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CII Summit 2026: मिडिल ईस्ट संकट पर गौतम अदाणी का बड़ा बयान, बोले- एनर्जी और डिजिटल सिक्योरिटी ही अब देश की असली ताकत

The Hill India News
Last updated: May 11, 2026 7:19 am
The Hill India News
Published: May 11, 2026
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नई दिल्ली में आयोजित CII Annual Business Summit 2026 के दौरान गौतम अदाणी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, मिडिल ईस्ट संकट, ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारत के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अब किसी भी देश की असली ताकत सिर्फ उसकी सेना या अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उसकी “एनर्जी सिक्योरिटी” और “डिजिटल सिक्योरिटी” होगी।

Contents
“फ्लैट वर्ल्ड” का दौर खत्म: अदाणीएनर्जी और डिजिटल सिक्योरिटी ही नई शक्ति21वीं सदी की असली स्वतंत्रता क्या है?अमेरिका और चीन से सीखने की जरूरतभारत की सबसे बड़ी ताकत है बढ़ती मांगAI बदलेगा भारत की अर्थव्यवस्थाअदाणी ग्रुप का बड़ा विजनभारत@100 विजन पर जोर

अपने संबोधन में गौतम अदाणी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में ऊर्जा और डेटा पर नियंत्रण ही वैश्विक शक्ति का सबसे बड़ा आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि अब दुनिया पहले जैसी “फ्लैट” या खुली नहीं रह गई है, बल्कि यह “फ्रैक्चर्ड” यानी विभाजित दुनिया में बदल रही है, जहां हर देश अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

“फ्लैट वर्ल्ड” का दौर खत्म: अदाणी

गौतम अदाणी ने कहा कि पिछले करीब 30 वर्षों तक दुनिया को यह विश्वास दिलाया गया कि वैश्वीकरण के कारण सीमाएं खत्म हो रही हैं। सप्लाई चेन हमेशा खुली रहेंगी, ऊर्जा आपूर्ति कभी बाधित नहीं होगी, पूंजी दुनिया में कहीं भी आसानी से जा सकेगी और टेक्नोलॉजी की कोई सीमाएं नहीं होंगी।

लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट और वैश्विक व्यापार तनावों ने यह दिखा दिया कि किसी भी देश को पूरी तरह बाहरी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अब सप्लाई चेन को राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर अब केवल तकनीकी उत्पाद नहीं रहे, बल्कि यह रणनीतिक ताकत बन चुके हैं। डेटा को अब राष्ट्रीय संसाधन की तरह देखा जा रहा है और AI जैसी आधुनिक तकनीकों को सुरक्षित डेटा सेंटरों के भीतर विकसित किया जा रहा है।

एनर्जी और डिजिटल सिक्योरिटी ही नई शक्ति

अदाणी ने अपने भाषण में कहा कि आज के समय में ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। दोनों एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और यही किसी देश की वास्तविक ताकत की दो सबसे महत्वपूर्ण नींव बन चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि जो देश अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण रखेगा, वही अपने औद्योगिक विकास को सुरक्षित रख पाएगा। इसी तरह जो देश कंप्यूटिंग पावर, डेटा और AI तकनीक को नियंत्रित करेगा, वही भविष्य की इंटेलिजेंस और तकनीकी दिशा तय करेगा।

गौतम अदाणी के अनुसार आने वाले वर्षों में वही देश सबसे मजबूत होगा जिसके पास सस्ती और स्थिर ऊर्जा के साथ सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। उन्होंने इसे “नई वैश्विक शक्ति की ज्योमेट्री” बताया।

21वीं सदी की असली स्वतंत्रता क्या है?

अपने संबोधन में गौतम अदाणी ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अगर 1947 राजनीतिक स्वतंत्रता का प्रतीक था, तो 21वीं सदी में असली स्वतंत्रता ऊर्जा और इंटेलिजेंस पर आत्मनिर्भरता होगी।

उन्होंने कहा कि जिस देश के घरों को रोशन करने वाली ऊर्जा और फैसले लेने वाली तकनीक दोनों उसके अपने नियंत्रण में होंगी, वही वास्तव में स्वतंत्र माना जाएगा।

अदाणी ने कहा कि यह कोई सैद्धांतिक बात नहीं है, बल्कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं—United States और China—पहले ही इस दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।

अमेरिका और चीन से सीखने की जरूरत

गौतम अदाणी ने कहा कि अमेरिका और चीन की राजनीतिक व्यवस्थाएं भले ही अलग हों, लेकिन उनके रणनीतिक लक्ष्य लगभग समान हैं। दोनों देश ऊर्जा और तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अमेरिका ने शेल ऑयल और गैस क्रांति के जरिए खुद को ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत किया, जबकि चीन ने बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी टेक्नोलॉजी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश किया।

अदाणी के मुताबिक, आने वाले समय में वैश्विक शक्ति का संतुलन केवल आर्थिक उत्पादन से तय नहीं होगा, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सा देश ऊर्जा और इंटेलिजेंस दोनों पर नियंत्रण रखता है।

भारत की सबसे बड़ी ताकत है बढ़ती मांग

गौतम अदाणी ने भारत की आर्थिक संभावनाओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेजी से बढ़ती मांग है।

उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक भारत 500 गीगावॉट पावर क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है और 2047 तक इसे बढ़ाकर 2000 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और आने वाले वर्षों में ऊर्जा की मांग कई गुना बढ़ने वाली है। खासकर AI और डेटा सेंटरों के विस्तार के कारण बिजली की खपत में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।

AI बदलेगा भारत की अर्थव्यवस्था

गौतम अदाणी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी नहीं है। इसके पीछे विशाल डेटा सेंटर, चिप्स, नेटवर्क और भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा कि जैसे National Payments Corporation of India के UPI प्लेटफॉर्म ने छोटे व्यापारियों और आम लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा, वैसे ही AI आने वाले समय में लाखों नए बिजनेस मॉडल और नई कंपनियों को जन्म देगा।

अदाणी ने कहा कि AI भारत के लिए उतना ही बड़ा बदलाव ला सकता है जितना मोबाइल इंटरनेट और डिजिटल पेमेंट्स ने लाया था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को AI के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

अदाणी ग्रुप का बड़ा विजन

Adani Group के चेयरमैन ने अपने समूह की भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि समूह गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित कर रहा है।

इसके अलावा अदाणी ग्रुप वैश्विक टेक कंपनियों Google और Microsoft के साथ बड़े डेटा सेंटर कैंपस पर भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपना AI इंफ्रास्ट्रक्चर देश के भीतर ही विकसित करना होगा ताकि भविष्य में डेटा और तकनीक के मामले में बाहरी देशों पर निर्भरता कम हो सके।

भारत@100 विजन पर जोर

अपने भाषण के अंत में गौतम अदाणी ने कहा कि भारत के पास आने वाले दशकों में दुनिया की सबसे बड़ी विकास कहानी बनने का अवसर है। लेकिन इसके लिए देश को ऊर्जा, तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर निवेश करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल आर्थिक विकास पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था बनानी होगी जो वैश्विक संकटों के बीच भी देश को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाए रखे।

CII समिट में गौतम अदाणी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया मिडिल ईस्ट तनाव, ऊर्जा संकट और AI की वैश्विक दौड़ से गुजर रही है। ऐसे में उनका यह संदेश भारत की भविष्य की रणनीति और आर्थिक दिशा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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