजबूत बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अंदरखाने चल रही रस्साकशी साफ दिखाई दे रही है।

अब सभी की निगाहें JMM नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यदि पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारती है तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। वहीं यदि किसी समझौते का रास्ता निकलता है तो INDIA गठबंधन अपनी एकजुटता का संदेश देने में सफल हो सकता है।

राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना और नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ झारखंड की सियासत और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम, गठबंधन की रणनीति और विधायकों की निष्ठा चुनावी तस्वीर को पूरी तरह स्पष्ट कर देंगे। फिलहाल कांग्रेस के एकतरफा फैसले ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और राज्यसभा चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है।

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